पीरियड्स का समय हर महिला में थोड़ा अलग हो सकता है. कई बार पीरियड्स समय से पहले या देर से आ सकते हैं. कभीकभी दो पीरियड्स के बीच का गैप भी बदल सकता है या ब्लीडिंग कमज्यादा हो सकती है. पीरियड्स में इस तरह के बदलाव कभीकभार हो सकते हैं, लेकिन बारबार ऐसा होने पर इस पर ध्यान देना जरूरी है. पीरियड्स का पैटर्न शरीर की सेहत के बारे में भी कुछ संकेत दे सकता है. इसलिए अपने पीरियड्स की तारीख और ब्लीडिंग में होने वाले बदलावों पर नजर रखना अच्छा रहता है.

का समय बदलने पर हर बार किसी गंभीर समस्या की आशंका नहीं होती. कई बार शरीर में होने वाले सामान्य बदलावों के कारण भी ऐसा हो सकता है. वहीं लगातार पीरियड्स का समय बदलना या ब्लीडिंग में ज्यादा बदलाव होना जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है. इसलिए अपनी परेशानी को समझना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. आइए जानते हैं पीरियड्स समय पर न आने की क्या वजह हो सकती है, कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और पीरियड्स को रेगुलर रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

पीरियड्स समय पर न आने की क्या वजह हो सकती है?

पीरियड्स समय पर न आने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. तनाव, वजन में तेजी से बदलाव, बहुत ज्यादा एक्सरसाइज और हॉर्मोन में बदलाव इसका कारण बन सकते हैं. टीनेज में पीरियड्स शुरू होने के शुरुआती समय और मेनोपॉज के आसपास भी पीरियड्स का पैटर्न बदल सकता है. प्रेग्नेंसी भी पीरियड्स रुकने की एक आम वजह हो सकती है. इसके अलावा PCOS में हार्मोन का बैलेंस बिगड़ने से पीरियड्स देर से या इर्रेगुलर हो सकते हैं.

थायरॉइड की गड़बड़ी भी हार्मोन पर असर डालकर पीरियड्स के समय और ब्लीडिंग में बदलाव कर सकती है. यूटरस में फाइब्रॉइड यानी गांठ होने पर ज्यादा या लंबे समय तक ब्लीडिंग हो सकती है. तनाव, वजन में बदलाव और कुछ दवाएं भी पीरियड्स को प्रभावित कर सकती हैं. अगर पीरियड्स बारबार समय पर नहीं आ रहे हैं या उनके पैटर्न में लगातार बदलाव हो रहा है, तो इसकी सही वजह जानने के लिए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.

इर्रेगुलर पीरियड्स में कब डॉक्टर से सलाह लें?

अगर पीरियड्स बारबार इर्रेगुलर हो रहे हैं, तो डॉक्टर से बात करना बेहतर है. खासकर अगर पीरियड्स लगातार तीन महीने तक नहीं आए हैं और प्रेग्नेंसी नहीं है, तो जांच जरूरी हो सकती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना, कई दिनों तक ब्लीडिंग जारी रहना या पीरियड्स खत्म होने के बाद और अगली डेट आने से पहले ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होना भी डॉक्टर से सलाह लेने की वजह हो सकती है.

इसके साथ तेज पेट दर्द, चक्कर, बहुत ज्यादा कमजोरी या सांस लेने में परेशानी हो तो इसे नजरअंदाज न करें. अगर पहले पीरियड्स समय पर आते थे और अचानक उनका पैटर्न बदल गया है, तब भी डॉक्टर से सलाह लेना सही रहेगा.

पीरियड्स को रेगुलर रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखें?

पीरियड्स को रेगुलर रखने के लिए संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद और तनाव कम रखना जरूरी है. बहुत तेजी से वजन कम करने या बढ़ने से बचें और अपनी क्षमता के अनुसार एक्सरसाइज करें. रोज पर्याप्त खाना खाएं और लंबे समय तक खाना न छोड़ें. पीरियड्स की तारीख, कितने दिन ब्लीडिंग हुई और ब्लीडिंग कितनी रही, इसका रिकॉर्ड रखें.

इससे अपने पीरियड्स के पैटर्न को समझना आसान होगा. अगर आपको PCOS, थायरॉइड या कोई दूसरी स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार उसका इलाज कराएं. बिना डॉक्टर की सलाह के हार्मोन या पीरियड्स रेगुलर करने वाली दवा न लें.