Eye Twitch Superstition: कई लोग आज भी छोटीछोटी शारीरिक समस्याओं को अंधविश्वास से जोड़कर देखते हैं. आंख फड़कना भी ऐसी ही एक बात है, जिसे अलगअलग देशों में शुभ और अशुभ का संकेत माना जाता है. लेकिन चीन में एक व्यक्ति के साथ जो हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया.

दाहिनी आंख के लगातार फड़कने से परेशान इस व्यक्ति ने डॉक्टर के पास जाने के बजाय इंटरनेट पर इलाज तलाशना शुरू कर दिया. वहां मिली गलत सलाह पर भरोसा करते हुए उसने अपनी आंख पर बारबार थप्पड़ मारना शुरू कर दिया. कुछ ही दिनों में उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. डॉक्टरों ने समय रहते सर्जरी करके उसकी आंख बचा ली, लेकिन इस घटना ने अंधविश्वास और इंटरनेट पर मिलने वाली गलत सलाह के खतरों को फिर सामने ला दिया.
दाहिनी आंख फड़कने से घबरा गया व्यक्ति
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला चीन के हुबेई प्रांत के वुहान शहर का है. यहां रहने वाले ले नाम के व्यक्ति की दाहिनी आंख कई दिनों से लगातार फड़क रही थी. शुरुआत में उसने सोचा कि कुछ देर आराम करने या गर्म सिकाई करने से समस्या ठीक हो जाएगी. लेकिन जब फड़कना बंद नहीं हुआ तो वह परेशान हो गया. चीन में एक पुरानी कहावत काफी मशहूर है कि बाईं आंख फड़के तो धन मिलता है, जबकि दाहिनी आंख फड़के तो कोई मुसीबत आने वाली होती है. इसी अंधविश्वास ने उसकी चिंता और बढ़ा दी.
डॉक्टर के बजाय इंटरनेट पर ढूंढ़ा इलाज
ले ने अस्पताल जाने के बजाय इंटरनेट पर इसका उपाय तलाशना शुरू कर दिया. ऑनलाइन उसे कुछ ऐसे दावे मिले कि आंख के आसपास थपथपाने या हल्का मारने से आंख का फड़कना बंद हो सकता है और बदकिस्मती भी टल जाती है. उसने बिना किसी मेडिकल सलाह के इस तरीके को अपनाने का फैसला कर लिया. बताया गया कि उसने लगातार तीन दिनों तक अपनी दाहिनी आंख के आसपास जोरजोर से थप्पड़ मारे. आखिरकार आंख का फड़कना तो बंद हो गया, लेकिन इसके बाद एक नई और कहीं ज्यादा गंभीर समस्या शुरू हो गई.
धीरेधीरे खत्म होने लगी रोशनी
कुछ समय बाद ले को महसूस हुआ कि उसकी नजर धुंधली होने लगी है. शुरुआत में उसे केवल सामने का हिस्सा दिखाई देता था, जबकि दोनों तरफ का दृश्य लगभग गायब हो गया था. धीरेधीरे उसकी देखने की क्षमता और कम होती गई. आखिरकार जब सामने की चीजें भी साफ दिखाई देना बंद हो गईं तो वह घबराकर अस्पताल पहुंचा. डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उसकी आंख की रेटिना अपनी जगह से अलग हो चुकी है . यह आंखों की बेहद गंभीर स्थिति मानी जाती है और समय पर इलाज न मिले तो स्थायी रूप से रोशनी जा सकती है.
सर्जरी से बची आंख
डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन करने का फैसला लिया. सर्जरी के बाद डॉक्टर उसकी आंख की रोशनी काफी हद तक वापस लाने में सफल रहे. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इलाज में और देरी होती तो उसकी आंख की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती थी.
आखिर क्यों हुआ इतना बड़ा नुकसान?
डॉक्टरों के अनुसार, इंसान की रेटिना बेहद पतली और नाजुक होती है. इसकी मोटाई औसतन 0.3 मिलीमीटर से भी कम होती है. जब कोई व्यक्ति आंख पर जोर से थप्पड़ मारता है तो उसका झटका सीधे आंख के अंदर तक पहुंच सकता है. इससे रेटिना के फटने या अपनी जगह से अलग होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. यही वजह रही कि ले की आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा.
आंख फड़कने की असली वजह क्या होती है?
आंखों के एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अधिकतर मामलों में आंख फड़कना किसी अपशगुन का संकेत नहीं होता. इसके पीछे कई सामान्य कारण हो सकते हैं. जैसे नींद पूरी न होना, ज्यादा तनाव लेना, लगातार मोबाइल या लैपटॉप देखना, आंखों पर ज्यादा दबाव पड़ना, थकान या कैफीन का अधिक सेवन करना. इन कारणों से भी आंख फड़कने का खतरा रहता है. ऐसी स्थिति में पर्याप्त आराम करने, अच्छी नींद लेने और स्क्रीन टाइम कम करने से समस्या अक्सर अपने आप ठीक हो जाती है.
कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?
डॉक्टरों का कहना है कि अगर आंख का फड़कना कुछ घंटों या एकदो दिन में ठीक न हो और लगातार एक सप्ताह या उससे ज्यादा समय तक बना रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. इसके अलावा अगर फड़कने के साथ चेहरे का कोई हिस्सा भी हिलने लगे, मुंह के आसपास ऐंठन होने लगे या नजर धुंधली होने लगे, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहला मौका नहीं है, जब चीन में आंख फड़कने से जुड़े अंधविश्वास चर्चा में आए हों. कुछ समय पहले हुनान प्रांत की एक महिला ने तीन साल तक अपनी बाईं आंख के फड़कने का इलाज नहीं कराया, क्योंकि उसे लगता था कि यह सौभाग्य का संकेत है. बाद में यह समस्या इतनी बढ़ गई कि उसके चेहरे के एक हिस्से में लगातार ऐंठन शुरू हो गई. वहीं पिछले साल ताइवान में एक महिला ने बाईं आंख फड़कने को शुभ मानकर लॉटरी का स्क्रैच कार्ड खरीदा था. संयोग से उसने बड़ी रकम जीत ली. इसके बाद ऐसे अंधविश्वासों को लेकर सोशल मीडिया पर फिर बहस शुरू हो गई.
अंधविश्वास नहीं, सही इलाज है जरूरी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंटरनेट या लोक मान्यताओं के आधार पर इलाज करना कई बार खतरनाक साबित हो सकता है. हर शारीरिक समस्या का कारण अंधविश्वास नहीं होता और न ही हर वायरल घरेलू नुस्खा सही होता है. ले की घटना इस बात का बड़ा उदाहरण है कि समय पर डॉक्टर की सलाह लेने के बजाय गलत जानकारी पर भरोसा करना कितना भारी पड़ सकता है. आंख जैसी संवेदनशील चीज के साथ किसी भी तरह का प्रयोग गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए अगर आंख फड़कने जैसी समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो घबराने या अंधविश्वास पर भरोसा करने के बजाय सीधे डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे सही रास्ता है.



