Situational Anxiety Symptoms: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग Anxiety का शिकार हो रहे हैं। कई बार इंटरव्यू और एग्जाम के ठीक पहले दिल तेजी से धड़कने लगता है और हाथपैर कांपने लगते हैं। कई बार किसी से बात करते समय या पब्लिक स्पीकिंग से पहले सांसें तेज चलने लगती हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति घबराहट और बेचैनी महसूस करने लगता है।

हालांकि, हर बार इस तरह की परेशानी किसी एंग्जायटी डिसऑर्डर का संकेत नहीं होती। कई बार किसी खास परिस्थिति या महत्वपूर्ण इवेंट से पहले होने वाली अस्थायी घबराहट को Situational Anxiety कहा जाता है। यह कोई बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन जब यह परेशानी बारबार होने लगे या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं क्या है Situational Anxiety, इसके लक्षण ?

क्या होती है Situational Anxiety?

Situational Anxiety एक ऐसी स्थिति है, जिसमें किसी खास परिस्थिति के सामने आने पर व्यक्ति को डर, चिंता, बेचैनी या घबराहट महसूस होने लगती है। यह परेशानी आमतौर पर किसी विशेष घटना या परिस्थिति से जुड़ी होती है।

इंटरव्यू, एग्जाम, पब्लिक स्पीकिंग, प्रेजेंटेशन, पहली बार किसी से मिलने या कोई महत्वपूर्ण फैसला लेने से पहले ऐसी एंग्जायटी महसूस हो लगती है। आमतौर पर स्थिति खत्म होने या व्यक्ति के सहज महसूस करने के बाद यह घबराहट कम होने लगती है।

किन कारणों से होती है Situational Anxiety?

सिचुएशन एंग्जायटी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख है दूसरों के सामने खुद को साबित करने या उनके जज किए जाने का डर। ऐसे और भी वजहें हैं, जिससे हमें एंजाइटी होने लगती है।

 1. एग्जाम या इंटरव्यू में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाने की चिंता।

2. पब्लिक स्पीकिंग या प्रेजेंटेशन के दौरान दूसरों की प्रतिक्रिया को लेकर घबराहट होना।

3. खुद पर भरोसा नहीं होने से बेचैनी बढ़ना।

4. खुद से बहुत ज्यादा अपेक्षाएं रखना और गलती होने का डर।

5. पहली बार किसी चुनौतीपूर्ण या अनजान स्थिति का सामना करना।

6. ऑफिस में बॉस के सामने अपनी बात रखते समय या किसी बात को लेकर डिसकस करते समय।

शरीर में क्या आते हैं बदलाव?

1. जब दिमाग किसी परिस्थिति को तनावपूर्ण या खतरनाक समझता है, तो शरीर का स्ट्रेस रिस्पॉन्स सक्रिय हो सकता है। इस दौरान सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम शरीर को चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करता है।

2. इस प्रक्रिया को फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स भी कहा जाता है। इसके कारण हार्ट रेट बढ़ना, सांस तेज चलना, मांसपेशियों में तनाव और अधिक पसीना आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

3. कुछ लोगों को पेट में गड़बड़ी, हाथपैर कांपना, मुंह सूखना, चक्कर आना और एकाग्रता में परेशानी भी महसूस हो सकती है। यानी एंग्जायटी का असर केवल दिमाग पर ही नहीं, बल्कि शरीर पर भी दिखाई देता है।

 4. इसी तरह एग्जाम में अच्छे नंबर लाने का दबाव और इंटरव्यू में नौकरी मिलने की उम्मीद भी तनाव बढ़ा सकती है।

Situational Anxiety को कैसे करें मैनेज?

अगर किसी खास परिस्थिति से पहले आपको घबराहट होती है, तो कुछ आसान आदतें अपनाकर इसे नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

1. इंटरव्यू, एग्जाम या प्रेजेंटेशन के लिए पहले से तैयारी करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और अनिश्चितता कम होती है।

2. घबराहट होने पर धीरेधीरे और नियंत्रित तरीके से सांस लेने की कोशिश करें। इससे शरीर को शांत करने में मदद मिल सकती है।

3. बारबार असफलता या गलती के बारे में सोचने के बजाय अपनी तैयारी और क्षमता पर ध्यान दें।

4. घबराहट के कारण हर बार इंटरव्यू, प्रेजेंटेशन या दूसरी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से बचना समस्या को बढ़ा सकता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। धीरेधीरे इनका सामना करने की कोशिश करें।

5. पर्याप्त नींद लें, नियमित एक्सरसाइज करें और दिनचर्या को व्यवस्थित रखें। इससे तनाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

कब डॉक्टर से करें संपर्क?

किसी खास परिस्थिति से पहले थोड़ी घबराहट होना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर एंग्जायटी बारबार होने लगे, बहुत ज्यादा डर महसूस हो, नींद और कामकाज प्रभावित होने लगे या व्यक्ति जरूरी गतिविधियों से बचने लगे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

नोट: इस लेख में दी गई जानकारियां सामान्य सूचनाओं पर आधारित है। बंसल न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता। अमल में लाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लें।