नई दिल्ली। तापसी पन्नू की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘गांधारी’ आखिरकार ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो गई है। देवाशीष मखीजा के निर्देशन और कनिका ढिल्लों की कहानी वाली यह फिल्म एक ऐसी मां की कहानी सामने रखती है, जिसकी बेटी अचानक गायब हो जाती है। बेटी की तलाश में निकली मां का सामना ऐसे खतरनाक आपराधिक नेटवर्क से होता है, जहां हर कदम पर उसके सामने नई चुनौती खड़ी होती है। फिल्म में तापसी ने बानी नाम की मां का किरदार निभाया है।

मां की तलाश से शुरू होती है खतरनाक कहानी
‘गांधारी’ की कहानी एक बच्ची के गायब होने से शुरू होती है। बानी अपनी बेटी को खोजने के लिए निकलती है, लेकिन धीरेधीरे उसे एहसास होता है कि यह कोई सामान्य गुमशुदगी का मामला नहीं है। जांच आगे बढ़ने के साथ वह बच्चों की तस्करी से जुड़े एक बड़े आपराधिक नेटवर्क तक पहुंचती है।
फिल्म का काल्पनिक शहर जॉयपुर्रा कहानी को एक अलग माहौल देता है। यहां डर, रहस्य और अपराध का वातावरण लगातार बना रहता है। फिल्म में ‘बहुरूपियों’ का इस्तेमाल भी कहानी को एक रहस्यमय रंग देता है।
तापसी पन्नू बनीं फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष तापसी पन्नू की परफॉर्मेंस है। बानी के किरदार में वह एक मां की बेचैनी, गुस्सा, मजबूरी और अपनी बेटी को वापस पाने की जिद को प्रभावी ढंग से सामने लाती हैं।
एक्शन वाले हिस्सों में तापसी का अंदाज फिल्म को रफ्तार देता है। खासकर ऐसे दृश्यों में, जहां बानी अकेले मुश्किल परिस्थितियों का सामना करती है, तापसी की स्क्रीन प्रेजेंस प्रभाव छोड़ती है। कुछ समीक्षकों ने उनके प्रदर्शन को फिल्म की प्रमुख ताकत माना है।
एक्शन और सस्पेंस में फिल्म मजबूत
‘गांधारी’ सिर्फ मांबेटी की कहानी नहीं है, बल्कि इसे एक एक्शनथ्रिलर के रूप में भी पेश किया गया है। फिल्म में लगातार रहस्य और खतरे का माहौल बना रहता है। कहानी के कई मोड़ दर्शकों को आगे क्या होगा, यह सोचने पर मजबूर करते हैं।
एबीपी की समीक्षा ने फिल्म को 3.5/5 स्टार दिए और इसके एक्शन तथा सस्पेंस की तारीफ की। वहीं दूसरी तरफ कुछ समीक्षकों ने कहानी और उसके ट्रीटमेंट को कम प्रभावशाली माना है।
मांबेटी का रिश्ता क्यों नहीं कर पाया उतना इमोशनल?
फिल्म का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस कहानी का आधार मां और बेटी का रिश्ता है, क्या वह रिश्ता दर्शकों के दिल तक उतनी गहराई से पहुंच पाता है?
यहीं ‘गांधारी’ कुछ जगहों पर कमजोर दिखाई देती है। बानी की बेटी को वापस पाने की बेचैनी कहानी में मौजूद है, लेकिन मांबेटी के रिश्ते को और गहराई से विकसित किया जाता तो भावनात्मक प्रभाव कहीं ज्यादा मजबूत हो सकता था।
यानी फिल्म में एक्शन और बदले की भावना ज्यादा प्रभावी नजर आती है, जबकि रिश्ते की भावनात्मक परत उतनी मजबूती से सामने नहीं आती। कुछ समीक्षाओं ने भी फिल्म की विश्वसनीयता और कहानी के प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।
सपोर्टिंग कास्ट ने भी दिया साथ
तापसी के साथ फिल्म में इश्वाक सिंह, छाया कदम, स्वास्तिका मुखर्जी, मीता वशिष्ठ और जतिन सरना जैसे कलाकार नजर आते हैं। इश्वाक सिंह बानी के पति के किरदार में हैं, जबकि बाकी कलाकार कहानी में अलगअलग महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हैं।
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है?
‘गांधारी’ का विषय गंभीर है और फिल्म की शुरुआत भी दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखती है, लेकिन कहानी हर जगह समान प्रभाव पैदा नहीं कर पाती। कुछ जगहों पर किरदारों और घटनाओं को और बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकता था।
यही वजह है कि जहां कुछ समीक्षकों ने इसे सस्पेंस और एक्शन के लिए पसंद किया, वहीं कुछ ने इसे अपेक्षाओं के मुकाबले कम प्रभावशाली बताया।
क्या ‘गांधारी’ देखनी चाहिए?
अगर आपको एक्शन, मिस्ट्री और थ्रिलर पसंद हैं और तापसी पन्नू के दमदार किरदार देखना पसंद करते हैं, तो फिल्म आपको पसंद आ सकती है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। लेकिन अगर आप मुख्य रूप से एक बेहद गहरी और भावुक मांबेटी की कहानी देखने की उम्मीद कर रहे हैं, तो फिल्म कुछ जगहों पर आपकी उम्मीद पूरी नहीं कर पाएगी।



