
Indus River Water Treaty: भारत की तरफ से सिंधु जल समझौता रद्द किए जाने के बाद पाकिस्तान बिलबिलाया हुआ है. लिहाजा वह हर जगह यही राग अलाप रहा है. अब पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया है और भारत को गीदड़भभकी दी है. 26 लोगों की जान लेने वाले पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को अप्रैल 2025 में रद्द कर दिया था. भारत ने साफ तौर पर कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को पक्के तौर पर खत्म नहीं कर देता, तब तक कोई बात नहीं होगी.
डार ने भारत को दी गीदड़भभकी
इशाक डार ने सिंधु जल संधि पर भारत के कदम को चुनौती दी और इसे रोकने के भारत के फैसले पर सवाल उठाए. वॉशिंगटन में पाकिस्तान दूतावास द्वारा आयोजित एक वर्चुअल सेमिनार को संबोधित करते हुए डार ने कहा, ‘अप्रैल 2025 में सिंधु जल संधि को रोकने का भारत का एकतरफा फैसला संधि के नियमों के आधार पर नहीं है.’ डार ने कहा कि सिंधु नदी प्रणाली पर पाकिस्तान की निर्भरता के कारण यह विवाद उसकी अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के कई क्षेत्रों के लिए अहम है. उन्होंने कहा, ‘सिंधु बेसिन 25 करोड़ से ज्यादा पाकिस्तानियों की जीवनरेखा है. हमारी खेती, खाद्य सुरक्षा, एनर्जी प्रोडक्शन, आजीविका और आर्थिक विकास सिंधु नदी प्रणाली के पानी पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. इसलिए, पाकिस्तान के लिए जल सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से अलग नहीं की जा सकती.’
डार ने तर्क दिया कि इसके नतीजे सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘इसलिए, जो दांव पर लगा है, वह भारत और पाकिस्तान से कहीं आगे तक जाता है.’ उन्होंने कहा कि संधि को प्रभावित करने वाले कदम ‘दुनिया भर में संधि संबंधों के लिए एक खतरनाक मिसाल’ कायम कर सकते हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समझौते निश्चितता और पूर्वानुमान पर निर्भर करते हैं.
पाकिस्तान ने जलवायु और बढ़ते जल संकट का हवाला दिया.डार ने पाकिस्तान की चिंताओं को जल संसाधनों पर पहले से मौजूद दबाव से भी जोड़ा. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा,’जलवायु परिवर्तन की वास्तविकताओं को देखते हुए यह चुनौती और भी गंभीर हो जाती है. पाकिस्तान पहले से ही दुनिया के सबसे ज्यादा जल संकट वाले देशों में शामिल है.’ उन्होंने प्रति व्यक्ति पानी की घटती उपलब्धता के साथ-साथ बारिश के बदलते पैटर्न, ग्लेशियरों के पीछे हटने, बाढ़, सूखे और पानी के बहाव में बड़े उतार-चढ़ाव का हवाला दिया. डार ने कहा, ‘इन वास्तविकताओं से ज्यादा और मजबूत सहयोग की जरूरत महसूस होनी चाहिए.’
‘…तो भुगतने होंगे गंभीर नतीजे’
इसके बाद पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री ने इस विवाद को लेकर अपनी सबसे कड़ी चेतावनी जारी की. उन्होंने कहा, ‘सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को मिलने वाले उसके हक के पानी से उसे रोकने की किसी भी कोशिश के क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर नतीजे होंगे.’ इसके बावजूद, डार ने कहा कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच टकराव में साझा पानी के मुद्दे को शामिल नहीं किया जाना चाहिए.
डार ने कहा, सिंधु नदी को वैसा ही बनाए रखा चाहिए जैसे वह हमारे क्षेत्र के लोगों के लिए हमेशा से रही है-जीवन, आजीविका और सभ्यता का स्रोत, न कि टकराव की वजह. साझा पानी का इस्तेमाल कभी भी हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए.’
भारत ने सिंधु जल संधि को क्यों रोका?
भारत का यह फैसला 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले के बाद आया, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने आदेश दिया कि सिंधु जल संधि को तुरंत प्रभाव से रोक दिया जाए, जब तक कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को अपना समर्थन भरोसेमंद और पक्के तौर पर छोड़ न दे’.
नतीजतन, संधि का यह विवाद भारत-पाकिस्तान के बीच सुरक्षा से जुड़े टकराव का हिस्सा बन गया है. भारत ने पानी के बंटवारे के ढांचे को फिर से शुरू करने की शर्त पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद पर की जाने वाली कार्रवाई से जोड़ दी है, जबकि इस्लामाबाद इस निलंबन को चुनौती दे रहा है.



