Makkah Mosque Controversy: सऊदी अरब के मक्का क्षेत्र में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मौत की सजा दिए जाने का मामला चर्चा में है।

बांग्लादेश सरकार ने मामले में आधिकारिक जानकारी नहीं मिलने पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेद्दा स्थित बांग्लादेशी वाणिज्य दूतावास को फांसी की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।

बांग्लादेश ने राजनयिक माध्यम से सऊदी सरकार से अपराध, मुकदमे और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि दोनों नागरिकों को वकील की सहायता या फैसले के खिलाफ अपील करने का अवसर मिला था या नहीं।

सऊदी अरब में 30 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी

बीबीसी के मुताबिक, सऊदी अरब में 30 लाख से अधिक बांग्लादेशी नागरिक रहते और काम करते हैं। इस घटना के बाद प्रवासी श्रमिकों की कानूनी सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

मानवाधिकार संगठनों ने पहले भी सऊदी अरब में मौत की सजा और ताज़ीर कानून के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अब बांग्लादेश सरकार मामले से जुड़ी आधिकारिक जानकारी मिलने का इंतजार कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 14 अक्टूबर को एक पुरुष और महिला को फांसी दी गई। सऊदी गृह मंत्रालय का कहना है कि दोनों को मस्जिद की पवित्रता का उल्लंघन करने से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया था।

मस्जिद से जुड़े मामले में सुनाई मौत की सजा

सऊदी अधिकारियों के अनुसार, दोषियों की पहचान नूरुल इस्लाम अब्दुल बशीर और रिती अख्तर के रूप में हुई है। अदालत ने दोनों को इस्लामी कानून के तहत ताज़ीर श्रेणी में मौत की सजा सुनाई थी।

ताज़ीर ऐसी न्यायिक व्यवस्था है, जिसमें निर्धारित दंड वाले अपराधों से अलग मामलों में न्यायाधीश परिस्थितियों और आरोपों के आधार पर सजा तय करते हैं।

हालांकि, सऊदी मंत्रालय ने घटना की विस्तृत जानकारी, मस्जिद का नाम और गिरफ्तारी की तारीख सार्वजनिक नहीं की है।

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