नई दिल्ली: हमारा सौर मंडल ग्रहों और उपग्रहों का एक समूह है. ब्रह्मांड में कई ऐसे सिस्टम हैं जो हमारी समझ से परे हैं. रिसर्चर्स को धरती से 72 प्रकाश वर्ष दूर एक ऐसा ही सिस्टम मिला है. इसे सीडी35 2722 कहा जा रहा है. यह सिस्टम इतना अजीब है कि एस्ट्रोनॉमर केविन हॉय ने इसे ‘सुपर वियर्ड’ कहा है. यह खोज स्पेस साइंस में बड़ा धमाका कर सकती है. वैज्ञानिकों को यहां एक ऐसा ऑब्जेक्ट मिला है जो किसी तारे का नहीं बल्कि ब्राउन ड्वार्फ का चक्कर लगा रहा है. यह ब्राउन ड्वार्फ खुद एक तारे की परिक्रमा करता है. इस रहस्यमय ऑब्जेक्ट का आकार जूपिटर के बराबर है. वैज्ञानिक इसे ब्रह्मांड का पहला कन्फर्म एक्सोमून मान रहे हैं. यह रिसर्च नेचर जर्नल में पब्लिश हुई है.

आखिर क्या है इस रहस्यमय स्पेस सिस्टम का सच?
इस स्टडी के कोऑथर केविन हॉय और उनकी टीम ने वीएलटी टेलिस्कोप से इस सिस्टम को देखा. यह सिस्टम ऐसे तारे के इर्दगिर्द घूमता है जिसका वजन सूरज से आधा है. इस तारे का चक्कर एक ब्राउन ड्वार्फ लगा रहा है. ब्राउन ड्वार्फ एक तरह का गैस जायंट होता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यह ग्रह से बड़ा और तारे से छोटा होता है. इस सिस्टम में मौजूद ब्राउन ड्वार्फ जूपिटर से 30 गुना ज्यादा भारी है. असली कहानी इसके बाद शुरू होती है. इस भारी भरकम ब्राउन ड्वार्फ का चक्कर जूपिटर के बराबर वजन वाला एक और ऑब्जेक्ट लगा रहा है.
क्या जूपिटर जैसा विशाल ऑब्जेक्ट वाकई एक एक्सोमून हो सकता है?
यही सवाल वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा हैरान कर रहा है. केविन हॉय का कहना है कि यह एक्सोसेटेलाइट ग्रह होने जितना भारी जरूर है. लेकिन यह किसी तारे का चक्कर नहीं लगाता. उन्होंने कहा, ‘यह एक ऐसे ऑब्जेक्ट की परिक्रमा करता है जो खुद एक तारे का चक्कर लगाता है’. ऐसे में इसे चांद कहना भी मुश्किल हो रहा है. वाईईएमएस की डायरेक्टर एलिस जुर्लो का कहना है कि सौर मंडल में ग्रह और सूरज के बीच साफ फर्क है. इसलिए यहां चांद को डिफाइन करना आसान है. जुर्लो ने बताया, ‘सीडी35 2722 सिस्टम में तारे और ग्रह के बीच की लाइन धुंधली हो जाती है’.
विज्ञान की दुनिया के लिए इस अनोखी खोज का क्या मतलब है?
रिसर्च टीम मानती है कि यह मिस्ट्री ऑब्जेक्ट एक एक्सोमून हो सकता है. एक्सोमून प्राकृतिक रूप से बनने वाले सैटेलाइट हैं जो सौर मंडल के बाहर पाए जाते हैं. अब तक ब्रह्मांड में 6000 से ज्यादा एक्सोप्लेनेट खोजे जा चुके हैं. लेकिन एक्सोमून के पक्के सबूत कभी नहीं मिले. अगर इसकी पुष्टि होती है तो यह अपनी तरह का पहला एक्सोमून होगा. अभी इसके क्लासिफिकेशन के लिए और ऑब्जर्वेशन चाहिए. हॉय ने कहा, ‘इस सिस्टम में तीसरा पहिया होने के कारण हम इसे मून कहना चाहते हैं’. जुर्लो के मुताबिक यह खोज अंतरिक्ष विज्ञान में एक बड़ी कामयाबी है.



