Chhattisgarh Chitrakote Waterfall: छत्तीसगढ़ की पहचान और भारत के सबसे खूबसूरत जलप्रपातों में शामिल चित्रकोट वाटर फॉल हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। बारिश के मौसम में जब यह वाटरफॉल अपने पूरे शबाब पर है। यहां आने टूरिस्ट की संख्या कई गुना बढ़ गई है। इसे मिनी मियाग्रा के नाम से भी जाना जाता है। इंद्रावती नदी पर बना यह झरना जब 90 फीट की ऊंचाई से गिरता है तो हर किसी का मन मोह लेता है।

घोड़े की नाल के आकार का होने के कारण इसे भारत का नियाग्रा भी कहा जाता है। हर साल जुलाई से अक्टूबर तक यह अपने पूरे शबाब हर रहता है। यह भारत का सबसे चौड़ा वाटरफॉल है।
इंद्रावती नदी और 90 फीट से गिरता वाटरफॉल: दूरदूर से आने वाले पर्यटक जब चित्रकोट पहुंचते हैं तो इंद्रावती नदी का विराट स्वरूप और करीब 90 फीट की ऊंचाई से गिरता जलप्रपात उन्हें मंत्रमुग्ध कर देता है।
बारिश के मौसम में बढ़ जाती है वाटर फॉल की भव्यता: बारिश के मौसम में वाटर फॉल की भव्यता कई गुना बढ़ जाती है, हालांकि कुछ अव्यवस्थाएं खूबसूरत नजारे के इंजॉय को फीका कर देतीं हैं।
चित्रकोट वाटरफॉल तक पहुंचने के लिए यदि आप वाई प्लेन आ रहे हैं तो सीधे जगदलपुर या रायपुर एयर पोर्ट पर पहुंचकर, वहां से सड़क रूट से चित्रकोट वाटरफॉल पहुंच सकते हैं।
इसके अलावा यदि ट्रेन से सफर कर पहुंचना चाहते हो तो यहां सबसे पास जगदलपुर रेलवे स्टेशन है। यहां पहुंचने के बाद वाई रोड चित्रकोट वाटरफॉल आ सकते हैं।
कुछ समय पहले तक चित्रकोट की व्यवस्थाएं स्थानीय पंचायत के माध्यम से संचालित होती थीं। सफाई, पार्किंग, पर्यटकों का मार्गदर्शन, छोटीमोटी मरम्मत और निगरानी जैसे कामों में पंचायत के 45 से अधिक लोग लगे रहते थे।
प्रशासन ने पंचाय की भूमिका पर लगाई रोक: अब प्रशासन की ओर से पंचायत की भूमिका पर रोक लगने के बाद यह पूरा सिस्टम लगभग ठप हो गया। पंचायत की जिम्मेदारियां तो खत्म हो गईं, लेकिन उनका कोई प्रभावी विकल्प अब तक खड़ा नहीं हो पाया।
सफाई व्यवस्था प्रभावित, गाइड भी गायब: आज हालात यह हैं कि कई जगह सफाई व्यवस्था प्रभावित है। कूड़ेदान होने के बावजूद नियमित सफाई नहीं होने से परिसर की स्वच्छता प्रभावित होती दिखाई देती है। पर्यटकों को दिशा बताने वाले कर्मचारी कम नजर आते हैं। कई स्थानों पर रखरखाव की कमी भी साफ दिखाई देती है। विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल होने के बावजूद व्यवस्थाओं का यह स्तर कई सवाल खड़े करता है।
लापरवाही बन सकती है हादसे का कारण: सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। बारिश के मौसम में जलप्रपात का जलस्तर और बहाव दोनों तेजी से बढ़ते हैं। ऐसे समय में संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और लगातार निगरानी बेहद जरूरी होती है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था पर्यटकों को पूरी तरह आश्वस्त करती नजर नहीं आती। थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
यह जरूरी: चित्रकोट जैसे अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले पर्यटन स्थल को केवल प्राकृतिक सौंदर्य के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। यहां एक स्थायी और पेशेवर प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।
जिम्मेदारियां तय हों: स्पॉट पर पंचायत, पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन के बीच स्पष्ट जिम्मेदारियां तय हों। सफाई और सुरक्षा के लिए समर्पित टीम बनाई जाए। पर्याप्त संख्या में लाइफ गार्ड, सुरक्षा गार्ड और प्रशिक्षित गाइड तैनात किए जाएं।
व्यवस्थाओं को सुधारा जाए: डिजिटल सूचना बोर्ड, सीसीटीवी निगरानी, बेहतर पार्किंग, स्वच्छ शौचालय और नियमित रखरखाव जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ते हुए उन्हें पर्यटन प्रबंधन में शामिल किया जाए ताकि व्यवस्था भी बेहतर हो और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले।
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