सितंबर का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बुरे सपने जैसा रहा. सेंसेक्स से लेकर निफ्टी तक, हर तरफ भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला. इस गिरावट में निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए. अब जब अक्टूबर की शुरुआत हो चुकी है, तो दलाल स्ट्रीट को उम्मीद थी कि बाजार अपनी खोई हुई रफ्तार वापस हासिल कर लेगा. लेकिन आज भी बाजार में भारी गिरावट देखनो के मिल रही है. ऐसे मेंमौजूदा हालात को देखते हुए ये रास्ता इतना आसान भी नहीं लग रहा है. एक तरफ त्योहारी सीजन की मांग है, तो दूसरी तरफ ग्लोबल मार्केट से आने वाले निगेटिव संकेत. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ऐसे में निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को लेकर काफी सतर्क रहने की जरूरत है.

त्योहारी सीजन से दलाल स्ट्रीट की उम्मीदें
अक्टूबर का महीना ऐतिहासिक रूप से भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी अच्छा माना जाता है. एसबीआई सिक्योरिटीज के हेड सन्नी अग्रवाल का कहना है कि इसका सबसे बड़ा कारण त्योहारी सीजन की शुरुआत है. इस दौरान ऑटोमोबाइल, ज्वेलरी से लेकर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स तक की मांग तेजी से बढ़ती है. ज्यादातर सेक्टर्स के लिए वित्त वर्ष की दूसरी छमाही डिमांड के नजरिए से काफी बेहतर रहती है. इसका असर कंपनियों की कमाई पर पड़ता है. पिछले 10 सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो निफ्टी 50 ने 7 बार अक्टूबर में पॉजिटिव रिटर्न दिया है. सेंसेक्स के साथ निफ्टी ने औसतन 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है. वहीं मिडकैप 150 ने 1 प्रतिशत के साथ स्मॉलकैप 250 इंडेक्स ने औसतन 1.4 प्रतिशत तक का रिटर्न निवेशकों की झोली में डाला है.
ग्लोबल टेंशन बिगाड़ सकती है बाजार का मूड
भले ही इतिहास बाजार के पक्ष में हो, लेकिन मौजूदा चुनौतियां निवेशकों को डरा रही हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में भी उछाल देखा जा रहा है. विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. इसके साथ ही रुपये की कमजोरी ने भी चिंता बढ़ा दी है. सितंबर में सेंसेक्स के साथसाथ निफ्टी में 6 प्रतिशत की भारी गिरावट आई. मिडकैप 150 इंडेक्स में 6.6 प्रतिशत के साथ स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में 3.2 प्रतिशत की टूट दर्ज की गई. मार्च के बाद से ये किसी भी महीने में सबसे बड़ी गिरावट है. इविरस सिक्योरिटीज के डायरेक्टर तेजस शाह का मानना है कि अक्टूबर का महीना ये तय करेगा कि क्या सितंबर की गिरावट ने सारे जोखिमों को पचा लिया है, या अभी करेक्शन बाकी है.
निफ्टी के लिए कहां बन रही है बड़ी रुकावट
बुधवार को निफ्टी 22,620 के स्तर पर बंद हुआ था. हालिया गिरावट से पहले 23,000 का जोन बाजार के लिए एक मजबूत सपोर्ट का काम कर रहा था. विश्लेषकों का मानना है कि अब यही 23,000 से लेकर 23,100 का स्तर बाजार के लिए एक तगड़ी रुकावट यानी रेजिस्टेंस बन गया है. जानकारों के मुताबिक, जिस दिन बाजार इस लेवल को पार कर लेगा, तब निवेशकों का सेंटीमेंट पॉजिटिव हो जाएगा. इसके बाद अगला लक्ष्य 23,600 का रहने वाला है. अच्छी बात ये है कि बाजार इस वक्त ओवरसोल्ड जोन में है, जिससे जल्द ही हल्की रिकवरी की उम्मीद की जा सकती है.
बाजार को ऊपर खींचने में बैंक दिखाएंगे दम
अक्टूबर में शेयर बाजार की दिशा तय करने में बैंकिंग शेयरों का सबसे अहम रोल होने वाला है. तेजस शाह के मुताबिक, बैंकिंग के साथसाथ फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर का निफ्टी में काफी बड़ा वेटेज है. ऐतिहासिक रूप से प्राइवेट बैंकों ने अक्टूबर के महीने में शानदार प्रदर्शन किया है. अगर इन शेयरों में नई खरीदारी आती है, तो इसका फायदा पूरे ब्रॉडर मार्केट को मिलेगा. निवेशकों को अब अक्टूबर से शुरू हो रहे सितंबर तिमाही के नतीजों का भी इंतजार है, जिससे बड़ी कंपनियों की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लग सकेगा. अगर नतीजे अच्छे आते हैं, तो बाजार को एक नई दिशा मिल सकती है.



