इस साल बड़े निजी बैंकों में HDFC Bank का शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहा है. साल 2026 में अब तक शेयर करीब 20% गिर चुका है, जिससे निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या यह खरीदारी का अच्छा मौका है या फिर बैंक के सामने अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं.

बैंक पिछले कुछ समय से लीडरशिप में बदलाव और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों का सामना कर रहा है. इनका असर बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन जैसे अहम वित्तीय आंकड़ों पर भी पड़ा है. हालांकि अब इनमें से कुछ चिंताएं कम होती दिख रही हैं, लेकिन निवेशक अभी भी यह जानना चाहते हैं कि आगे बैंक की ग्रोथ को क्या रफ्तार देगा.
इसी को लेकर Financialexpress.com ने बाजार के विशेषज्ञों से बात की कि क्या अब गवर्नेंस से जुड़ी परेशानियां खत्म हो गई हैं, आगे शेयर के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर क्या होगा और मौजूदा वैल्यूएशन पर निवेश करना सही रहेगा या नहीं.
निवेशकों की नजर इस बड़े फैसले पर
पिछले कुछ महीनों में HDFC Bank को लेकर सबसे बड़ा सवाल उसकी लीडरशिप और गवर्नेंस को लेकर रहा है. Geojit Investments के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर का कहना है कि अब इस मामले में काफी हद तक अनिश्चितता खत्म हो चुकी है. उनके मुताबिक, स्वतंत्र कानूनी जांच में बैंक के पूर्व चेयरमैन द्वारा लगाए गए आरोप सही नहीं पाए गए. वहीं राजीव कुमार की नियुक्ति से बैंक के बोर्ड की विश्वसनीयता भी मजबूत हुई है. हालांकि एक और अहम मुद्दे पर निवेशकों की नजर बनी हुई है.
Axis Direct की BFSI रिसर्च एनालिस्ट ज्ञानदा वैद्य का कहना है कि बैंक के मौजूदा एमडी और सीईओ की दोबारा नियुक्ति बेहद अहम रहेगी. इससे बैंक की लंबी अवधि की रणनीति बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सकेगी और शेयर के प्रदर्शन पर भी इसका असर पड़ेगा. उन्होंने यह भी कहा कि राजीव कुमार को पार्टटाइम चेयरमैन और पुनीत शर्मा को सीएफओ डिजाइनेट बनाए जाने से बैंक की वरिष्ठ नेतृत्व टीम और मजबूत हुई है.
अब गवर्नेंस नहीं, NIM बनेगा सबसे बड़ा ट्रिगर
विशेषज्ञों का मानना है कि अब HDFC Bank के शेयर की दिशा तय करने में गवर्नेंस से ज्यादा मुनाफे की भूमिका होगी. विनोद नायर के मुताबिक, आगे सबसे बड़ा ट्रिगर नेट इंटरेस्ट मार्जिन में सुधार रहेगा. उन्होंने कहा कि बैंक की एसेट क्वालिटी अभी भी इंडस्ट्री में सबसे मजबूत है, लेकिन NIM फिलहाल करीब 3.4% पर है, जबकि मर्जर से पहले यह 4% से ज्यादा हुआ करता था. इसके पीछे ज्यादा क्रेडिटडिपॉजिट रेशियो, फंड जुटाने की बढ़ी लागत और लोन पर मिलने वाली कम यील्ड जैसी वजहें हैं. उनका मानना है कि अगर FY27 तक मार्जिन में सुधार होता है तो शेयर की रीरेटिंग देखने को मिल सकती है. ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा वैल्यूएशन आकर्षक लग रही है.
बैलेंस शीट मजबूत करने पर फोकस
ज्ञानदा वैद्य के अनुसार, HDFC Bank अपने लोनटूडिपॉजिट रेशियो को कम करने के लिए डिपॉजिट बढ़ाने पर खास जोर दे रहा है. उन्होंने कहा कि बैंक आक्रामक तरीके से लोन बांटने के बजाय रिस्क के हिसाब से बेहतर रिटर्न देने वाली रणनीति पर काम कर रहा है. उनके मुताबिक, HDFC Bank और दूसरे बड़े निजी बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ के बीच अभी करीब 150200 बेसिस पॉइंट का अंतर है. अगर यह अंतर कम होता है तो शेयर के लिए सकारात्मक रहेगा.
एसेट क्वालिटी बनी हुई है मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद HDFC Bank की एसेट क्वालिटी में किसी बड़े नुकसान की आशंका नहीं है. ज्ञानदा वैद्य का कहना है कि फिलहाल NIM बढ़ाने की गुंजाइश सीमित है. इसलिए बैंक ऑपरेशनल एफिशिएंसी, टेक्नोलॉजी में निवेश और क्रेडिट कॉस्ट पर नियंत्रण के जरिए रिटर्न ऑन एसेट्स बेहतर बनाने पर ध्यान दे रहा है. उनके अनुमान के मुताबिक, बैंक का RoA मध्यम अवधि में FY26 के 1.8% से बढ़कर 1.9% तक पहुंच सकता है.
क्या अभी HDFC Bank खरीदना चाहिए?
दोनों विशेषज्ञ मानते हैं कि HDFC Bank की लंबी अवधि की बुनियाद मजबूत बनी हुई है. विनोद नायर का कहना है कि अगर अगले दो वर्षों में NIM सामान्य स्तर पर लौटता है तो मौजूदा कीमतें लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा मौका हो सकती हैं.
वहीं ज्ञानदा वैद्य का मानना है कि मौजूदा स्तर पर रिस्करिवॉर्ड अच्छा है और गिरावट की संभावना सीमित दिखती है. लेकिन नए निवेश के लिए वह फिलहाल ICICI Bank और Kotak Mahindra Bank को HDFC Bank से बेहतर विकल्प मानती हैं, क्योंकि इन बैंकों की ग्रोथ और रिटर्न प्रोफाइल ज्यादा मजबूत है. उनकी सलाह है कि जिन निवेशकों के पास पहले से HDFC Bank के शेयर हैं, वे फिलहाल होल्ड बनाए रखें. हालांकि इस समय नए निवेश की सिफारिश नहीं की जा रही है.
शेयर का हाल
HDFC Bank का शेयर पिछले एक साल में करीब 20% गिरा है. हालांकि पिछले एक महीने में इसमें करीब 6% की रिकवरी देखने को मिली है. पिछले छह महीनों में भी शेयर दबाव में ही रहा है. बैंक का 52 हफ्तों का उच्च स्तर 1,020.50 रुपये और 52 हफ्तों का निचला स्तर 726.65 रुपये है.
निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
विश्लेषकों के मुताबिक, अब HDFC Bank को लेकर गवर्नेंस से जुड़ी बड़ी चिंताएं काफी हद तक कम हो चुकी हैं. अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक NIM में सुधार, डिपॉजिट ग्रोथ, दूसरे निजी बैंकों के मुकाबले क्रेडिट ग्रोथ बढ़ाने और मजबूत एसेट क्वालिटी बनाए रखने में कितना सफल रहता है. यही बातें आने वाले समय में शेयर की दिशा तय कर सकती हैं.
Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.



