Crude Oil Price: अमेरिका की राजनीति में जब भी कोई बड़ा उलटफेर होता है, तो उसका असर पूरी दुनिया की जेब पर पड़ता है. हाल ही में आए अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने ग्लोबल मार्केट की तस्वीर बदल कर रख दी है. इन चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा सियासी नुकसान उठाना पड़ा है. दूसरी तरफ डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में अपनी बढ़त मजबूत कर ली है. वाशिंगटन के इस सत्ता समीकरण के बदलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ताश के पत्तों की तरह बिखर गईं. दुनियाभर के वित्तीय बाजारों में इस राजनीतिक बदलाव का असर साफ तौर पर देखा जा रहा है.

कच्चे तेल के दाम में आई गिरावट
चुनावी नतीजों के सामने आने के बाद कच्चे तेल के बाजार में बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला. बाजार के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो तेल की कीमतों में लगभग 10 फीसदी की सीधी गिरावट दर्ज की गई है. अमेरिकी क्रूड ऑयल यानी डब्ल्यूटीआई का भाव करीब 10 फीसदी टूटकर 87.68 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी भारी कमी आई है. बाजार के उतारचढ़ाव के बीच ब्रेंट क्रूड 9.20 फीसदी टूटकर 94.08 डॉलर प्रति बैरल से होते हुए 93.40 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया.
ईरान से बातचीत की उम्मीद से बदला बाजार का मूड
तेल की कीमतों में अचानक आई इस गिरावट के पीछे सिर्फ अमेरिका की घरेलू राजनीति ही नहीं, बल्कि विदेश नीति से जुड़ी उम्मीदें भी काम कर रही हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी के मजबूत होने से अमेरिका की विदेश नीति में बदलाव आ सकता है. निवेशकों को ये उम्मीद बंधी है कि नई राजनीतिक परिस्थितियों में अमेरिका अब ईरान के साथ बातचीत का रास्ता खोल सकता है. अगर ऐसा होता है तो पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर जो डर बना हुआ था, वो काफी हद तक कम हो जाएगा. तेल की सप्लाई बढ़ने की इसी उम्मीद ने कीमतों को नीचे लाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है.
दुनियाभर के शेयर बाजारों को मिली संजीवनी
कच्चे तेल की कीमतों में आई ये बड़ी गिरावट दुनियाभर के शेयर बाजारों के लिए एक बेहद अच्छी खबर बनकर आई है. महंगे तेल की वजह से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर महंगाई का भारी बोझ पड़ रहा था. अब दाम घटने से ग्लोबल मार्केट के निवेशकों ने राहत की सांस ली है. हालांकि, बाजार के लिए अभी सारी चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं. पश्चिम एशिया के देशों में चल रहा भूराजनीतिक तनाव अभी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है. आने वाले दिनों में अमेरिकी सरकार के अगले कदम तय करेंगे कि कच्चे तेल में आई ये गिरावट आगे भी जारी रहेगी या नहीं.



