दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. इस दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. इनमें नेताओं के साथ ही कई वकील भी शामलि थे. इस बीच भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और सीनियर वकील के.के. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वेणुगोपाल ने प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए है. उन्होंने रविवार को सुप्रीम कोर्ट में यह मुद्दा उठाया है.

सुप्रीम कोर्ट में हुई एक विशेष सुनवाई के दौरान सीनियर वकील के.के. वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि उनकी एक जूनियर महिला सहयोगी, जो सुप्रीम कोर्ट आ रही थीं, उन्हें दिल्ली पुलिस ने मनमाने ढंग से हिरासत में लिया. पुलिसकर्मियों ने उन्हें एक वैन में बिठाया और बिना कोई कारण बताए वहां से लगभग 11 किलोमीटर दूर ले जाकर छोड़ दिया, जिसकी वजह से वह सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंच सकीं.
‘हिरासत में लेने की वजह नहीं बताई’
वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि इस कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों ने कानून के मुताबिक अनिवार्य नेम बैज नहीं पहना हुआ था और न ही उन्होंने महिला को हिरासत में लेने की कोई वजह बताई गई.
Senior Advocate K.K. Venugopal: A young woman lawyer who was coming to the Supreme Court yesterday was taken 11 km away by an unnamed man and dropped there. She was unable to reach the Court. There are many such instances.
Court, on detentions: We will give time for government response. It should explain the circumstances in which the detentions were made, the manner in which they were carried out, and the justification for such detentions.
— ANI October 11, 2026
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
यह बयान जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने दिया गया, जो दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस बैरिकेडिंग, निवारक हिरासत और मेट्रो सेवाओं में रुकावटों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी.
इस बेंच ने रविवार को एक विशेष सुनवाई की, जिसमें 10 अक्टूबर को राजधानी में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोधप्रदर्शनों के कारण पुलिस की बैरिकेडिंग, बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने और मेट्रो सेवा में रुकावट से जुड़ी जरूरी अवमानना और ‘हेबियस कॉर्पस’ याचिकाओं पर सुनवाई की गई. यह सुनवाई उन आरोपों के बीच हुई जिनमें कहा गया था कि अधिकारियों ने सार्वजनिक प्रदर्शनों को रोकने के लिए दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद करके और आवाजाही पर रोक लगाकर कोर्ट के पहले के आदेशों की अवमानना की है.
आपातकाल से की तुलना
रविवार की सुनवाई के दौरान, वेणुगोपाल ने अपनी जूनियर के साथ किए गए उस मनमाने व्यवहार का ज़िक्र किया, जिसके कारण वो सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंच पाईं. हालांकि, उन्होंने उस जूनियर का नाम नहीं बताया. मामले की सुनवाई के दौरान वकीलों ने दिल्ली में अत्यधिक प्रतिबंधों और वकीलों व पत्रकारों के साथ हुए दुर्व्यवहार की तुलना 50 साल पहले के आपातकाल जैसे हालातों से की.
वकीलों ने जताया विरोध
इधर दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य आज कोर्ट में पेश होते समय काली रिबन पहनेंगे. यह उन वकीलों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए है जिनके साथ 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के दौरान बदसलूकी की गई थी. DHCBA का कहना है कि वो वकीलों के समुदाय के सदस्यों के खिलाफ पुलिस द्वारा ज़रूरत से ज़्यादा और अनुचित बल प्रयोग का कड़ा विरोध कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार को इन हिरासतों के हालात, तरीके और कानूनी आधार को उचित ठहराना होगा. कोर्ट ने यह भी साफ निर्देश दिया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से नहीं रोका जाना चाहिए.



