कर्नाटक में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर सवाल उठने लगे हैं. इसकी वजह है वोटर्स के नाम हटाने से जुड़े फॉर्म7 आवेदनों की तेजी से बढ़ती संख्या. सितंबर से अक्टूबर के बीच इन आवेदनों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसी बीच एक और जानकारी सामने आई है जिसमें बताया गया है कि चुनाव अधिकारियों ने खुद 61,059 फॉर्म7 दाखिल किए, लेकिन इन आवेदनों में नाम हटाने का कारण दर्ज नहीं किया गया.

फॉर्म7 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में किसी नाम को शामिल करने पर आपत्ति दर्ज कराने या किसी वोटर का नाम हटाने की मांग करने के लिए किया जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक में 16 जून से 22 अक्टूबर के बीच फॉर्म7 के कुल 2,28,917 आवेदन मिले. वहीं, 23 सितंबर तक इनकी संख्या 58,475 थी. इस तरह करीब एक महीने में 1,70,442 नए आवेदन सामने आए. यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब राज्य में SIR के तहत वोटर लिस्ट की जांच और उसे अपडेट करने की प्रक्रिया चल रही है.
चुनाव अधिकारियों ने भरे 61,059 फॉर्म7
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि 61,059 फॉर्म7 चुनाव अधिकारियों की ओर से दाखिल किए गए. सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, इन आवेदनों में नाम हटाने की वजह नहीं बताई गई, जिसकी वजह से इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि नाम हटाने की वजह बताना वोटर रजिस्ट्रेशन रूल्स, 1960 के तहत जरूरी है. नियमों के मुताबिक, निर्धारित प्रक्रिया और कारण के बिना दाखिल आपत्ति खारिज की जा सकती है. अधिकारियों का कहना है कि दूसरी जगह रहने, दोहरी एंट्री, कम उम्र, मृत्यु या भारतीय नागरिक न होने जैसी स्थितियों में फॉर्म7 भरने को कहा गया था.
1 महीने में फॉर्म भरने के आंकड़ें
हालांकि, ऑटोजेनरेटेड फॉर्म में वजह खाली रह गए. आंकड़ों के मुताबिक, 24 अगस्त से 23 सितंबर के बीच अधिकारियों ने केवल 192 आवेदन भरे थे, जबकि 24 सितंबर से 22 अक्टूबर के बीच 60,800 से ज्यादा आवेदन दाखिल हुए, 22 अक्टूबर को ही 10,105 आवेदन भरे गए. आंकड़ों के मुताबिक, बेंगलुरु अर्बन में सबसे ज्यादा 24,268 आवेदन मिले. इसके बाद BBMP साउथ में 19,662 और BBMP नॉर्थ में 18,659 आवेदन दर्ज किए गए.
फॉर्म 7 को भरने का क्या है नियम?
- कौन आवेदन कर सकता है: संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की वोटर लिस्ट में दर्ज मतदाता आवेदन कर सकता है. वह किसी दूसरे मतदाता के नाम पर आपत्ति जता सकता है या अपना नाम हटाने का अनुरोध कर सकता है.
- आवेदक की जानकारी: अपना नाम, EPIC नंबर और अपना या पिता, माता, पति अथवा कानूनी अभिभावक का मोबाइल नंबर देना होगा.
- आपत्ति का कारण: नाम हटाने का कारण चुनना होगा, जैसे मृत्यु, कम उम्र, स्थायी रूप से दूसरी जगह जाना, दो जगह नाम होना या भारतीय नागरिक न होना. कारण साबित करने की जिम्मेदारी आवेदक की होगी.
- संबंधित मतदाता की जानकारी: जिस व्यक्ति के नाम पर आपत्ति है, उसका नाम, उपनाम, EPIC नंबर और पता भरना होगा.
- घोषणा: आवेदक को घोषित करना होगा कि दी गई जानकारी सही है. गलत जानकारी देने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
फॉर्म7 को लेकर कांग्रेस और BJP आमनेसामने
इस मामले को लेकर कर्नाटक में राजनीतिक विवाद भी चल रहा है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा फॉर्म7 का इस्तेमाल बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटवाने के लिए कर रही है. वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है. इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने इसी महीने की शुरुआत में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के ऑफिस के बाहर प्रदर्शन भी किया था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके बाद CEO ने इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स को मामले की जांच करने के निर्देश दिए.
क्यों भरा जाता है फॉर्म7?
फॉर्म7 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में किसी नाम को शामिल करने पर आपत्ति जताने या किसी मतदाता का नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है. यह फॉर्म तब भरा जा सकता है, जब किसी मतदाता की मृत्यु हो गई हो, वह स्थायी रूप से दूसरी जगह चला गया हो, उसकी उम्र कम हो, उसका नाम दो जगह दर्ज हो या वह भारतीय नागरिक न हो. इसके अलावा, कोई मतदाता खुद भी वोटर लिस्ट से अपना नाम हटाने के लिए आवेदन कर सकता है. फॉर्म में नाम हटाने का स्पष्ट कारण बताना और उसके समर्थन में सबूत देना जरूरी है.



