अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को बोर्ड ऑफ पीस के पहले चार्टर का औपचारिक ऐलान कर दिया। यूनाइटेड नेशन के तर्ज पर बनाए गए बोर्ड ऑफ पीस का काम दुनियाभर के झगड़े सुलझाने का होगा। मूलरूप से इसे इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध के बाद गाजा के पुनर्निमाण और शासन को देखरेख के लिए बनाया गया, लेकिन फिर इसका विस्तार कर दिया गया। इसमें पाकिस्तान समेत कई देशों ने सदस्य बनने के लिए सहमति दी है।
स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बोर्ड ऑफ पीस के ऐलान के समय एक दर्जन से ज्यादा देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और टॉप डिप्लोमैट मौजूद रहे। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, पैराग्वे के कंजर्वेटिव राष्ट्रपति सैंटियागो पेना, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव आदि की मौजूदगी रही।
बोर्ड ऑफ पीस के लॉन्च पर ट्रंप ने कहा कि गाजा सीजफायर डील के तहत हमास को हथियार छोड़ने होंगे, नहीं तो यह फिलिस्तीनी आंदोलन का अंत होगा। ट्रंप ने कहा, “उन्हें अपने हथियार छोड़ने होंगे, और अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो यह उनका अंत होगा।” उन्होंने आगे कहा कि इस्लामी समूह हाथों में राइफल लेकर पैदा हुए थे।





