
मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक और प्रमुख है. उसका नाम 2001 के संसद हमले, 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 के पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े मामलों में सामने आया है.
पाकिस्तान की रेड बुक 2026 में कुल 1804 ‘मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादियों’ में मसूद अजहर का नाम 1480वें नंबर पर दर्ज है. (PTI)
पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना आतंकी मसूद अजहर के रखे इनाम की रकम में इजाफा किया है. जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकी मसूद अजहर पर घोषित इनाम की रकम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दी गई है. पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने उसे अपनी मोस्ट वांटेड लिस्ट में भगोड़ा बताते हुए उसके बारे में जानकारी देने वाले को इनाम देने की घोषणा की. वहीं, भारत ने पाकिस्तान के इस कदम को गंभीरता से लेने के बजाय इसे महज दिखावा और सस्ता हथकंडा करार दिया है.
पाकिस्तान 2021 से दावा करता आ रहा है कि मसूद अजहर अफगानिस्तान भाग चुका है, जबकि भारतीय एजेंसियों का मानना है कि वो पाकिस्तान में ही छिपा है. अब आंतकी मसूद अजहर पर इनाम की राशि बढ़ाने के फैसले पर भारत ने प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार (15 सितंबर 2026) को मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “पाकिस्तान के ऐसे हथकंडे और लोगों को गुमराह करने वाली घोषणाएं नई नहीं हैं. भारत उसकी हर चाल से वाकिफ हैं.” जायसवाल के मुताबिक, अगर पाकिस्तान वास्तव में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करना चाहता है, तो उसे सिर्फ घोषणाएं करने के बजाय जमीन पर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए.
पाकिस्तान ने क्यों बढ़ाया इनाम?
न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर इनाम में 20 लाख पाकिस्तानी रुपये की बढ़ोतरी की है. पहले यह रकम 50 लाख पाकिस्तानी रुपये थी. इसे अब 70 लाख पाकिस्तानी रुपया कर दिया गया है. इसके साथ ही अजहर को पाकिस्तान की नई रेड बुक/मोस्ट वांटेड लिस्ट में भगोड़े के तौर पर शामिल किया गया है. 2026 की रेड बुक में कुल 1,804 ‘मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादियों’ में मसूद अजहर का नाम 1480वें नंबर पर फरार आतंकी के बतौर दर्ज है. मसूद के इस लिस्ट में शामिल होने की तारीख 31 दिसंबर, 2021 है.
पाकिस्तान का नया पैंतरा! FATF की बैठक से पहले आतंकी मसूद अजहर पर ‘झूठे एक्शन’ को लेकर किया बड़ा ऐलान
भारत ने क्यों कहा ‘फर्जी घोषणा’?
भारत का तर्क है कि सिर्फ किसी आतंकी के खिलाफ इनाम घोषित करने से यह साबित नहीं होता कि पाकिस्तान वास्तव में उसके खिलाफ कार्रवाई कर रहा है. विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को सीधे तौर पर कहा कि उसे ‘फोनी’ यानी दिखावटी घोषणाओं की जगह वास्तविक कदम उठाने चाहिए. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। रणधीर जायसवाल ने कहा कि एक ऐसे देश की ओर से इस तरह की घोषणा, जिस पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं, तब तक कोई खास मायने नहीं रखती जब तक उसके पीछे वास्तविक कार्रवाई न हो.
कौन है मसूद अजहर?
मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक और प्रमुख है. भारत लंबे समय से उस पर कई बड़े आतंकी हमलों की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाता रहा है. उसका नाम 2001 के संसद हमले, 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 के पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े मामलों में सामने आया है. मसूद अजहर का नाम भारत के लिए इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह उन आतंकियों में शामिल है; जिसे 1999 के IC-814 कंधार प्लेन हाइजैक के बाद भारत को रिहा करना पड़ा था.
मार्च 2024 में भारत ने जारी की थी मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट
इससे पहले भारत ने पाकिस्तान से मसूद अजहर समेत 20 आतंकियों को भारत को सौंपने की मांग की थी. मार्च 2024 में भारत ने वॉन्टेड लोगों की एक लिस्ट जारी की थी. इसमें भी मसूद अजहर का नाम टॉप पर है.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्यों की हुई मौत
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. इसके तहत 6 और 7 मई की दरमियानी रात को पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों पर हमले किए गए. इनमें बहावलपुर में जैश का हेडक्वार्टर ‘मरकज सुभानअल्लाह’ भी शामिल था. रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर में आतंकी मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य और उसके 4 करीबी साथी मारे गए थे. मरने वालों में मसूद की बड़ी बहन और उसका पति, मसूद का भतीजा और उसकी पत्नी, मसूद की एक भतीजी और उसके पांच बच्चे शामिल थे.



