: राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि IDBI बैंक की शुरुआत देश के औद्योगिक विकास को मजबूत करने के उद्देश्य से हुई थी। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम के पास बैंक की करीब 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है, लेकिन प्रस्तावित बिक्री के बाद यह हिस्सेदारी घटकर 34 प्रतिशत रह जाएगी।

राहुल गांधी ने 2003 में संसद में सरकार की ओर से किए गए उस वादे का भी जिक्र किया, जिसमें IDBI में कम से कम 51 प्रतिशत सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि संसद में किया गया वादा देश की जनता के प्रति जवाबदेही से जुड़ा है।
निजीकरण से आरक्षण और नौकरी की सुरक्षा पर चिंता
राहुल गांधी ने बैंक के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों के भविष्य पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि IDBI बैंक के निजी हाथों में जाने से SC, ST और OBC वर्ग के उम्मीदवारों को मिलने वाले आरक्षण पर असर पड़ सकता है।
इसके साथ ही कर्मचारियों की सेवा शर्तों और नौकरी की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक केवल संपत्ति नहीं हैं, बल्कि देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संस्थान हैं। उन्होंने कर्मचारियों से एकजुट रहने और अपनी मांगों के लिए संघर्ष जारी रखने की अपील की।
निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर लगाए आरोप
इधर, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में बैंकों और वित्तीय संस्थानों का इस्तेमाल निजी हितों के लिए किया और बैंक कर्मचारियों पर मनमाने तरीके से कर्ज देने का दबाव बनाया।
उन्होंने अपने पोस्ट में 1957 के हरिदास मूंद्रा मामले का भी उल्लेख किया और कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में बैंकिंग संस्थानों पर राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। इस तरह IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
कांग्रेस के समय में IDBI बना देश का उद्योग खड़ा करने के लिए।
मोदी के समय में पहले बोली देखी गई, फिर दाम तय हुआ।
कांग्रेस के time पे बैंक बनते थे। मोदी के time में बिकते हैं।
मैं IDBI बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूँ। https://t.co/6dIok1fxV1 pic.twitter.com/uLT7mWTYyr
— Rahul Gandhi October 30, 2026
क्या है पूरा मामला?
IDBI बैंक में सरकार और LIC की कुल हिस्सेदारी करीब 95 प्रतिशत है। केंद्र सरकार बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। राहुल गांधी के पत्र के मुताबिक, प्रस्तावित बिक्री के बाद सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी घटकर 34 प्रतिशत रह जाएगी।
उन्होंने बैंक कर्मचारियों को भरोसा दिलाया है कि उनकी मांगों और अधिकारों की लड़ाई में कांग्रेस उनके साथ खड़ी रहेगी। हालांकि, निजीकरण की प्रक्रिया, कर्मचारियों के अधिकारों और आरक्षण को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित सरकारी फैसलों और आधिकारिक शर्तों से स्पष्ट होगी।
We all know how @INCIndia has used Banks and financial institutions as personal entities and pressured bank employees to extend loans at their whim, bypassing prudent lending norms.
Let me list a few instances.
In 1957, Haridas Mundra got money from LIC due to influence by… https://t.co/U3m03zSpMg
— Nirmala Sitharaman October 30, 2026



