भारत के गांवों में ही नहीं शहरों में भी बच्चे की सेहत को जानेअनजाने में नुकसान पहुंचाया जाता है. इसमें अधिकतर मातापिता भी शामिल होते हैं. गलतियों की बात करें तो इसमें बच्चों को बड़ों की आधी या एक चौथाई गोली/दवा देना भी शामिल है. छोटे डॉक्टर्स या मेडिकल एक्सपीरियंस रखने वालों की सलाह पर बच्चों को सर्दीबुखार में बड़े लोगों की आधी गोली दे दी जाती है. केमिस्ट से ली गई दवा तक बच्चों को आधी खिला दी जाती है.

क्या आप जानते हैं कि इसका उनके शरीर पर कितना ज्यादा बुरा असर पड़ सकता है. ये एक लापरवाही है और इसे सेफ तरीका मानकर सालों से फॉलो किया जा रहा है. वैसे लोगों के मन में ऐसा सवाल जरूर आता है कि क्या ऐसा करना सेफ है.

ऐसा भी देखा गया है कि डॉक्टर कम डोज लिखते हैं लेकिन पेरेंट्स घर पर रखी डबल डोज की दवा को आधा करके बच्चे को दे देते हैं. चलिए आपको एक्सपर्ट के जरिए बताते हैं ऐसा करना बच्चे की सेहत के लिए कितना खतरनाक हो सकता है?

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

डॉ. सन्नी लोहिया कहते हैं कि अक्सर मातापिता यह सोचकर बच्चों को बड़ों की आधी गोली दे देते हैं कि इससे सही मात्रा मिल जाएगी, लेकिन यह तरीका हमेशा सुरक्षित नहीं होता. किसी भी दवा की सही खुराक सिर्फ उम्र नहीं, बल्कि बच्चे के वजन, बीमारी की गंभीरता, दवा के प्रकार और उसकी शरीर में काम करने की क्षमता पर डिपेंड करती है. कई गोलियां ऐसी होती हैं जिन्हें बीच से तोड़ने पर दवा की मात्रा बराबर नहीं बंटती, जबकि कुछ दवाओं पर विशेष कोटिंग होती है, जिसे तोड़ने से उनका असर बदल सकता है. इससे दवा या तो कम प्रभावी हो सकती है या फिर जरूरत से ज्यादा असर दिखाकर नुकसान पहुंचा सकती है.

खतरे का बढ़ना

एंटीबायोटिक, हार्मोन, हृदय रोग और कई अन्य दवाओं में यह जोखिम और भी बढ़ जाता है. इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को बड़ों की आधी या चौथाई गोली देना उचित नहीं है. आज अधिकांश दवाएं बच्चों के लिए सिरप, ड्रॉप्स, डिस्पर्सिबल टैबलेट या उनकी उम्र और वजन के अनुसार निर्धारित डोज में उपलब्ध हैं. मातापिता को हमेशा डॉक्टर द्वारा बताई गई सही दवा और सही मात्रा का ही पालन करना चाहिए। छोटीसी लापरवाही भी बच्चे के इलाज को प्रभावित कर सकती है और गंभीर दुष्प्रभाव का कारण बन सकती है.

दवा का फंक्शन बदल जाना

कुछ टैबलेट्स ऐसी होती हैं जिनमें सॉल्ट पूरा फैला होता है और इन्हें एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह पर ही देना चाहिए. पर कुछ दवाओं को खास तकनीक से तैयार किया जाता है और ये शरीर में धीरेधीरे रिलीज होती हैं. इसमें Controlled Release Tablets, Modified Release Tablets, Sustained Release Tablets और अलग तरह की कोटिंग वाली गोलियां शामिल होती हैं. अगर इन्हें आधा या एक चौथाई तोड़कर देने से फंक्शन बदल सकता है. ऐसे में दवा अपने तरीके से बॉडी में असर नहीं कर पाती.

साइड इफेक्ट्स भी हैं शामिल

अगर बच्चे को बड़ों की आधी गोली दी जाए तो इसके साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं. दरअसल, बच्चे के वजन को ध्यान में रखकर उसकी दवा तय की जाती है. इसलिए बच्चे को बड़ों की दवा देना गलत साबित हो सकता है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इससे बॉडी में टॉक्सिसिटी का डर भी बढ़ जाता है. या फिर दवा की डोज कम हो जाए तो भी प्रॉब्लम ठीक नहीं हो पाती.

हमेशा डॉक्टर की सलाह लेकर ही दवा की डोज तय करें. अगर शिशु है तो उसे सिरप या ड्रॉप्स के फॉर्म में मेडिसिन दें. बच्चों के मामले में खुद डॉक्टर बन जाना या डॉक्टरी इलाज करना कभीकभी बहुत भारी पड़ जाता है.