अमेरिका की राजनीति में इन दिनों एक नई हलचल देखने को मिल रही है, जहां ईरान को लेकर असफल बातचीत के बाद जिम्मेदारी तय करने की चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मजाक में कहा था कि अगर ईरान से समझौता होता है तो उसका श्रेय वह लेंगे, और अगर नहीं हुआ तो दोष उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पर जाएगा।
बता दें कि अब जब इस्लामाबाद में हुई बातचीत बेनतीजा रही और वेंस खाली हाथ लौटे हैं, तो यह बयान फिर से चर्चा में आ गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान के साथ बातचीत आसान नहीं रही है। इससे पहले 2015 में हुआ परमाणु समझौता भी करीब 20 महीने की लंबी प्रक्रिया के बाद संभव हो पाया था, जिसे ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2018 में खत्म कर दिया था।
गौरतलब है कि इस बार भी हालात काफी जटिल रहे। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ईरान की ओर से सख्त शर्तें रखी गईं, जिनमें प्रतिबंधों में पूरी छूट और अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने की मांग शामिल बताई जा रही है। वहीं अमेरिकी पक्ष की कुछ प्रमुख शर्तों को ईरान ने बातचीत के दौरान खारिज कर दिया।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के अंदर भी इस मुद्दे को लेकर मतभेद सामने आए हैं। वेंस को इस बातचीत की जिम्मेदारी ऐसे समय दी गई, जब उनकी स्थिति पहले की तुलना में कमजोर मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कई बार सैन्य कार्रवाई के खिलाफ अपनी राय रखी थी, जिससे उनकी पकड़ प्रशासन में कमजोर हुई है।
गौरतलब है कि ट्रंप का रुख भी लगातार बदलता नजर आया है। कभी वह ईरान के प्रस्ताव के कुछ हिस्सों को स्वीकार करने की बात करते हैं, तो कभी होर्मुज जलडमरूमध्य में सख्ती दिखाने के संकेत देते हैं। इस अस्थिर नीति ने बातचीत को और कठिन बना दिया।
इस बीच अमेरिका के अंदर भी दबाव बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर ईंधन की कीमतों पर दिख रहा है, वहीं आगामी चुनाव को लेकर भी राजनीतिक माहौल गर्म है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।
मौजूद हालात यह संकेत देते हैं कि अगर आने वाले समय में कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता है, तो इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप पहले भी अपने सहयोगियों को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं और हाल के महीनों में कई अहम पदों पर बदलाव भी किए गए हैं।
गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति होने के कारण वेंस को पद से हटाना आसान नहीं है, लेकिन राजनीतिक स्तर पर उनकी छवि और भविष्य पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस मामले का ठीकरा उनके सिर फोड़ा जाता है, तो उनके आगे के राजनीतिक सफर पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है।