अयोध्या के राममंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले के केंद्र में रामशंकर यादव उर्फ ‘टिन्नू’ हैं. उन्हें मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बेहद करीबी माना जाता था, जिसके कारण मंदिर के कर्मचारी और सेवादार उन्हें एक ‘अघोषित सरवराकार’ के रूप में मानते थे. टिन्नू यादव के भाई बलराम यादव के पास भी काउंटिंग रूम और बक्से की चाभियां होती थी.

बतौर मंदिर कर्मी टिन्नू यादव मंदिर के सरवराकार थे, सभी कर्मियों में उनकी ही चलती थी. बता दें कि टिन्नू यादव के सबसे ज्यादा पांच रिश्तेदार मंदिर परिसर में काम करते हैं. जिसमें टिन्नू का सगा भाई, भतीजा, बहन और एक अन्य रिश्तेदार शामिल हैं.

ऑपरेशनल लेवल पर टिन्नू को फ्री हैंड

दरअसल चंपत राय ने टॉप लेवल पर अनिल मिश्रा तो ऑपरेशनल लेवल पर टिन्नू को फ्री हैंड दिया था. पूरा पुलिस महकमा टिन्नू के रसूख से वाकिफ था, जिनके वॉकी टॉकी पर एक आदेश से गाड़ियां और आदमी सब पास हो जाते थे.

ट्रस्ट के सामने प्रशासन भी नतमस्तक

ट्रस्ट केवल मंदिर में नहीं बल्कि राम नगरी में एक पैरेलल सिस्टम चलाता है, जिनके सामने यहां का प्रशासन भी नतमस्तक रहता है. यही कारण है कि ट्रस्ट का आदेश हुआ और पुलिस रेड पर निकल पड़ी और रिकवरी का माल ट्रस्ट के पदाधिकारियों के सामने लाकर रख दिया. SBI में अधिकारी भी अनिल मिश्रा के आदेश का पालन करते थे, कुछ अधिकारी तो उनके मकान में किरायेदार भी हैं.

चढ़ावे से दानराशि गायब होने का आरोप

अयोध्या में प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर बनने के बाद से ही देशविदेश से करोड़ों श्रद्धालु लगातार रामलला के दर्शन करने पहुंच रहे हैं. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर में दिल खोलकर दान भी करते हैं. बता दें कि हाल ही में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे से दानराशि गायब होने का आरोप लगाया, जिसके बाद राजनीति गरमा गई.