कानपुर। हेलो प्रशांत, मैं एसीपी राठौर साइबर क्राइम करौल बाग दिल्ली से बोल रहा हूं, आप गंदी फिल्म देखते हैं। अगर मामले को खत्म करना है तो फार्म 31 भरना होगा और उसकी सिक्योरिटी फीस दो हजार रुपये भेजनी होगी। बिरहाना रोड कमला टावर के पास रहने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रशांत कुमार गुप्ता के मोबाइल पर जब शनिवार रात ये काल आई तो वह सहम गए। उन्होंने डरकर फोन करने वाले व्यक्ति द्वारा भेजे क्यूआर पर रुपये ट्रांसफर कर दिए, लेकिन मामला यहीं नहीं रुका।

दो दिन बाद ठगी का अहसास हुआ
प्रशांत डिजिटल अरेस्ट हो चुके थे। इस दौरान एसीपी बने ठग ने वीडियो काल कर प्रशांत की डीसीपी बने ठग से भी बात कराई और ठग ने 2.66 लाख ठग लिए। सोमवार को प्रशांत को ठगी का अहसास हुआ और वह पिता संग पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल से गुहार लगाने पहुंचे, जहां ठग ने उनके सामने भी 20 हजार रुपये मांग लिए। पुलिस आयुक्त ने मामले में मुकदमा दर्ज करने के आदेश देते हुए जांच के लिए टीम लगाई। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वहीं जांच में ठगों का ये गिरोह हरियाणा के मेवात जिले का निकला है।

ठग ने खुद को एसीपी प्रमोद कुमार राठौर बताया
कमला टावर निवासी सीए प्रशांत कुमार गुप्ता ने बताया कि शनिवार रात लगभग 9:30 बजे उनके पास एक काल आई। फोन करने पर वाले ने अपना नाम एसीपी प्रमोद कुमार राठौर बताते हुए उनका नाम पूछा। इसके बाद वाट्सएप पर काल करने को कहा। उस आफिस के कुछ कार्य में व्यस्त होने के चलते काल नहीं कर सके। कुछ ही देर बाद फिर काल आई।

ठग ने बताए मामला खत्म करने के दो रास्ते
एसीपी बने व्यक्ति ने कहा कि फेसबुक अकाउंट चलाते हैं। आप गंदी फिल्म देखते हैं। आपको पता है 2016 से ये प्रतिबंधित हैं। प्रशांत के मुताबिक, उसने कहा कि उसने कोई फिल्म नहीं देखी और हो सकता है कि फेसबुक अकाउंट हैक हो गया। इसके बाद फोन कट गया और पांच मिनट बाद फिर काल आई। उसने कहा कि इस मामले को खत्म करने के दो रास्ते हैं।

कई चक्कर दिल्ली के लगाने होंगे
एक कानूनी रूप से लंबी प्रक्रिया है। इसमें कई चक्कर दिल्ली लगाने होंगे। दूसरा रास्ता गैर कानूनी है, जिसमें फार्म नंबर 31 भरा जाता है। इसमें सिक्योरिटी फीस दो हजार रुपये भेजा। उसने वाट्सएप पर यूपीआइ भेजा। प्रशांत ने कहा कि वह काफी सहम गए थे। उन्होंने दो हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए, लेकिन फिर काल आई कि कुछ तकनीकी कारणों से रुपये नहीं आए।

फिर इस तरह से निकाला केस का हल
एक काम करो 10 हजार रुपये भेजा। 50 फीसदी वापस हो जाएंगे। इस तरह से कभी पांच, कभी 10 तो कभी 20 हजार ट्रांसफर करवाते हुए रात 11:30 बजे तक 65 हजार रुपये ले लिए गए। फिर रविवार सुबह काल आई।

पूरा आफिस सेटअप सामने था
उसने कहा कि फाइल क्लोज करने के लिए डीसीपी साहब के पास गई है। उन्हें भी कुछ समझना होगा। इस पर प्रशांत ने उससे कहा कि डीसीपी से वीडियो काल कर बात कराइए। कुछ ही देर में दो वर्दीधारी वीडियो काल पर दिखे। पूरा आफिस सेटअप सामने था। एक एसीपी राठौर और दूसरा डीसीपी बताया गया। पूरा आफिस डीसीपी बने व्यक्ति ने कहा कि फाइल पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। कुछ खर्चा पानी करा दो। मना करते ही वह भड़क गए। बाद में उन्हें पैसे दिए, लेकिन सोमवार को फिर काल आई, पर काल नहीं रिसीव की।

पुलिस आयुक्त के सामने ठग ने की बात
परेशान होकर उन्होंने अधिवक्ता पिता बसंत लाल गुप्ता को पूरी बात बताई और उनके साथ सोमवार को पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल से मिला। पुलिस आयुक्त ने ठग को मैसेज करने को कहा कि वह रुपयों की व्यवस्था के लिए बैंक आए हुए हैं। इसके बाद फिर काल आ गई। फोन स्पीकर पर किया। ठग ने उनसे पुलिस आयुक्त के सामने कहा कि उनकी टीम इटावा के एक होटल में है। उसका 20 हजार रुपये भुगतान करना है। इसके बाद टीम तुम्हारे घर आकर फाइल रिसीव कराकर केस खत्म कर देगी। उसने शाम तक रुपयों की व्यवस्था करने की बात कही।

‘पुलिस की तीन गाड़ियां घर आएंगी, जिंदगी बर्बाद हो जाएगी’
प्रशांत ने बताया कि एसीपी राठौर बने व्यक्ति ने कहा कि डीसीपी साहब को 80 हजार रुपये करा दो। मना करने पर डीसीपी ने कहा कि तीन गाड़ियां दिल्ली से तुम्हारे घर जाएगी तो जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। कहीं के नहीं रहोगे। पढ़े लिखे लड़के हो। काहे जिंदगी खराब करना चाहते हो। उनकी धमकियों से डरकर उन्होंने तीन बार में 80 हजार रुपये दे दिए। इस दौरान तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रहे प्रशांत ने कहा कि वह काफी सहम गया था। कभी नहीं सोचा था कि इस तरह से उसके साथ होगा।