Monday, April 6, 2026
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ये संकेत बताते हैं कि आप भगवान के करीब हैं, बरसने लगी है ईश्‍वर की विशेष कृपा!..

ये संकेत बताते हैं कि आप भगवान के करीब हैं, बरसने लगी है ईश्‍वर की विशेष कृपा!..
ये संकेत बताते हैं कि आप भगवान के करीब हैं, बरसने लगी है ईश्‍वर की विशेष कृपा!..

भगवान की कृपा पाने के लिए लोग पूजा-पाठ प्रार्थनाएं करते हैं. जब वाकई भगवान की विशेष कृपा होती है तो व्‍यक्ति अंदर से भी बदल जाता है और उसकी बाहरी दुनिया भी बदलने लगती है. व्‍यक्ति जितना भगवान के करीब होता जाता है, उसका मन उतना ही सिर्फ भगवान पर केन्द्रित होता जाता है. जानिए वो संकेत जिनसे पता चलता है कि भगवान आपके साथ हैं.

भगवान के साथ होने के संकेत
दया और प्रेम की भावना – भगवान जब आपके साथ हों तो आपके मन में हर व्‍यक्ति के प्रति प्रेम और दया की भावना रहती है. भले ही वे आपके अपने हों या पराए या पूरी तरह अनजान लोग. ऐसा व्‍यक्ति उन लोगों को भी आसानी से माफ कर देता है, जिसने उनके साथ बहुत बुरा किया हो. उनमें क्षमा करने की भावना आ जाती है और वे अपने साथ हो रही हर अच्‍छी-बुरी घटना को भगवान की मर्जी मानकर स्‍वीकार कर लेते हैं.

न सुख में सुखी न दुख में दुखी – ऐसे लोग हर स्थिति में तटस्‍थ रहते हैं. न सुख में खुश होते हैं और न दुख में दुखी. बल्कि वे अंदर से सिर्फ भगवान का स्‍मरण करते हैं, नाम जप करते हैं और भगवान जैसे रखें उसमें संतुष्‍ट रहते हैं. उनके लिए भौतिक जीवन कोई मायने नहीं रखता है.

सभी में सिर्फ अच्‍छाई देखना – जिस व्‍यक्ति पर भगवान की विशेष कृपा हो वो सभी में सिर्फ अच्‍छाई देखता है. वह लोगों की बुराइयों को नजरअंदाज कर लेता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वह किसी में दोष नहीं देखता.

दूसरों से अलग-थलग रहना – व्‍यक्ति पर जब भगवान की विशेष कृपा हो तो उसे सांसारिक जीवन अच्‍छा नहीं लगता. वह सभी से अलग-थलग र‍हता है. उसे सिर्फ भगवान का भजन करना अच्‍छा लगता है. वह ऐसा कोई काम नहीं करना चाहता है जिससे उसका भजन छूटे.

दूसरों का कल्‍याण – जिस व्‍यक्ति को भगवान का साथ मिले वह सिर्फ दूसरों के कल्‍याण के बारे में सोचता है. यहां तक कि वह संसार के कल्‍याण के लिए अपने भजन का फल भी दूसरों को दे देता है. बदले में वो किसी से कोई चाह नहीं रखता है.

हमेशा भगवत चर्चा – ऐसे व्‍यक्ति को हमेशा भगवत चर्चा करना ही अच्‍छा लगता है. इसके अलावा वह न तो अन्‍य किसी विषय के बारे में सोचना चाहता है, न बोलना-सुनना चाहता है.

me.sumitji@gmail.com

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