राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड में जितने भी मोहरे पकड़े जा रहे हैं, उन सबके तार कहीं न कहीं चंपत राय की कार्यशैली, उनके फैसलों और उनकी मेहरबानियों से सीधे जुड़ रहे हैं. हालांकि चंपत राय का नाम FIR में उनका नाम नहीं है, लेकिन जो नए राज सामने आ रहे हैं. उसमें चढ़ावा चोरी के कई किरदारों की भूमिका संदेह के घेरे में हैं और इन सारे किरदारों का कनेक्शन कहीं न कहीं चंपत राय से भी है.

बात सिर्फ रिश्तेदारों तक सीमित नहीं थी. बैंक और ट्रस्ट के बीच हुए MoU की धज्जियां उड़ा दी गईं. दान पात्र खोलने के नियम टूटे, निर्धारित सदस्य अनुपस्थित रहे, गणनाकर्मियों का कोई ड्रेस कोड नहीं था और बैंककर्मियों की अनिवार्य मौजूदगी भी सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई. क्या इतने बड़े स्तर पर हो रही इस लापरवाही की चंपत राय को भनक तक नहीं थी?
वहीं, दूसरा बड़ा खेल ‘टिन्नू एंड कंपनी’ पर मेहरबानी का हैृ. चढ़ावा गिनने जैसे अतिसंवेदनशील काम में बिना किसी जांचपरख के टिन्नू के रिश्तेदारों की सीधे एंट्री करा दी गई. दावा है कि बिना किसी अनुभव और योग्यता के, सिर्फ सिफारिशों के दम पर लोगों को भर लिया गया. ये पूरी तरह से अपनों को रेवड़ियां बांटने जैसा था.
चढ़ावा चोरी कांड में SOP का उल्लंघन
वहीं, के सवालों पर चंपत राय ने कहा कि गड़बड़ी नहीं होने देने की जिम्मेदारी मेरी थी. टिन्नू लंबे समय से जुड़ा था इसलिए भरोसा किया. टिन्नू से चंदा चोरी में शामिल होने की उम्मीद नहीं थी. जरुरतमंद को रोजगार देने के लिए अवसर दिया. लोगों को रोजगार देने का निर्णय व्यक्तिगत नहीं था.ट्रस्ट के दूसरे पदाधिकारियों की इसमें भूमिका रही.
लेकिन आरोप बैंक के काम में सीधे दखल का लगा है. सूत्रों के मुताबिक, 3 महीने पहले ही बैंक ने अलर्ट दिया था, लेकिन उसकी अनदेखी की गई. बैंक ने गणना कर्मचारियों को बदलने की पेशकश की थी, लेकिन उसे ठुकरा कर रोटेशन रोक दिया गया.
सूत्रों ने कहा कि गिनती के दौरान सिक्योरिटी गार्ड तैनात करने, गिनती के कमरे में अंदरबाहर जाते समय लोगों की तलाशी लेने और दान की गिनती के प्रोसेस का CCTV फुटेज 180 दिनों तक सुरक्षित रखने जैसे स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का उल्लंघन किया गया.
चढ़ावा व्यवस्था की कई खामियां उजागर
उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करते हुए, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय के पूर्व ड्राइवर रमाशंकर यादव उर्फ टीनू यादव के पास कई ‘हुंडियों’ की चाबियां थीं.
एक सूत्र ने कहा, “वहां कई ‘हुंडियां’ थीं. इसलिए, जिन हुंडियों की चाबियां टीनू के पास थीं, उनमें मिला कैश SOPs को लागू करने में ढिलाई के कारण ठग लिया गया. काम करने का सही तरीका अभी पता लगाया जा रहा है.”
ट्रस्ट अधिकारियों और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों की एक मीटिंग में SOPs को फाइनल किया गया था. इसे 2025 में तब लागू किया गया था जब ट्रस्ट अधिकारियों को शक हुआ कि डोनेशन काउंटिंग प्रोसेस में कुछ गड़बड़ है. मंदिर ट्रस्ट के एक अहम सदस्य अनिल मिश्रा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के गोविंद मिश्रा ने SOPs पर ऑफिशियली साइन किए थे.
केवल 45 दिन रखे गये सीसीटीवी फुटेज
सूत्र ने कहा, “SOPs में एक ड्रेस कोड शामिल था जिसके तहत डोनेशन काउंटिंग स्टाफ को बिना जेब वाले कपड़े पहनने थे, सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज एजेंसी के जरिए एक गार्ड की तैनाती, डोनेशन काउंटिंग रूम में आनेजाने वाले सभी लोगों की रेगुलर तलाशी और रैंडम चेकिंग की जाती थी। इनमें से किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया.”
SIT द्वारा सामने आई एक और बड़ी गलती यह थी कि डोनेशन काउंटिंग प्रोसेस का CCTV फुटेज जरूरी 180 दिनों के बजाय सिर्फ 45 दिनों के लिए रखा गया था. SIT रिपोर्ट के मुताबिक, डोनेशन काउंटिंग इंचार्ज और आरोपी सुभाष श्रीवास्तव को ट्रस्ट के टॉप तीन अधिकारियों में से एक की सिफारिश पर अपॉइंट किया गया था.
यह विवाद 7 जून को तब शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने राम मंदिर में डोनेशन के गबन का आरोप लगाया, जिसे राय ने खारिज कर दिया था. राय ने कहा था, “चल रहे इंटरनल ऑडिट के दौरान कुछ भी खास सामने नहीं आया है.”
25 जून को दर्ज हुई FIR
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर 13 जून को सनसनीखेज आरोपों की जांच के लिए बनाई गई SIT ने राय को गलत साबित किया. सूत्रों ने माना कि इसके नतीजों को देखते हुए, राम मंदिर मैनेजमेंट सेटअप में एक बड़ा “ओवरहॉल” होने वाला था.
उन्होंने PTI को बताया कि SIT को मंदिर के मामलों के मैनेजमेंट में कथित मिसमैनेजमेंट, डोनेशन के गबन, बड़ी कमियों और खुली लापरवाही की चौंकाने वाली डिटेल्स को सामने लाने में सिर्फ छह दिन लगे. ये नतीजे 23 जून को सरकार को सौंपी गई शुरुआती रिपोर्ट का हिस्सा थे.
SIT रिपोर्ट जमा करने के बाद, 25 जून को मामले में एक FIR दर्ज की गई और आठ आरोपियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टीनू यादव को गिरफ्तार किया गया.
टिन्नू एंड कंपनी पर बरसी मेहरबानी
पुलिस ने कहा कि टिन्नू यादव ने अपने रिश्तेदार और सहआरोपी मनीष कुमार यादव को मंदिर की कैशकाउंटिंग यूनिट में काम पर रखा था सभी आठ आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
सूत्रों के मुताबिक, आठ में से छह आरोपियों से अब तक लगभग 80 लाख रुपये कैश और कुछ विदेशी करेंसी बरामद की गई है. सोर्स ने कहा, “हालांकि जांच अभी भी चल रही है, लेकिन आपने देखा होगा कि SIT की शुरुआती जांच के बड़े नतीजों को देखते हुए, ट्रस्ट को FIR दर्ज करने के लिए मजबूर होने के बाद कितनी तेजी से कार्रवाई हुई.”
सूत्र ने कहा, “विवाद शुरू होने के बाद और SIT बनने से ठीक पहले, डोनेशन काउंटिंग रूम के पास एक वॉशरूम से 2.5 लाख रुपये बरामद किए गए.” सूत्र ने कहा कि यह खुलासा “बहुत शर्मनाक” था क्योंकि ट्रस्ट को मैनेज करने वाले “जिम्मेदार” लोग इस कथित धोखाधड़ी से अनजान थे.
इनपुटः ब्यूरो रिपोर्ट, टीवी9 भारतवर्ष


