Himachal Se: नौतपा के दौरान तेज धूप और बढ़ते तापमान की वजह से हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। हीट स्ट्रोक गर्मी से होने वाली बीमारियों का सबसे खतरनाक रूप है और अगर समय पर इसकी पहचान और इलाज न किया जाए, तो यह तेज़ी से एक मेडिकल इमरजेंसी बन सकता है। कई शुरुआती लक्षणों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, क्योंकि वे सामान्य थकान या डिहाइड्रेशन जैसे ही लगते हैं। इसलिए समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है, वरना यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। चलिए जानते हैं हीट स्ट्रोक के संकेत को कैसे पहचानें?

हीट स्ट्रोक क्या है?
हीट स्ट्रोक गर्मी से होने वाली सबसे गंभीर बीमारी है और इसके लिए तुरंत डॉक्टरी मदद की ज़रूरत होती है। बहुत ज़्यादा गर्मी या शरीर में पानी की कमी होने पर, यह कूलिंग सिस्टम काम करना बंद कर सकता है, जिससे शरीर का तापमान खतरनाक हद तक बढ़ जाता है।
हीट स्ट्रोक होने पर शरीर में दिखते हैं ये संकेत
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सिरदर्द: सिरदर्द, हीट स्ट्रोक के एक आम लक्षणों में से एक है। यह सबसे पहले दिखाई देने वाले लक्षणों में से एक होता है। अगर आपको अचानक सिरदर्द महसूस हो, तो सावधान रहें और गर्मी में बाहर निकल जाएँ। इस स्थिति में शरीर को ठंडा करना बहुत ज़रूरी है।
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चक्कर आना: चक्कर आना भी हीटस्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों में से एक है। इसके साथ अक्सर पैरों में लड़खड़ाहट भी होती है, जिसे आपके आसपास के लोग आसानी से देख सकते हैं।
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पसीना न आना: पसीना आना शरीर का खुद को ठंडा रखने का एक नेचुरल तरीका है। अगर आपको गर्मी में अचानक पसीना आना बंद हो जाए, तो यह इस बात का सीधा संकेत है कि शरीर अपने तापमान को ठीक से नियंत्रित नहीं कर पा रहा है।
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मांसपेशियों में ऐंठन: हीट क्रैम्प्स गर्मी से होने वाली एक कम गंभीर बीमारी है। ये मांसपेशियों में ऐंठन या बस सामान्य मांसपेशियों की कमज़ोरी के रूप में सामने आ सकते हैं।
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शरीर के तापमान का ज्यादा होना: हीट स्ट्रोक होने पर शरीर का तापमान अचानक बढ़कर 104 डिग्री तक या उससे भी अधिक हो जाता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
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जी मिचलाना और उल्टी: पेट और पाचन संबंधी परेशानी भी हीटस्ट्रोक से जुड़ी होती है। अगर आपका जी अचानक मिचलाने लगे या उल्टी हो जाए, तो यह एक चेतावनी का संकेत हो सकता है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके, डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।
हीट स्ट्रोक से कैसे करें बचाव?
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शरीर को रखें हाइड्रेटेड: हीटस्ट्रोक से बचाव का मतलब है, शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड यानी पानी की कमी न होने देना।
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दोपहर में बाहर न निकलें: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक जब धूप सबसे तेज होती है, तब घर से बाहर निकलने से बचें।
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सिर ढक कर रखें: नौतपा में बाहर निकलते समय हमेशा छाता, टोपी या सूती दुपट्टे से अपना सिर और चेहरा अच्छी तरह ढकें।
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हल्के कपड़ों का करें चुनाव: हल्के रंग के, ढीले और हवादार सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर को ठंडक मिल सके।



