कहा जाता है कि अगर ईरान पर बरसों से अमेरिकी सेंशंस नहीं होते तो आज ईरान की तरक्की और उसकी इजात, उसकी खोज, उसके आविष्कार दुनिया देखती। कहा तो यह भी जाता है कि आज भी ईरान में छोटी बड़ी ऐसी बहुत सी टेक्नोलॉजी है जो दुनिया की नजरों से छिपी हुई है। दुनिया सिर्फ ईरान की आर्म इंडस्ट्री और खासकर रिवर्स इंजीनियरिंग से वाकिफ है। लेकिन ईरान दुनिया का एकलौता इस्लामिक मुल्क होगा जिसने साइंस और मजहब दोनों को एक साथ बड़ी समझदारी से समन्वित किया और इस्लामिक रेवोल्यूशन के बाद तो इस दिशा में जमकर काम हुआ। कहा जाता है कि उनके साइंटिस्ट ने ऐसीऐसी चीजें बना ली है जो अब तक दुनिया से छिपी हुई हैं। शायद इसी वजह से आरोप लगता है कि अमेरिका और इसराइल ईरान के वैज्ञानिकों की जान के दुश्मन बने रहते हैं।
इस्लामिक रिपब्लिक में कर्बला वाले जज्बे के साथ-साथ अपने दुश्मन को तकनीक के मैदान में भी धूल चटाने की सलाहियत है। ईरान में महंगाई के खिलाफ हुए प्रदर्शन या मुजाहरे देखते ही देखते हिंसक होने लगे थे। तीन से 4 दिन में ईरान में आग ही आग थी और महंगाई से राहत दो के नारे इस्लामिक रेवोल्यूशन मुर्दाबाद में बदल गए। अमेरिका खुलकर सामने आया। प्रेसिडेंट ट्रंप ने कहा किसी भी प्रदर्शनकारी पर कारवाई हुई तो अमेरिका एक्शन लेगा। ईरान में सरकार भी भांप गई कि यह तो मामला ही कुछ और है। फिर इसराइल के पीएम बेंजामिन बेंजामिन नेतन्याहू का बयान आ गया। 2026 की जनवरी ईरान में कत्लो गारत और बर्बादी लाई थी। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। दुनिया भर में ईरान के वीडियो दिखाए जा रहे थे। ईरान एक्शन में आया। एहतेजाज कर रहे लोगों पर काबू पाने के लिए देश भर में इंटरनेट बंद कर दिया गया और इसके बाद प्रदर्शनकारियों के लीडर और उनकी जड़ को तलाशने का अभियान चला।
ईरान में इंटरनेट और मोबाइल बंद कर दिए जाने पर सीआईए एक्टिव हुई और अमीर कारोबारी एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक से राब्ता कायम किया गया संपर्क किया गया। स्टारलिंक कंपनी ने अपनी खास सेटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए ईरान में इंटरनेट की सप्लाई शुरू कर दी। ट्रंप ने खुद ऐलान किया कि ईरान में स्टारलिंक की नेट सुविधा है। प्रदर्शनकारी लगे रहें।



