मुम्बई, दिल्ली समेत देश के कई शहरों में हाल के दिनों में CNG की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है. इससे वाहन मालिकों का बजट कुछ हद तक प्रभावित हुआ है. इसके बावजूद CNG पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ती है. यही कारण है कि लोग CNG कार को पसंद कर रहे हैं. यह सिलसिला बीते कई सालों से चला आ रहा है. CNG की कीमत बीते पांचछह सालों में लगभग दो गुनी हो चुकी है. आइए, इसी बहाने समझते हैं कि पेट्रोल और डीजल के मुकाबले CNG सस्ती क्यों पड़ती है?

CNG का पूरा नाम कंप्रेस्ड नेचुरल गैस है. यह गैस मुख्य रूप से मीथेन से बनती है. CNG को पेट्रोल और डीजल के मुकाबले अधिक साफ ईंधन माना जाता है. दिल्ली में CNG की ताजी कीमत 87 रुपए और नोएडा व गाजियाबाद में यही दरें लगभग 96 रुपये प्रति किलोग्राम है. मुम्बई में यही कीमत 88 रुपये प्रति किलोग्राम है. मुम्बई में पेट्रोल की कीमत 111 रुपये, दिल्ली में 102 रुपये तथा नोएडा में भी 102 रुपये है.

CNG की कीमतों में बढ़ोतरी क्यों हुई?

CNG की कीमत कई कारकों पर निर्भर करती है. इसमें प्राकृतिक गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमत सबसे महत्वपूर्ण है. जब वैश्विक बाजार में गैस महंगी होती है, तो इसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है. गैस की खरीद, आयात, परिवहन और वितरण की लागत भी कीमत को प्रभावित करती है. शहरों तक गैस पहुंचाने के लिए पाइपलाइन और अन्य सुविधाओं की जरूरत होती है. इनके रखरखाव पर भी खर्च होता है.

सरकार की नीतियां भी CNG की कीमत तय करने में भूमिका निभाती हैं. गैस की कीमत, टैक्स, वितरण शुल्क और स्थानीय शुल्क मिलकर अंतिम कीमत बनाते हैं. इसीलिए देश के अलगअलग शहर में CNG की कीमत अलगअलग हो सकती है. नोएडा और दिल्ली के CNG रेट्स भी अलगअलग हैं. दिल्ली में यह सस्ती और नोएडा में महंगी है.

पेट्रोल और डीजल की कीमत अधिक क्यों होती है?

पेट्रोल और डीजल कच्चे तेल से बनाए जाते हैं. कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बदलती रहती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है. कच्चे तेल को रिफाइनरी तक पहुंचाया जाता है. वहां इसे अलगअलग प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है. इसके बाद पेट्रोल और डीजल तैयार होते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में काफी खर्च आता है. पेट्रोल और डीजल की कीमत में कई तरह के टैक्स शामिल होते हैं.

केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अलगअलग कर लगाती हैं. इसके अलावा डीलर कमीशन और परिवहन लागत भी जुड़ती है. डीजल की कीमत कुछ जगहों पर पेट्रोल से कम हो सकती है. फिर भी यह CNG से अधिक महंगा पड़ सकता है. खासकर तब, जब वाहन रोजाना अधिक दूरी तय करता हो.

CNG का पूरा नाम कंप्रेस्ड नेचुरल गैस है. फोटो: PTI

क्या CNG का माइलेज बेहतर होता है?

CNG सस्ती पड़ने का एक बड़ा कारण इसका माइलेज है. उदाहरण के लिए हुंडई की औरा कार CNG से लगभग 25 किलोमीटर प्रति किलोग्राम चलती है और यही कार जब पेट्रोल से चलती है तो उसका एवरेज आमतौर पर 15 किलोमीटर प्रति लीटर आता है. इसे कीमत के हिसाब से देखें तो अभी भी CNG से चलने वाली औरा कार की संचालन कीमत 4 रुपये प्रति किलोमीटर नहीं है. जबकि पेट्रोल से चलने पर यही कीमत 7 रुपये प्रति किलोमीटर आ रही है. यहां हुंडई औरा का उदाहरण दिया गया है. किसी भी वाहन का वास्तविक माइलेज वाहन के मॉडल, इंजन, सड़क और ड्राइविंग तरीके पर भी निर्भर करता है. इसीलिए CNG की कीमत बढ़ने के बाद भी कुल मासिक खर्च नियंत्रित रह सकता है.

CNG और पेट्रोल से चलने वाली कार की तुलना देखें

मान लीजिए कोई व्यक्ति शहर में रोज लगभग सौ किलोमीटर चलता है और उसके पास हुंडई की औरा कार है. तो यह कार महीने का औसत तीन हजार किलोमीटर चली. अगर यही कार CNG से चलती है तो महीने भर में सीएनजी की खपत 120 किलोग्राम होगी. अगर औसत कीमत सौ रुपये प्रति किलोग्राम मान लें तो एक महीने का सीएनजी का खर्च 12 हजार हुआ. लेकिन यही औरा पूरे महीने पेट्रोल से चलेगी तो पेट्रोल लगेगा लगभग 200 लीटर. पेट्रोल की दर भी सौ रुपये मान लें तो महीने भी में खर्च होगा 20 हजार. मतलब आठ हजार रुपये ज्यादा खर्च होगा. और यही आठ हजार रुपया महीने की बचत सामान्य आदमी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

CNG को पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत बेहतर ईंधन माना जाता है. फोटो: Getty Images

CNG पर टैक्स का कितना प्रभाव?

ईंधन की कीमत में टैक्स का बड़ा हिस्सा होता है. पेट्रोल और डीजल पर कई राज्यों में कर की दर अधिक होती है. CNG पर कर का बोझ कई बार तुलनात्मक रूप से कम रहता है. टैक्स व्यवस्था राज्य के अनुसार बदल सकती है. इसलिए हर राज्य और शहर में CNG और पेट्रोल की कीमत का अंतर समान नहीं होता. कुछ स्थानों पर अंतर कम हो सकता है. कुछ जगहों पर यह अंतर काफी अधिक हो सकता है. अगर सरकार किसी ईंधन पर कर कम रखती है, तो उपभोक्ताओं को उसका सीधा लाभ मिल सकता है. CNG को स्वच्छ ईंधन के रूप में बढ़ावा देने के लिए कई बार इसे कर संबंधी राहत दी जाती है.

क्या CNG से प्रदूषण कम होता है?

CNG को पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत बेहतर ईंधन माना जाता है. इसके जलने पर पेट्रोल और डीजल की तुलना में प्रदूषण कम फैलता है. इससे हवा की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. डीजल वाहनों से धुआं और सूक्ष्म कण अधिक निकल सकते हैं. पेट्रोल वाहन भी कार्बन उत्सर्जन करते हैं. CNG वाहन सामान्य स्थिति में कम धुआं छोड़ते हैं.

प्रदूषण कम होने से शहरों में CNG को बढ़ावा मिलता है. कई सार्वजनिक परिवहन वाहन CNG पर चलाए जा रहे हैं. इससे ईंधन बचत के साथ पर्यावरण को भी लाभ मिल सकता है. हालांकि, CNG पूरी तरह प्रदूषण मुक्त ईंधन नहीं है. इसके उपयोग से भी कार्बन उत्सर्जन होता है लेकिन पेट्रोल और डीजल की तुलना में बहुत कम.

CNG इंजन की क्या हैं विशेषताएं?

CNG का ऑक्टेन स्तर पेट्रोल से अधिक होता है. इससे इंजन में ईंधन के जलने की प्रक्रिया अलग तरह से होती है. सही तकनीक और नियमित रखरखाव के साथ CNG इंजन अच्छा प्रदर्शन कर सकता है. CNG से इंजन में कार्बन जमाव कम होता है. इससे कुछ मामलों में इंजन का तेल अधिक समय तक साफ रह सकता है. इंजन के कुछ हिस्सों पर घिसाव भी कम हो सकता है. फिर भी CNG वाहन के रखरखाव की अनदेखी वाहन मालिक पर भारी पड़ सकती है. गैस पाइप, सिलेंडर, वाल्व और किट की समयसमय पर जांच जरूरी है. अधिकृत सर्विस सेंटर से ही मरम्मत करानी चाहिए.

CNG वाहनों के फायदे हैं लेकिन सीमाएं भी

CNG वाहन के कई फायदे हैं. लेकिन इसकी कुछ सीमाएं भी हैं. देश के सभी शहरों में CNG स्टेशन आसानी से उपलब्ध नहीं होते. छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्टेशन की संख्या कम हो सकती है. CNG भरवाने के लिए कई बार लंबी कतार लगानी पड़ती है. व्यस्त समय में यह समस्या अधिक गंभीर हो सकती है. पेट्रोल और डीजल पंप आमतौर पर अधिक संख्या में उपलब्ध होते हैं. CNG वाहन की शुरुआती कीमत पेट्रोल मॉडल से अधिक हो सकती है. इसलिए खरीदते समय शुरुआती खर्च और भविष्य की बचत दोनों पर विचार करना चाहिए.

किसके लिए है CNG वाहन बेहतर?

CNG वाहन उन लोगों के लिए अधिक उपयोगी हो सकता है, जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं. शहर में नियमित आनेजाने वाले लोग इसका लाभ उठा सकते हैं. ऑटो चालक, टैक्सी चालक और डिलीवरी वाहन संचालक भी CNG से बचत कर सकते हैं. इनके वाहन लंबे समय तक सड़क पर रहते हैं. इसलिए प्रति किलोमीटर कम लागत इनके लिए महत्वपूर्ण होती है. जो लोग कम दूरी तय करते हैं, उनके लिए बचत का लाभ धीरेधीरे मिल सकता है. ऐसे लोगों को वाहन की कीमत, सर्विस और CNG स्टेशन की उपलब्धता भी देखनी चाहिए.