8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं. इसी बीच भारत पेंशनर्स समाज ने आयोग के सामने कई अहम सुझाव रखे हैं. इनमें केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर ₹69,000 करने और न्यूनतम पेंशन को ₹45,000 करने की मांग शामिल है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। भारत पेंशनर्स समाज का एक प्रतिनिधिमंडल ने 8वें वेतन आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की है. प्रतिनिधिमंडल में BPS के अध्यक्ष आरके चौहान और महासचिव अविनाश राजपूत शामिल थे. इस मीटिंग में संगठन ने कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, महंगाई भत्ता और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े कई सुझाव आयोग के सामने रखे.

ध्यान देने वाली बात ये है कि ये फिलहाल सिफारिशें हैं, अंतिम फैसला नहीं हैं. 8वां वेतन आयोग कर्मचारियों, पेंशनर्स और दूसरे संबंधित संगठनों से सुझाव ले रहा है. इन सुझावों के आधार पर आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा. रिपोर्ट लागू होने से पहले इसे केंद्र सरकार और कैबिनेट की मंजूरी मिलना जरूरी होगा.
न्यूनतम पेंशन ₹45,000 करने की मांग
BPS ने मौजूदा न्यूनतम पेंशन ₹9,000 से बढ़ाकर ₹45,000 करने का सुझाव दिया है. यानी संगठन चाहता है कि न्यूनतम पेंशन में करीब पांच गुना बढ़ोतरी हो. इसके अलावा संगठन ने सुझाव दिया है कि न्यूनतम पेंशन आखिरी वेतन का 67% और फैमिली पेंशन आखिरी वेतन का 50% होनी चाहिए.
₹69,000 न्यूनतम बेसिक सैलरी का प्रस्ताव
केंद्रीय कर्मचारियों की मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है. BPS ने इसे बढ़ाकर ₹69,000 करने का सुझाव दिया है. इसके पीछे संगठन ने 3.83 के फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा है. अगर 3.83 का फिटमेंट फैक्टर स्वीकार किया जाता है, तो ₹18,000 की मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे बढ़कर करीब ₹69,000 हो सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ₹69,000 की सैलरी तय हो गई है. यह फिलहाल कर्मचारी संगठन की मांग है.
परिवार की गणना में बड़ा बदलाव
BPS ने न्यूनतम वेतन तय करने के लिए परिवार की यूनिट को 3 से बढ़ाकर 5.2 करने का सुझाव दिया है. इसके तहत कर्मचारी को 1 यूनिट, पति या पत्नी को 1 यूनिट, दो बच्चों को 0.80.8 यूनिट और दो मातापिता को 0.80.8 यूनिट माना जाएगा. संगठन का मानना है कि परिवार के सदस्यों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम वेतन तय करने की व्यवस्था में बदलाव किया जाना चाहिए.
हर तीन महीने में DA और DR बढ़ाने की मांग
फिलहाल केंद्र सरकार महंगाई भत्ता यानी DA और महंगाई राहत यानी DR में साल में दो बार बदलाव करती है. आमतौर पर यह बदलाव जनवरी और जुलाई के प्रभाव से किया जाता है. BPS ने DA और DR को हर तीन महीने में बदलने का सुझाव दिया है. संगठन चाहता है कि इसकी गणना तीन महीने के औसत आंकड़ों के आधार पर की जाए. इसके अलावा BPS ने यह भी सुझाव दिया है कि जब DR 25% से ज्यादा हो जाए तो उसे बेसिक पेंशन में मर्ज किया जाना चाहिए.
पेंशनर्स के लिए हेल्थ सुविधाओं की मांग
BPS ने ग्रामीण इलाकों और CGHS की सुविधा से बाहर रहने वाले पेंशनर्स के लिए कैशलेस हेल्थकेयर सुविधा देने की मांग की है. इसके साथ ही ₹5,000 का फिक्स मेडिकल अलाउंस देने का सुझाव भी दिया गया है. संगठन ने BSNL के पेंशनर्स से जुड़े पेंशन समानता और स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दों को हल करने की भी मांग की है.
क्या है भारत पेंशनर्स समाज?
भारत पेंशनर्स समाज की स्थापना जनवरी 1955 में हुई थी. यह पेंशनर्स से जुड़े मुद्दों को उठाने वाला संगठन है और पेंशन एवं पेंशनर्स कल्याण विभाग और नीति आयोग से मान्यता प्राप्त होने का दावा करता है. संगठन के अनुसार, इसके साथ करीब 245 पेंशनर्स एसोसिएशन जुड़ी हुई हैं और यह देशभर के करीब 10 लाख पेंशनर्स के हितों का प्रतिनिधित्व करता है.



