वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को पॉजिटिव एनर्जी का प्रवेश द्वार माना जाता है। घर के मुख्य द्वार पर साफसफाई का ज्यादा ध्यान देना चाहिए। इससे घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और धनधान्य व सुखसमृद्धि में वृद्धि होती है। हालांकि कई लोग घर के मुख्य द्वार पर देवीदेवताओं की तस्वीर को लगाते हैं। जिससे घर में निगेटिव एनर्जी नहीं आती है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देवीदेवताओं की उग्र स्वरूप वाली तस्वीरों को घर में नहीं लगाना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि घर के मुख्य द्वार पर किन उग्र स्वरूप वाली देवीदेवताओं की तस्वीरों को नहीं लगाना चाहिए।

शनि देव की तस्वीर
ज्योतिष में शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना गया है। शनि देव जातक को उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर के मुख्य द्वार या घर में शनि देव की प्रतिमा को नहीं लगाना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि शनि देव की वक्र दृष्टि जीवन में उथलपुथल मचा सकती है। घर के मुख्य द्वार पर तस्वीर लगाने से उनकी सीधी दृष्टि घर में प्रवेश करने वालों और घर के सदस्यों पर पड़ती है। जिस कारण जीवन में बिना वजह का तनाव और बाधाएं बढ़ सकती है। इस कारण घर के मुख्य द्वार पर शनि देव की मूर्तिको नहीं लगाना चाहिए।
महादेव का रौद्र स्वरूप
वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर के मुख्य द्वार पर महादेव के नटराज या क्रोधित स्वरूप वाली तस्वीर को नहीं लगाना चाहिए। वास्तु के अनुसार, भगवान शिव के इस स्वरूप की तस्वीर लगाने से घरपरिवार के सदस्यों के बीच तनाव और कलह की समस्या बढ़ सकती है और जीवन में समस्याएं आ सकती हैं।
मां काली का उग्र स्वरूप
मां काली शक्ति की देवी हैं और उनका यह स्वरूप भयंकर क्रोध और राक्षसों के संहार से जुड़ा है। मां काली का रूप उग्र और आक्राकम ऊर्जा का प्रतीक है। वास्तु के मुताबिक घर के मुख्य द्वार पर मां काली की उग्र स्वरूप की तस्वीर लगाने से घर में बेवहज का विवाद हो सकता है।



