Firozabad News: फिरोजाबाद जिले के चर्चित डेढ़ वर्षीय मासूम आरव हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है. शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में 30 मई को हुई इस दिल दहला देने वाली घटना के महज 40 दिनों के भीतर अदालत ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुना दिया. गुरुवार को जितेंद्र पाठक को दोषी ठहराए जाने के बाद शुक्रवार को सजा पर सुनवाई हुई, जिसके बाद जिला जज ने उसे फांसी की सजा सुनाई.

6 दिन में दाखिल हुई चार्जशीट
इस जघन्य हत्याकांड की जांच पुलिस ने तेजी से पूरी की. घटना के केवल छह दिन के भीतर विवेचना पूरी कर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी गई. इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई को प्राथमिकता देते हुए तेजी से कार्यवाही की. इस दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 13 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह पेश कराया गया.
सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और परिस्थितिजन्य तथ्यों का गहन परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने जितेंद्र पाठक को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई. इस फैसले को जिले के सबसे तेज गति से निस्तारित हुए चर्चित मामलों में शामिल माना जा रहा है.
कोर्ट परिसर में रही कड़ी सुरक्षा
फैसले के मद्देनजर शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे. दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे. फैसला सुनाए जाने के बाद दोषी जितेंद्र भावुक हो गया और अदालत कक्ष में ही खुद को थप्पड़ मारने लगा. हालांकि पुलिसकर्मियों ने स्थिति को तुरंत नियंत्रित कर लिया.
अभियोजन पक्ष ने मजबूत साक्ष्य किए पेश
शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि यह मामला अत्यंत जघन्य प्रकृति का था, जिसमें डेढ़ वर्षीय मासूम की बेरहमी से हत्या की गई थी. पुलिस ने समयबद्ध तरीके से जांच पूरी करते हुए मजबूत साक्ष्य जुटाए और अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा. अभियोजन द्वारा पेश किए गए गवाहों और साक्ष्यों को न्यायालय ने विश्वसनीय माना, जिसके आधार पर जितेंद्र पाठक को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई गई.
30 मई को हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात
गौरतलब है कि 30 मई को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने डेढ़ वर्षीय मासूम आरव को सड़क पर कई बार पटककर उसकी हत्या कर दी थी. इस घटना ने पूरे फिरोजाबाद जिले को झकझोर कर रख दिया था और लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला था. पुलिस की त्वरित कार्रवाई, समयबद्ध विवेचना और अदालत में तेज सुनवाई के चलते महज 40 दिनों के भीतर इस मामले में फैसला आ गया. इसे त्वरित न्याय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है.
जितेंद्र पाठक ने बच्चे की हत्या क्यों की?
बता दें कि अरांव क्षेत्र की रहने वाली रति देवी की शादी वर्ष 2024 में बदायूं निवासी सुमित कुमार के साथ हुई थी. वैवाहिक जीवन में विवाद बढ़ने के कारण रति देवी पिछले करीब पांच महीनों से अपने मायके में रह रही थी. दोनों का डेढ़ साल का बेटा आरव था. आरव भी मां रति के साथ रहता था. इसी दौरान सुमित का रिश्तेदार विराज उर्फ जितेंद्र पाठक, जो बदायूं के शेखूपुर का रहने वाला है, रति के संपर्क में आया. जितेंद्र ने पहले रति को मदद और सहयोग का भरोसा दिलाया, फिर शादी का प्रस्ताव रखा.
आरव की मां रति ने शादी इस प्रस्ताव को इनकार कर दिया. 30 मई को रति अपनी मां के साथ एक कानूनी मामले में सलाह लेने शिकोहाबाद पहुंची थी. उसी दौरान जितेंद्र भी वहां पहुंच गया. आरोप है कि उसने डेढ़ वर्षीय आरव को टॉफी दिलाने का बहाना बनाकर अपने साथ ले लिया. कुछ ही दूरी पर सुनसान स्थान पर उसने मासूम के साथ बेहद क्रूरता की. आरोप है कि उसने बच्चे को 27 सेकंड में आठ बार सड़क पर पटका, जिससे उसकी मौत हो गई. घटना के बाद जितेंद्र बच्चे के शव को घर के बाहर छोड़कर वहां से फरार हो गया.



