
Consumer Rights: महंगे और ब्रांडेड जूते (Branded Shoes) खरीदना अक्सर स्टेटस और क्वालिटी की गारंटी माना जाता है। लेकिन क्या हो जब 13 हजार रुपये के जूते सिर्फ दो महीने में ही फटने लगें और कंपनी वारंटी देने से साफ मुकर जाए? तेलंगाना के एक ग्राहक के साथ ऐसा ही हुआ लेकिन उसने हार मानने के बजाय कानूनी रास्ता चुना। रंगारेड्डी जिला उपभोक्ता आयोग (Consumer Commission) ने इस मामले में एक नजीर पेश करते हुए जूता कंपनी को कड़ी फटकार लगाई है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। आयोग ने वारंटी क्लेम ठुकराने को ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ मानते हुए कंपनी को ग्राहक को पूरे 21,000 रुपये चुकाने का आदेश दिया है। अगर आप भी कभी ऐसी ठगी का शिकार हुए हैं तो यह खबर आपकी आंखें खोलने वाली है।
2 महीने में उधड़ने लगे 13 हजार के जूते
मामला अक्टूबर 2025 का है जब 45 वर्षीय एक व्यक्ति ने एक नामी कंपनी से 12,999 रुपये के जूते खरीदे थे। कंपनी की पॉलिसी के मुताबिक 14 दिन से लेकर 3 महीने के भीतर मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट पर वारंटी क्लेम की जा सकती थी। ग्राहक ने जूतों का इस्तेमाल बेहद सावधानी से किया, इसके बावजूद महज दो महीने में जूतों की परतें उखड़ने लगीं। ग्राहक ने जब कंपनी से संपर्क कर जूते बदलने या रिपेयर करने की मांग की तो कंपनी ने एक रटा-रटाया जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया।
‘सामान्य टूट-फूट’ की दलील कंपनी को पड़ी भारी
कंपनी ने ग्राहक की शिकायत यह कहकर खारिज कर दी कि जूतों में आई खराबी ‘सामान्य टूट-फूट’ (Normal Wear and Tear) का हिस्सा है। कई बार गुहार लगाने के बाद भी जब कंपनी ने नहीं सुनी तो ग्राहक ने सीधे उपभोक्ता आयोग का रुख किया। रंगारेड्डी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष चिटनेनी लता कुमार ने सुनवाई के दौरान पाया कि कंपनी ने अपनी ‘टूट-फूट’ वाली दलील साबित करने के लिए कोई तकनीकी जांच रिपोर्ट या ठोस सबूत पेश नहीं किया।
कोर्ट का फैसला-13 हजार के जूतों पर 21 हजार का हर्जाना
नोटिस भेजने के बावजूद कंपनी की तरफ से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। इसके बाद आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए इसे सेवा में बड़ी कोताही (Deficiency in Service) और ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practice) करार दिया। कोर्ट ने अपने 20 अगस्त के आदेश में कंपनी को 45 दिनों के भीतर ग्राहक को 20,999 रुपये (कुल लगभग 21 हजार) चुकाने का फरमान सुनाया।
हर्जाने का पूरा हिसाब
जूतों की कीमत (रिफंड): ₹12,999
मानसिक परेशानी का मुआवजा: ₹5,000
मुकदमे का खर्च: ₹3,000
(रकम मिलने के बाद ग्राहक को खराब जूते कंपनी को वापस लौटाने होंगे)
कंज्यूमर राइट्स- आप भी नहीं खाएंगे धोखा!
इस फैसले ने साफ कर दिया है कि कोई भी कंपनी सिर्फ ‘Normal Wear and Tear’ का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती। अगर खरीदारी के कुछ ही समय बाद उत्पाद में खराबी आती है तो साबित करने का जिम्मा (Burden of Proof) कंपनी पर होता है कि यह खराबी ग्राहक की गलती से हुई है।
वारंटी क्लेम ठुकराने पर ग्राहक क्या करें?
अगर कोई कंपनी वाजिब वारंटी देने से मुकर रही है, तो आप इन हेल्पलाइन नंबर्स पर फौरन शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
National Consumer Helpline: 1915 (टोल फ्री)
तेलंगाना राज्य हेल्पलाइन: 0771-2582902
इसके अलावा आप ‘उमंग’ (UMANG) ऐप या कंज्यूमर फोरम के ऑनलाइन पोर्टल (edaakhil.nic.in) के जरिए भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
FAQ
सवाल: रंगारेड्डी उपभोक्ता आयोग ने जूता कंपनी पर कितना जुर्माना लगाया?
जवाब: आयोग ने कंपनी को रिफंड, मुआवजे और कानूनी खर्च के तौर पर कुल 20,999 रुपये (लगभग 21 हजार) चुकाने का आदेश दिया।
सवाल: कंपनी ने वारंटी क्लेम क्यों खारिज किया था?
जवाब: कंपनी ने जूतों की खराबी को ‘सामान्य टूट-फूट’ (Normal wear and tear) बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया था।
सवाल: अगर कोई कंपनी वारंटी देने से मना करे तो ग्राहक कहां शिकायत करे?
जवाब: ग्राहक नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1915 पर कॉल कर सकते हैं या ऑनलाइन उपभोक्ता फोरम में मामला दर्ज करा सकते हैं।



