टैनिंग की दिक्कत स्किन पर टैनिंग का होना आम बात है लेकिन इसे टाइम से रिमूव न किया जाए तो डार्कनेस परमानेंट टिक जाती है. गर्मी, तेज धूप और यूवी किरणों की वजह से स्किन पर टैनिंग होने लगती है. सनस्क्रीन के जरिए इससे बचा जा सकता है.

टैनिंग क्यों होती है एक्सपर्ट बताते हैं कि हमारी स्किन में मौजूद मेलेनिन की मात्रा के बढ़ने में यूवी किरणों का भी रोल रहता है. धूप या तेज गर्मी की वजह से सन टैन होता है. सनसक्रीन के जरिए यूवी किरणों से स्किन को बचाने में हेल्प मिलती है. वैसे रोज सनस्क्रीन लगाने के बाद भी कुछ लोगों को टैनिंग परेशान करती है. एक्सपर्ट से जानें ऐसा क्यों होता है?
सनस्क्रीन लगाने के बाद भी टैनिंग डॉ. विजय सिंघल कहते हैं कि कई लोग नियमित रूप से सनस्क्रीन लगाने के बावजूद टैनिंग की शिकायत करते हैं. इसका बड़ा कारण है अक्सर सनस्क्रीन पर्याप्त मात्रा में नहीं लगाए जाना है.
सही टाइम पर न लगाना एक्सपर्ट कहते हैं कि अधिकतर लोग सनस्क्रीन को लगाने में एक और गलती करते हैं. वो समयसमय पर इसे दोबारा नहीं लगाते हैं. देखा जाए तो दिन में कम से कम दो बार सनस्क्रीन जरूर लगानी चाहिए. कई मानते हैं कि दिन में एक बार लगाने के बाद इसकी दोबारा जरूरत नहीं पड़ती.
एसपीएफ और पीए पर फोकस न करना डॉक्टर विजय ने बताया एसपीएफ और पीए रेटिंग त्वचा की जरूरत के अनुसार नहीं होती. सनस्क्रीन को लगाने से पहले एसपीएफ और पीए का ध्यान रखना जरूरी है. ये दोनों फॉर्मूला टैनिंग से बचाने में अहम रोल निभाते हैं. उन्होंने बताया कि लंबे समय तक धूप में रहना, पसीना और UV एक्सपोजर भी टैनिंग का कारण बन सकते हैं.



