OM Prakash Rajbhar Political ideology: उत्तर प्रदेश की सियासत में हमेशा ही अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले ओम प्रकाश राजभर एक बार सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने बड़ा बयान देते हुए अखिलेश यादव की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी में फूट का दावा कर दिया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के इस दावे के बाद से सपा भी उनपर हमलावर हो गई है। इस मामले को लेकर यूपी में राजभर बनाम अखिलेश हो गया है। यहां तक की सपा प्रमुख ने राजभर को ‘अफवाह मंत्री’ तक बता दिया है।

मायावती के साथ राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले राजभर, कभी बीजेपी…तो कभी अखिलेश यादव और फिर बीजेपी के साथ सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि ओम प्रकाश राजभर किस विचारधारा की राजनीतिक करते हैं। यह सवाल इस समय इसलिए उठ रहा है कि कभी बीजेपी को दलित और पिछड़ों का दुश्मन बताने वाले राजभर आज भाजपा सरकार में मंत्री हैं।
खुद को हिंदू मानने से किया था इनकार
साल 2022 में ‘द वॉयर’ को दिए एक इंटरव्यू में ओम प्रकाश राजभर ने कहा था कि वह हिंदू नहीं हैं और एनडीए में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर को लेकर भी सवाल किया कि क्या राम मंदिर बनने से गरीब और पिछड़े बच्चों को शिक्षा मिलेगी। राजभर ने बीजेपी से मंदिरों के बजाय स्कूलों और शिक्षा पर ज्यादा ध्यान देने को कहा था। ओम प्रकाश राजभर का यह कोई पहला बयान नहीं था, जब उन्होंने भाजपा और हिंदू धर्म के खिलाफ खुलकर बोले थे। दिसंबर 2024 में बलिया और अन्य मौकों पर उन्होंने भगवान हनुमान को ‘राजभर जाति’ का बताया था। इसके अलावा महाभारत और रामायण के अन्य पात्रों को भी अपनी जाति से जोड़कर वे बयान दे चुके हैं, जिस पर काफी विवाद हुआ।
ओपी राजभर की सियासी विचारधारा
ओम प्रकाश राजभर सामाजिक न्याय और पिछड़ा वर्ग की राजनीति करते हैं। वे उत्तर प्रदेश में के अध्यक्ष हैं और मुख्य रूप से राजभर सहित अति पिछड़ी, अति दलित और वंचित जातियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व व अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं। उनकी राजनीति का केंद्र बिंदु हाशिए पर मौजूद जातियों को सत्ता में उचित भागीदारी, आरक्षण और सरकारी नौकरियों में उनका हिस्सा दिलाना है। वह राजा सुहेलदेव को अपना आदर्श मानते हैं और अपनी विचारधारा में ऐतिहासिक, गैरयादव पिछड़ी जातियों को एकजुट करने पर जोर देते हैं।
ओम प्रकाश राजभर की सियासी विचारधार अवसरवादी या व्यावहारिक मानी जाती है। अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उन्होंने पहले बहुजन समाज पार्टी , फिर भारतीय जनता पार्टी और उसके बाद समाजवादी पार्टी और ऑल इंडिया मजलिसएइत्तेहादुल मुस्लिमीन के साथ अलगअलग समय पर गठबंधन किए हैं।
सपा को लेकर ओपी राजभर का दावा
17 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने में बड़ी टूट का दावा किया है। अपने एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा कि समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होगी। राम गोपाल यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी को चिट्ठी सौंपी है। खनन घोटाला और गोमती रिवर फ्रंट घोटाला का मास्टरमाइंड कौन है, पूरा उत्तर प्रदेश जानता है। शिकंजा कस रहा है तो सपा परेशान है। महाराष्ट्र बंगाल छोड़िए, समूची सपा, भाजपा में शामिल होने को तैयार बैठी है।
समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होगी। राम गोपाल यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी को चिट्ठी सौंपी है।
खनन घोटाला और गोमती रिवर फ्रंट घोटाला का मास्टरमाइंड कौन है, पूरा उत्तर प्रदेश जानता है। शिकंजा कस रहा है तो सपा परेशान है।
महाराष्ट्र बंगाल छोड़िए, समूची सपा, भाजपा में…
— Om Prakash Rajbhar June 17, 2026
ओपी राजभर पर अखिलेश का पलटवार
राजभर के इस दावे पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने करारा जवाब दिया है। ओपी राजभर के दावे को खारिज करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी पूरी मजबूती के साथ एकजुट है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि दूसरी पार्टियों में सेंध लगाना और नेताओं को तोड़ना बीजेपी की पुरानी आदत है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को लखनऊ में एक प्रेस वार्ता के दौरान जब अखिलेश यादव से सपा में नाराजगी को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने पुरानी बातें याद दिलाईं।
अखिलेश यादव ने कहा कि इससे पहली भी कई विधायक, एमएलसी और राज्यसभा सांसद पार्टी बदलकर भाजपा में गए थे। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ कि किसी को लालच, स्वार्थ या फिर किसी पर जबरदस्ती दबाव बनाया गया। अखिलेश ने यह भी कहा कि जो लगो डर जाते हैं, वह अपनी पार्टी छोड़ देते हैं



