सरकार की Gold Monetisation Scheme में बड़ा बदलाव हो सकता है. अगर नया प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो ज्वैलर्स को ग्राहकों से लिया गया पुराना सोना रिफाइनरी तक पहुंचाने पर करीब 1% अतिरिक्त कमाई होगी.इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन ने सरकार को इस योजना का नया प्रस्ताव दिया है. इसके मुताबिक, ज्वैलर्स ग्राहकों का पुराना सोना इकट्ठा करके रिफाइनर को देंगे और बदले में उन्हें करीब 1% इंसेंटिव मिलेगा.

IBJA के अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी ने बताया कि अगर यह योजना लागू होती है, तो ज्वैलर्स हर लेनदेन पर अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे. इससे वे इस योजना को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में भी रुचि दिखाएंगे.
ज्वैलर्स क्यों होंगे इस योजना का अहम हिस्सा?
कोठारी का कहना है कि ज्यादातर लोग सोना ज्वैलर्स से ही खरीदते हैं. इसलिए अगर को इंसेंटिव मिलेगा, तो वे खुद लोगों को इस योजना के बारे में बताएंगे और उन्हें इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित करेंगे. उन्होंने बताया कि प्रस्ताव में 0.75% से 1% तक इंसेंटिव देने की बात कही गई है. हालांकि अंतिम फैसला सरकार करेगी.
बैंकों की भूमिका होगी सीमित
पहले इस योजना में बैंक मुख्य भूमिका निभाते थे, लेकिन लोगों को यह भी पता नहीं होता था कि किस बैंक की कौनसी शाखा सोना जमा करती है. इससे योजना ज्यादा सफल नहीं हो सकी. नई व्यवस्था में इकट्ठा करने का काम ज्वैलर्स करेंगे, जबकि सोने का डिपॉजिट बैंक में ही रहेगा. यानी ग्राहकों से जुड़ा पूरा काम ज्वैलर्स संभालेंगे.
ज्वैलर्स और ग्राहकों दोनों को होगा फायदा
Senco Gold & Diamonds के MD और CEO सुवंकर सेन के अनुसार, इस योजना से ज्वैलर्स के स्टोर पर ज्यादा ग्राहक आएंगे और उनसे जुड़ाव भी बढ़ेगा। इससे कारोबार को भी फायदा मिलेगा.
सरकार का मकसद क्या है?
सरकार चाहती है कि लोगों के घरों में रखा हजारों टन सोना इस्तेमाल में आए. इससे सोने का आयात कम होगा और देश का आयात बिल भी घटेगा. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सरकार इस योजना को त्योहारी सीजन से पहले शुरू करना चाहती है. फिलहाल इस पर RBI, बैंकों और ज्वैलरी उद्योग के साथ लगातार बैठकें हो रही हैं.
Gold Monetisation Scheme कैसे काम करती है?
इस योजना में ग्राहक अपना पुराना सोना अधिकृत Collection and Purity Testing Centre में जमा कराते हैं. वहां सोने की शुद्धता जांची जाती है.ग्राहक की मंजूरी के बाद सोने को पिघलाकर शुद्ध सोने में बदला जाता है और बैंक के Gold Deposit Account में जमा कर दिया जाता है.
जमा किए गए सोने पर ब्याज रुपये में मिलता है. योजना पूरी होने पर ग्राहक चाहें तो सोना वापस ले सकते हैं या फिर उसकी मौजूदा बाजार कीमत के बराबर रुपये ले सकते हैं.



