Himachal Se: Best Direction For Puja Room: पूजा घर भारतीय घरों में सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है। यह वो पवित्र स्थान होता है, जहां पर लोग प्रतिदिन तन और मन से पवित्र होने के बाद अपने आराध्य की साधनाआराधना करते है। लेकिन क्या आपको पता है कि इस मंदिर या फिर कहें पूजा घर के लिए सही दिशा और उसमें रखी जाने वाली मूर्ति के आकार और संख्या आदि को लेकर कुछेक वास्तु नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है।

मंदिर और देवीदेवताओं की मूर्ति से जुड़े जरूरी नियमों
मंदिर की क्या है सही दिशा?
वास्तु शास्त्र की माने तो, घर में मौजूद हर दिशा विशेष प्रकार की ऊर्जा को प्रभावित करती है। पूजा कक्ष घर का वह स्थान माना जाता है, जहां की आध्यात्मिक ऊर्जा पूरे घर में फैलती है। सही दिशा में बना मंदिर सुख, शांति और समृद्धि का कारण बन सकता है, जबकि गलत दिशा में बना पूजा स्थल कई तरह की दिक्कतें बढ़ा सकता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसलिए मंदिर की दिशा का सही चयन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
पूजा घर के लिए सबसे शुभ दिशा
धर्म ग्रथों में पूजा घर के लिए यानी ईशान कोण को सबसे शुभ दिशा बताया गया है। इस दिशा में देवीदेवताओं का वास बताया है। सुबह के समय इस दिशा में सूर्य की किरणों और प्राकृतिक ऊर्जाओं का विशेष प्रभाव पड़ता है, जिससे घर में पॉजिटिविटी आती है। वास्तु विशेषज्ञ भी सबसे पहले इसी दिशा में मंदिर स्थापना करने की सलाह देते हैं।
उत्तरपूर्व दिशा में मंदिर होने से मिलते है ये लाभ
वास्तु विशेषज्ञ बताते है कि, उत्तरपूर्व दिशा में मंदिर होने से परिवार के सदस्यों का मन शांत रहता है। इसके अलावा, सभी का स्वास्थ्य बेहतर रहता है, मानसिक तनाव कम होता है और आपसी प्रेम बना रहता है। वहीं, परिवार के लोगों में आध्यात्मिक रुचि बढ़ती है और निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होती है।
पूजा करते समय किस दिशा में हो मुख?
वास्तु विशेषज्ञ का मानना है कि,पूजा, ध्यान, मंत्र जाप आदि के दौरान व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। इन दिशाओं को सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत कहा जाता है। में देवीदेवताओं की मूर्तियां या तस्वीरें इस प्रकार स्थापित करें, जिससे पूजा करने वाले का चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे। मान्यता है कि इससे मन अधिक एकाग्र होता है और पूजा का प्रभाव बढ़ता है।


