झागदार पेशाब आना किडनी की बीमारी का संकेत? पेशाब में प्रोटीन क्यों आता है? नेफ्रोलोजिस्ट से जानिए कारण,लक्षण और बचाव

पेशाब करते समय झाग (Foamy Urine) बनना एक आम समस्या लग सकती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है? अक्सर पेशाब में प्रोटीन की मात्रा बढ़ने के कारण पेशाब में झाग आता है। अब सवाल ये उठता है कि आखिर पेशाब में झाग या प्रोटीन क्यों आता है? यह कब चिंता का विषय बनता है और इससे बचने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए? इन सभी महत्वपूर्ण सवालों का जवाबजनसत्ता ने सर गंगा राम अस्पताल दिल्ली में वरिष्ठ सलाहकार नेफ्रोलॉजी में डॉ.मनीष मलिक से जाना। डॉक्टर मलिक ने बताया  पेशाब में प्रोटीन आना कई बार किडनी के फिल्टर में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। हेल्दी किडनी आमतौर पर खून में मौजूद प्रोटीन को पेशाब में जाने से रोकती है। अगर किडनी के फिल्टर यानी ग्लोमेरुली को नुकसान पहुंचता है, तो प्रोटीन पेशाब के रास्ते बाहर निकल सकता है। इसे प्रोटीन्यूरिया (Proteinuria) कहा जाता है। हालांकि, हर बार पेशाब में प्रोटीन आना किडनी की स्थायी बीमारी का मतलब नहीं होता।

पेशाब में झाग के लिए जिम्मेदार कारक

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर हो सकते हैं पेशाब में प्रोटीन आने का कारण

पेशाब में प्रोटीन आने के कई कारण हो सकते हैं। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर लंबे समय तक कंट्रोल न रहने पर किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं और फिल्टर को नुकसान पहुंच सकता हैं। इसके अलावा किडनी की कुछ दूसरी बीमारियां भी प्रोटीन लीक होने का कारण बन सकती हैं। डॉक्टर मलिक ने बताया नेफ्रोटिक सिंड्रोम में किडनी के फिल्टर को नुकसान पहुंचने के कारण पेशाब में काफी मात्रा में प्रोटीन निकल सकता है। इसका कारण जानने के लिए डॉक्टर अलग-अलग जांच करा सकते हैं और कुछ मामलों में किडनी बायोप्सी की जरूरत भी पड़ सकती है। Also ReadLancet रिसर्च में खुलासा: हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाते हैं ये 9 कारण; जानें एक्सपर्ट से बचाव के तरीके

बुखार, इन्फेक्शन और ज्यादा एक्सरसाइज से भी आ सकता है प्रोटीन

हर बार पेशाब में प्रोटीन आने का मतलब किडनी की स्थायी बीमारी नहीं होता। बुखार, संक्रमण, बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत या एक्सरसाइज और कुछ दूसरी अस्थायी स्थितियों में भी थोड़े समय के लिए पेशाब में प्रोटीन बढ़ सकता है। इसे ट्रांजियंट प्रोटीन्यूरिया कहा जाता है। ऐसी स्थिति में जब संबंधित कारण ठीक हो जाता है, तो प्रोटीन की मात्रा भी सामान्य हो सकती है। इसलिए रिपोर्ट आने पर घबराने के बजाय डॉक्टर से इसकी वजह और दोबारा जांच की जरूरत के बारे में बात करना जरूरी है। Also ReadDairy Whitener: चाय में रोज़ डालते हैं डेयरी व्हाइटनर? जानें किडनी और हार्ट के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता

पेशाब के झाग ही नहीं बल्कि टेस्ट भी है जरूरी

पेशाब में लगातार ज्यादा झाग या फोम बनना प्रोटीन के पेशाब में आने का एक संभावित संकेत हो सकता है। खासकर अगर झाग बार-बार दिखाई दे और आसानी से खत्म न हो, तो इसकी जांच कराना बेहतर है। हालांकि, केवल झाग देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि पेशाब में प्रोटीन ही है। तेज पेशाब की धार, टॉयलेट क्लीनर या अन्य कारणों से भी झाग दिखाई दे सकता है। इसकी पुष्टि यूरिन टेस्ट से ही की जाती है।

आंखों और पैरों के आसपास सूजन को नजरअंदाज न करें

पेशाब के जरिए शरीर से ज्यादा मात्रा में प्रोटीन निकलने पर खून में प्रोटीन का स्तर कम हो सकता है। इसके कारण शरीर के ऊतकों में अतिरिक्त तरल जमा होने लगता है, जिससे पैरों, टखनों और आंखों के आसपास सूजन दिखाई दे सकती है। सुबह उठने पर आंखों या चेहरे के आसपास ज्यादा सूजन नजर आना भी किडनी से जुड़ी समस्या का एक संकेत हो सकता है। हालांकि, सूजन केवल किडनी की बीमारी के कारण नहीं होती। हार्ट, लिवर और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में भी पैरों और चेहरे पर सूजन हो सकती है। इसलिए सूजन के साथ मौजूद दूसरे लक्षणों और जांच रिपोर्ट को देखकर ही इसके सही कारण का पता लगाया जाता है।

यूरिन रूटीन और UACR में क्या अंतर है?

सामान्य यूरिन रूटीन टेस्ट में भी पेशाब में प्रोटीन की मौजूदगी दिखाई दे सकती है। रिपोर्ट में यह 1+, 2+ या 3+ जैसे रूप में दर्ज हो सकता है। वहीं UACR टेस्ट पेशाब में एल्ब्यूमिन की मात्रा को क्रिएटिनिन के अनुपात में मापने में मदद करता है। इसलिए किडनी की शुरुआती स्थिति और एल्ब्यूमिन के रिसाव का आकलन करने में यह एक उपयोगी जांच है।

UACR टेस्ट बताता है कितना एल्ब्यूमिन निकल रहा है

पेशाब में प्रोटीन की जांच के लिए UACR यानी Urine Albumin to Creatinine Ratio एक महत्वपूर्ण टेस्ट है। इसमें पेशाब के एक सैंपल में एल्ब्यूमिन और क्रिएटिनिन का अनुपात देखा जाता है। आमतौर पर 30 mg/g से कम UACR सामान्य 30–300 mg/g को बढ़ा हुआ और 300 mg/g से अधिक को काफी ज्यादा माना जाता है। लगातार बढ़ा हुआ UACR किडनी को नुकसान का संकेत हो सकता है। एक जरूरी बात यह है कि एक बार की रिपोर्ट के आधार पर किडनी की बीमारी तय नहीं की जाती। अगर UACR बढ़ा हुआ आता है, तो डॉक्टर स्थिति के अनुसार दोबारा जांच कराने की सलाह दे सकते हैं ताकि यह पता चल सके कि प्रोटीन का बढ़ना लगातार बना हुआ है या अस्थायी है।

क्या 24 घंटे का यूरिन प्रोटीन टेस्ट जरूरी है?

हर व्यक्ति को 24 घंटे का यूरिन प्रोटीन टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। आजकल कई मामलों में एक बार के पेशाब के सैंपल से UACR जैसी जांच पर्याप्त जानकारी दे सकती है। हालांकि, कुछ खास परिस्थितियों में डॉक्टर 24 घंटे के पेशाब में प्रोटीन की मात्रा मापने की सलाह दे सकते हैं। कौन-सी जांच जरूरी है, यह मरीज की स्थिति और पहले की रिपोर्ट पर निर्भर करता है।

किन लक्षणों में नेफ्रोलॉजिस्ट को दिखाएं?

अगर पेशाब में लगातार झाग दिखाई दे और इसके साथ पैरों या टखनों में सूजन, आंखों के आसपास सूजन या चेहरे पर सूजन जैसी समस्या हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। खासकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या पहले से किडनी से जुड़ी समस्या वाले लोगों को ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शुरुआत में जनरल फिजिशियन से भी सलाह ली जा सकती है। जरूरत पड़ने पर वह मरीज को नेफ्रोलॉजिस्ट के पास भेज सकते हैं।

पेशाब में प्रोटीन आने का इलाज कैसे करें?

पेशाब में प्रोटीन आने का इलाज प्रोटीन आने के कारण पर निर्भर करता है। पेशाब में प्रोटीन का कोई एक इलाज नहीं है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि प्रोटीन पेशाब में क्यों आ रहा है। अगर इसका संबंध डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर से है, तो इन बीमारियों को नियंत्रित करना जरूरी होता है। अगर शरीर में पानी जमा होने से सूजन है, तो डॉक्टर कुछ मामलों में नमक कम करने, पैरों को ऊंचा रखने और जरूरत के अनुसार डाइयूरेटिक्स जैसी दवाएं दे सकते हैं। लेकिन पानी की मात्रा खुद से कम करना सही नहीं है; यह मरीज की किडनी, हार्ट और दूसरी स्थितियों के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं। अगर किसी को किडनी की बीमारी, जैसे नेफ्रोटिक सिंड्रोम, का पता चलता है तो उसका इलाज किया जाता है। कुछ मामलों में बीमारी की वजह जानने के लिए किडनी बायोप्सी की जरूरत पड़ सकती है।