अचानक बजी फोन की घंटी, फिर मोबाइल पर आया मैसेज, क्लिक करते ही खाते से गायब हो गए 1 लाख रुपए!!..

भोपाल: डिजिटल इंडिया के दौर में जहां बैंकिंग और बिल भुगतान आसान हुए हैं, वहीं साइबर अपराधियों ने भी मासूम लोगों को ठगने के लिए नए-नए जाल बिछाने शुरू कर दिए हैं. ताजा मामला भोपाल का है, जहां साइबर ठगों ने सरकारी कर्मचारी और बैंक अधिकारी बनकर बुजुर्गों के जीवन भर की कमाई पर हाथ साफ कर दिया. इन शातिर ठगों ने ऐसी साजिश रची कि पीड़ित को भनक तक नहीं लगी कि कब उनका बैंक खाता खाली हो गया. पुलिस के पास पहुंचे इन मामलों ने एक बार फिर शहर में सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामला मिसरोद थाना क्षेत्र के रोजवुड एन्क्लेव निवासी 65 वर्षीय दिनेश काले का है, जो इस ठगी का पहला शिकार बने. दिनेश एमपीआईडीसी से रिटायर्ड हैं, उनके पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया और कॉल करने वाले ने खुद को विद्युत विभाग का कर्मचारी बताया.

ठग ने डराते हुए कहा कि उनके मकान का बिजली बिल अपडेट नहीं है और अगर तुरंत स्मार्ट मीटर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया, तो बिजली काट दी जाएगी. घबराहट में दिनेश काले ने उसकी सलाह मान ली. ठग ने मात्र 12 रुपये का रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करने के लिए उनके मोबाइल पर एक लिंक भेजा. जैसे ही उन्होंने लिंक पर क्लिक किया और ठग के बताए अनुसार प्रक्रिया पूरी की, उनके बैंक खाते से 99 हजार 264 रुपये कट गए. जब उन्होंने विरोध किया, तो ठग ने 48 घंटे में पैसे वापस आने का झांसा देकर उनसे 800 रुपये और ऐंठ लिए. ठगी का दूसरा मामला शाहपुरा पुलिस क्षेत्र से सामने आया है, जहां 81 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक कृष्ण बहादुर सक्सेना को निशाना बनाया गया. उन्हें पंजाब नेशनल बैंक का कर्मचारी बनकर एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन किया और पेंशन कार्ड बनवाने का झांसा दिया.

आरोपी ने बातों-बातों में उनसे डेबिट कार्ड की गोपनीय जानकारी और सीवीवी (CVV) नंबर ले लिया. कुछ ही देर में उनके बैंक ऑफ इंडिया के खाते से 1 लाख 69 हजार 400 रुपये निकाल लिए गए. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इन दोनों ही घटनाओं में ठगों ने बुजुर्गों के भरोसे और उनकी पेंशन संबंधी जरूरतों का फायदा उठाया, जिससे पीड़ित अब गहरे सदमे में हैं. भोपाल पुलिस के साइबर सेल ने इन दोनों मामलों में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि लोग किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही फोन पर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा करें. स्मार्ट मीटर या पेंशन अपडेट के नाम पर कोई भी विभाग पैसे नहीं मांगता है. फिलहाल पुलिस उन बैंक खातों और फोन नंबरों को ट्रेस कर रही है, जिनका इस्तेमाल इस वारदात में किया गया.