राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का काम चल रहा है. 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जिन पात्र नागरिकों के नाम छूट गए हैं, वे आखिरी लिस्ट में अपना नाम शामिल कराने के लिए ‘दावे और आपत्तियां’ दर्ज करने की मौजूदा अवधि के दौरान ‘फॉर्म 6’ भर सकते हैं. आंकड़ों से पता चलता है कि वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए आए 4.5 लाख ‘फॉर्म 6’ आवेदनों में से 42 दिनों में केवल 1,238 आवेदनों का ही निपटारा किया गया है.

समाचार पत्र द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को नए निर्देश दिए हैं. इसके तहत, बूथस्तरीय अधिकारियों को घरघर जाकर उन 47.5 लाख नामों का फिर से सत्यापनकरना होगा, जिन्हें ‘अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट’ श्रेणियों के तहत ड्राफ्ट सूची से हटा दिया गया था. लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म भरने के लिए अब केवल 10 दिन बचे हैं.
अब तक मिले ‘फॉर्म 6’ आवेदनों में से 1 फीसदी पर भी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे नाम शामिल करने की प्रक्रिया में देरी हो रही है. 31 अगस्त से 11 अक्टूबर तक की निर्वाचन क्षेत्रवार साप्ताहिक रिपोर्ट से पता चलता है कि इन आवेदनों में से कुछ स्वीकार किए गए हैं और कुछ अस्वीकार. सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तिथि 30 नवंबर है और इस देरी ने उन नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है जो अपना नाम फिर से लिस्ट में शामिल करवाना चाहते हैं.
दिल्ली के लोगों की क्यों बढ़ी चिंताएं?
जिन लोगों के आवेदन एक महीने से अधिक समय से लंबित हैं, उनका कहना है कि अगर 30 अक्टूबर के बाद किसी गलती की वजह से उनका आवेदन खारिज हो जाता है, तो उनके पास दोबारा आवेदन करने का मौका नहीं बचेगा. आखिरी वोटर लिस्ट 4 दिसंबर को पब्लिश की जाएगी. दिल्ली के CEO के 18 अक्टूबर तक के दैनिक बुलेटिन के अनुसार, नाम शामिल करने के लिए आए 4.5 लाख आवेदनों में से लगभग 2.39 लाख आवेदन उन लोगों के हैं जो अपना नाम फिर से जुड़वाना चाहते हैं या जिन्होंने ड्राफ्ट लिस्ट पब्लिश होने के बाद पहली बार आवेदन किया है. यह संख्या ड्राफ्ट चरण के दौरान हटाए गए 47.5 लाख नामों के मुकाबले बहुत कम है. बाकी 2.12 लाख आवेदन ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने से पहले, यानी जून और अगस्त के बीच प्राप्त हुए थे.
फॉर्म के निपटारे से जुड़ी रिपोर्ट बताती है कि 70 में से 15 विधानसभा क्षेत्रों में ‘फॉर्म 6’ का कोई निपटान नहीं हुआ है. इनमें बुराड़ी भी शामिल है, जहां 1.67 लाख नाम हटाए गए हैं. यहां दिल्ली में कुल संख्या के हिसाब से सबसे ज़्यादा वोटर हटाए गए है. पूरे उत्तरी जिले में जहां 36,000 से ज्यादा आवेदन मिले हैं, वहां केवल 27 फॉर्म का ही निपटान हो पाया है. अधिकारियों का कहना है कि इसमें देरी इसलिए हुई क्योंकि BLO नोटिस वाले मामलों के निपटान में व्यस्त थे.
फॉर्म7 का निपटारा 7 गुना ज्यादा हुआ
इसी रिपोर्ट से पता चलता है कि ‘फॉर्म 7’ के आवेदनों का निपटारा, ‘फॉर्म 6’ के मुक़ाबले पांच गुना ज़्यादा हुआ है. फॉर्म 7 नाम शामिल करने पर आपत्ति जताने या मौजूदा नाम हटाने के लिए होता है. इस बीच 5800 से अधिक फॉर्म 7 का निपटान किया गया. यह तब हो रहा है जबकि BLO को नाम जोड़ने और आपत्ति जताने के दोनों तरह के आवेदनों के लिए फील्ड वेरिफिकेशन करना होता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यही नहीं, आपत्तियों वाले मामलों में 15 दिन का नोटिस पीरियड भी शामिल होता है. फॉर्म6 के आवेदनों के लिए एक BLO को फिजिकल वेरिफिकेशन करने और रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी जाती है. इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे का फैसला लिया जाता है.



