Best Breastfeeding Positions: मां का दूध नवजात शिशु के लिए संपूर्ण पोषण का सबसे अच्छा सोर्स माना जाता है। लेकिन पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को कई बार कुछ जानकारियां नहीं होती है। उनके लिए सभी चीजें नई होती है और कई बार उनकी मदद के लिए उनके पास कोई नहीं होता है। ऐसे में सही तरीके और सही पोजीशन में स्तनपान कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सही पोजीशन न सिर्फ बच्चे को बेहतर तरीके से दूध पीने में मदद करती है, बल्कि मां को पीठ, कंधे और निप्पल के दर्द से भी राहत दिलाने का काम करती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसी पोजीशन चुनें जिसमें मां और बच्चा दोनों आरामदायक महसूस करें। आइए जानते हैं इन पोजिशन के बारे में।

क्रैडल होल्ड

यह सबसे सामान्य और लोकप्रिय पोजीशन है। इसमें बच्चे का सिर उसी हाथ की कोहनी पर टिका होता है, जिस तरफ से मां दूध पिला रही होती है। यह पोजीशन उन शिशुओं के लिए बेहतर मानी जाती है, जिन्हें स्तनपान की आदत हो चुकी हो।

क्रॉसक्रैडल होल्ड

नवजात शिशुओं या जिन्हें सही तरह से लैच करने में परेशानी होती है, उनके लिए यह पोजीशन काफी उपयोगी मानी जाती है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसमें मां बच्चे के सिर को विपरीत हाथ से सपोर्ट करती है, जिससे बच्चे को सही तरीके से स्तन पकड़ने में मदद मिलती है।

फुटबॉल होल्ड

इस पोजीशन में बच्चे को मां अपनी बगल की ओर फुटबॉल की तरह पकड़ती है। यह खासतौर पर सीसेक्शन डिलीवरी, जुड़वां बच्चों या बड़े स्तनों वाली महिलाओं के लिए आरामदायक विकल्प माना जाता है।

ब्रेस्टफीडिंग पोजिशन

साइडलाइंग पोजीशन

इस पोजीशन में मां और बच्चा दोनों करवट लेकर आमनेसामने लेटते हैं। यह रात में कराने या सीसेक्शन के बाद आराम की स्थिति में फीड कराने के लिए उपयोगी पोजिशन मानी जाती है। हालांकि, फीडिंग के दौरान मां को जागरूक रहना चाहिए और दूध पिलाने के बाद बच्चे को उसके अलग सुरक्षित बिस्तर में सुलाना चाहिए।

लेडबैक या रिक्लाइंड पोजीशन

इसमें मां हल्का पीछे टिककर बैठती या लेटती है और बच्चा उसके सीने पर पेट के बल रहता है। यह पोजीशन बच्चे की प्राकृतिक स्तनपान की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है और कई मांओं के लिए आरामदायक होती है।

स्तनपान कराते समय रखें इन बातों का ध्यान

  • मां और बच्चे दोनों की स्थिति आरामदायक होनी चाहिए।
  • बच्चे का सिर, गर्दन और शरीर एक सीध में रहें।
  • दूध पिलाते समय आगे की ओर ज्यादा न झुकें, जरूरत हो तो तकिए का सहारा लें।
  • अगर बच्चे को सही तरह से लैच करने में परेशानी हो, दर्द हो या बारबार दूध छुड़ाए, तो डॉक्टर या लैक्टेशन कंसल्टेंट से सलाह लें।