जयपुर के एक व्यक्ति को अपनी मां से मिले 16 लाख रुपए के कैश गिफ्ट के मामले में बड़ी राहत मिली है. मां ने अपने पुराने सोने के गहने बेचकर यह रकम बेटे को दी थी. इसके बाद इनकम टैक्स विभाग ने बैंक खाते में जमा नकदी के सोर्स पर सवाल उठाते हुए उसकी आय में 13.04 लाख रुपए जोड़ दिए थे. फिर मामला आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण पहुंचा. जयपुर पीठ ने दस्तावेजों और सबूतों की जांच के बाद विभाग की इस कार्रवाई को गलत माना और 13.04 लाख रुपए की एक्स्ट्रा इनकम को हटाने का आदेश दिया.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला झूठा राम बनाम आयकर अधिकारी से जुड़ा है. यह आकलन वर्ष 201213 का मामला है. जयपुर स्थित ITAT ने 6 अक्टूबर 2026 को इस पर फैसला सुनाया. आयकर विभाग को जानकारी मिली थी कि झूठा राम ने एक वित्त वर्ष के दौरान संपत्ति खरीदने और उससे जुड़े स्टांप शुल्क व रजिस्ट्रेशन पर कुल 20,23,778 रुपए खर्च किए थे. इसके अलावा, उनके बैंक खाते में 13,04,900 रुपए नकद जमा हुए थे. झूठा राम ने शुरुआत में आकलन वर्ष 201213 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया था. इसके बाद विभाग ने 29 मार्च 2019 को आयकर कानून की धारा 148 के तहत नोटिस जारी कर पुराने मामले का दोबारा आकलन शुरू किया.

झूठा राम ने 3 दिसंबर 2019 को अपना रिटर्न दाखिल किया. इसमें उन्होंने 2,14,997 रुपए की आय दिखाई, लेकिन, आयकर अधिकारी उनके लेनदेन के स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुए. अधिकारी ने संपत्ति में किए गए निवेश के लिए 20,23,778 रुपए और बैंक में जमा नकदी के लिए 13,04,900 रुपए को अस्पष्ट मानते हुए उनकी आय में जोड़ दिया. झूठा राम ने इस फैसले को चुनौती दी. अपील के बाद संपत्ति में निवेश से जुड़ी अतिरिक्त रकम तो हटा दी गई, लेकिन बैंक में जमा 13.04 लाख रुपए पर विभाग की कार्रवाई बरकरार रही. इसके बाद उन्होंने ITAT का दरवाजा खटखटाया.

मां ने 642 ग्राम सोने के गहने बेचकर दिए थे पैसे

झूठा राम ने न्यायाधिकरण को बताया कि उनकी मां ने 2 फरवरी 2012 को उन्हें 16 लाख रुपए नकद उपहार में दिए थे. इसके लिए मां ने अपने 642.300 ग्राम पुराने सोने के गहने बेचे थे. इन गहनों की बिक्री से उन्हें 16,10,567 रुपए मिले थे. इन गहनों का मूल्यांकन 31 मार्च 2011 को एक 18,36,230 रुपए किया गया था.

विभाग ने उठाए थे ये सवाल

अपने दावे को साबित करने के लिए झूठा राम ने नोटरी से प्रमाणित उपहार पत्र , उस पर हस्ताक्षर करने वाले दो गवाहों के समर्थन और सोने के गहनों की मूल्यांकन रिपोर्ट पेश की. हालांकि, आयकर अधिकारी ने इन दस्तावेजों पर कुछ सवाल उठाए. विभाग का कहना था कि गहनों की बिक्री की रसीद में हर गहने का अलगअलग विवरण नहीं था. उसमें केवल कुल वजन दर्ज किया गया था.
विभाग ने यह सवाल भी उठाया कि गहने बेचने से मिली रकम पहले मां के बैंक खाते में जमा क्यों नहीं की गई. इसके अलावा, बेचे गए गहनों का वजन मूल्यांकन रिपोर्ट में दर्ज कुल वजन से कम था.

झूठा राम के वकील ने बताया कि पुराने सोने के गहनों की खरीदबिक्री में कई बार रसीद पर हर गहने का अलग विवरण देने के बजाय कुल वजन दर्ज किया जाता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मां ने अपने सभी गहने नहीं बेचे थे, बल्कि उनका केवल एक हिस्सा बेचा था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसी वजह से दोनों दस्तावेजों में वजन का अंतर था.

ITAT ने क्यों दी राहत?

जयपुर पीठ ने सभी दस्तावेजों की जांच के बाद झूठा राम की दलीलों को सही माना. न्यायाधिकरण ने पाया कि उपहार पत्र में 2 फरवरी 2012 को मां की ओर से बेटे को 16 लाख रुपए देने की बात स्पष्ट रूप से दर्ज थी. साथ ही, 4 फरवरी से 31 मार्च 2012 के बीच झूठा राम के बैंक खाते में 16,05,000 रुपए जमा हुए थे. पीठ ने मांबेटे के रिश्ते, नोटरी से प्रमाणित उपहार पत्र, दो गवाहों और पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता की रिपोर्ट को भी ध्यान में रखा.

न्यायाधिकरण के अनुसार, मां ने अपने सोने के गहने बेचकर मिली रकम का एक हिस्सा बेटे को उपहार में दिया था और इस लेनदेन के समर्थन में दस्तावेज मौजूद थे. इसलिए बैंक में जमा 13,04,900 रुपए को अस्पष्ट आय मानकर टैक्स योग्य इनकम में जोड़ना उचित नहीं था. लेखाकार सदस्य अन्नपूर्णा गुप्ता और न्यायिक सदस्य टी.आर. सेंथिल कुमार की पीठ ने झूठा राम की अपील स्वीकार कर ली और 13.04 लाख रुपए की अतिरिक्त आय को हटाने का आदेश दिया.

क्या मातापिता से मिले नकद उपहार पर टैक्स लगता है?

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 56 के तहत मातापिता जैसे निर्धारित रिश्तेदारों से मिले नकद उपहार पर आयकर नहीं लगता. यह छूट रकम की सीमा पर निर्भर नहीं करती. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बड़ी रकम जमा करने पर आयकर विभाग सवाल नहीं पूछ सकता. विभाग यह जांच कर सकता है कि पैसा देने वाला व्यक्ति कौन है, उसके पास रकम कहां से आई और लेनदेन के समर्थन में पर्याप्त सबूत हैं या नहीं.

इसलिए सोने के गहने बेचकर मिली रकम किसी रिश्तेदार को उपहार में देने या लेने पर बिक्री की रसीद, गहनों की मूल्यांकन रिपोर्ट, उपहार पत्र और रकम के स्रोत से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी है. यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बेटे को मिले उपहार पर टैक्स छूट मिलने और मां की ओर से सोने के गहने बेचने से होने वाले कैपिटल गेन टैक्स का मामला अलगअलग है.