जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव बहाली को लेकर विवाद जारी है. इस बीच आज सुबह 4:30 बजे जामिया एडमिनिस्ट्रेशन ने छात्र संघ चुनाव को लेकर आदेश जारी किया. छात्रों की प्रमुख मांग छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषणा थी, लेकिन आदेश में कहा गया कि यूनियन के संविधान बनने के 15 दिनों के भीतर छात्रसंघ चुनाव कराया जाएगा. इसमें चुनाव की कोई निश्चित तारीख अभी घोषित नहीं की गई है.

आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रदर्शनकारी छात्रों को एडमिनिस्ट्रेशन के खिलाफ दिए गए आपत्तिजनक बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को तुरंत हटाना होगा. साथ ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी. इसके साथ ही विरोध प्रदर्शन को तुरंत समाप्त करने का निर्देश दिया गया है.
एडमिनिस्ट्रेशन की शर्तों को छात्रों ने किया खारिज
इधर भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेताओं और प्रदर्शनकारी छात्रों ने एडमिनिस्ट्रेशन की इन शर्तों को खारिज कर दिया है.छात्रों का कहना है कि वो कोई माफी नहीं मांगेंगे और जब तक चुनाव की पक्की तारीख का ऐलान नहीं होता, तब तक उनकी भूख हड़ताल और प्रदर्शन जारी रहेगा. छात्रों ने इसे कन्फ्यूजिंग बताया है और कहा है कि जब तक उनकी मांगों को साफ और लिखकर पूरा नहीं किया जाता, तब तक वो अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे.
छात्रों ने बताया कि ऑर्गेनाइजेशन की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, जामिया रजिस्ट्रार प्रोफ़ेसर मोहम्मद महताब आलम रिज़वी सोमवार सुबह करीब 4:30 बजे प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स से बातचीत करने के लिए कैंपस पहुंचे.उन्होंने यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन का जारी किया गया एक ऑफिशियल ऑर्डर शेयर किया और छात्रों से अपना आंदोलन खत्म करने की अपील की, और दावा किया कि उनकी मांगें मान ली गई हैं.
‘कई ज़रूरी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया’
जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन संगठन ने अपने बयान में कहा ‘आदेश में स्टूडेंट्स यूनियन की बहाली के बारे में कोई साफ और साफ घोषणा नहीं की गई, जिससे कई ज़रूरी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया’. यूनिवर्सिटी के 26 अक्टूबर के ऑर्डर में कहा गया है कि जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन के चुनाव, स्टूडेंट्स यूनियन के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद होंगे.
छात्रों के सस्पेंशन ऑर्डर और शोकॉज नोटिस रद्द
यूनिवर्सिटी के आदेश की कॉपी स्टूडेंट ग्रुप ने शेयर की है. इस आदेश में प्रदर्शन के दौरान छात्रों को दिए गए सस्पेंशन ऑर्डर और शोकॉज नोटिस भी रद्द कर दिए गए हैं और आंदोलन के दौरान सिक्योरिटी स्टाफ के कामों की जांच के लिए एक कमेटी बनाने की घोषणा की गई है.
लेकिन, स्टूडेंट्स ने संविधान को मंजूरी देने और चुनाव कराने के लिए कोई तय टाइमलाइन न होने पर सवाल उठाया है. उन्होंने यह भी बताया है कि आदेश में प्रॉक्टर के इस्तीफे की उनकी मांग पर कोई बात नहीं की गई है.
आंदोलन जारी रखेंगे छात्र
छात्रों ने कहा कि ठोस फ़ैसलों और साफ रोडमैप के बिना आश्वासन को हमारी मांगें पूरी करना नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि कहा कि जब तक एडमिनिस्ट्रेशन उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए साफ, लिखित वादा नहीं करता, तब तक छात्र अपना आंदोलन जारी रखेंगे.
छात्रों ने कहा कि विरोध का मकसद लोकतांत्रिक अधिकारों को सुरक्षित करना और कैंपस में सही स्टूडेंट रिप्रेजेंटेशन हासिल करना था, न कि स्टूडेंट्स के गोलमोल भरोसे को मानना.
यूनिवर्सिटी के आदेश में क्या कहा गया
यूनिवर्सिटी के आदेश में यह भी है कि छात्र प्रदर्शन के दौरान एडमिनिस्ट्रेशन के खिलाफ कहे गए बदनाम करने वाले बयानों, कामों या सोशल मीडिया पोस्ट के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पब्लिक में माफी मांगेंगे. इसमें निर्देश दिया गया है कि इन पोस्ट को तुरंत सोशल मीडिया चैनलों से हटा दिया जाए और कहा गया है कि नियमों का पालन किया जाएगा.यूनिवर्सिटी के आदेश में कहा गया है ‘यह आदेश जारी होते ही विरोध प्रदर्शन तुरंत खत्म कर दिया जाएगा’
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के आदेश में छात्रों की कुछ चिंताओं को दूर करने के लिए सस्पेंशन और शोकॉज नोटिस रद्द किए गए हैं और सिक्योरिटी स्टाफ के कामों की जांच का वादा किया गया है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। हालांकि, यूनियन के संविधान और उसके बाद के चुनावों को मंजूरी देने के लिए कोई खास टाइमलाइन न होना विवाद का एक मुख्य मुद्दा बन गया है.



