Himachal Se: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ने सोशल मीडिया पर अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिकों की फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों से ठगी करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. एसटीएफ ने एक नाइजीरियाई नागरिक को दिल्ली से गिरफ्तार किया है. आरोपी को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी अधिकारियों ने शनिवार को दी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। एसटीएफ की ओर से जारी बयान में कहा गया कि आरोपी की पहचान नाइजीरिया के ओलो स्टेट निवासी उचेनवा के रूप में हुई है, जो वर्तमान में दक्षिण दिल्ली के खानपुर इलाके में रह रहा था. आरोपी को नाम बदलकर ठगी करने के मामले में बृहस्पतिवार रात गिरफ्तार किया गया है.

एसटीएफ के मुताबिक, आरोपी और उसके साथी फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर विदेशी नागरिक बनकर फर्जी प्रोफाइल बनाते थे, इसके बाद लोगों को अपना शिकार बनाते थे. ठगी करने से पहले सोशल मीडिया पर पुरुषों एवं महिलाओं से ऑनलाइन दोस्ती करते थे और झांसे में लेने के बाद उन्हें शिकार बनाते थे.
ऐसे बनाते थे ठगी का शिकार
अधिकारियों ने बताया कि यह गिरोह कथित तौर पर विदेश से महंगे गिफ्ट और विदेशी मुद्रा भेजने का झांसा देते थे. बाद में आरोपी खुद को सीमा शुल्क या आयकर विभाग का अधिकारी बताकर यह दावा करते थे कि पार्सल हवाई अड्डे पर रोक लिया गया है और उसे छुड़ाने के लिए पैसों देने होंगं. सीमा शुल्क, जीएसटी के नाम पर लोगों से लाखों रुपए वसूलते थे. उन्होंने बताया कि आरोपी के पास से तीन मोबाइल फोन और चार सिम कार्ड बरामद हुए हैं.
एसटीएफ ने कहा कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के बाद की गई. उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सक्रिय नाइजीरियाई साइबर ठगी गिरोहों के संबंध में कई बार शिकायत मिल चुकी थी, लेकिन खुफिया सूचना के आधार पर इस बार यह कार्रवाई की गई है. जांच के दौरान एसटीएफ को वर्ष 2026 में लखनऊ निवासी एक व्यक्ति द्वारा मड़ियांव थाने में शिकायत दर्ज कराई थी.
फर्जी नाम से बनाते थे आईडी
अधिकारियों के अनुसार, शिकायतकर्ता अगस्त 2025 में ‘डोरिस विलियम’ नामक ब्रिटेन की महिला की फर्जी फेसबुक प्रोफाइल के जाल में फंस गया था. पीड़ित को बाद में बताया गया कि दिल्ली हवाई अड्डे पर करीब तीन करोड़ रुपये के गिफ्ट और विदेशी मुद्रा पहुंची है. इसके बाद उससे सीमा शुल्क, आयकर, जीएसटी और अन्य शुल्क के नाम पर पैसे जमा कराने को कहा गया था.
एसटीएफ के अनुसार, पीड़ित ने वर्ष 2025 से जनवरी 2026 के बीच कई किश्तों में करीब 68 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे. गिरफ्तार किए गए आरोपी ने बताया कि वह वर्ष 2010 में गारमेंट कारोबार के सिलसिले में भारत आया था, लेकिन घाटा होने के बाद साइबर ठगी में शामिल हो गया.



