Himachal Se: Premanand Maharaj Appeal: सोशल मीडिया से लेकर अध्यात्म जगत तक संत श्री प्रेमानंद जी महाराज के विचारों से लाखों लोगों का जीवन बदल रहा है। महाराज जी द्वारा दी गई सीख का उनके भक्त अपने जीवन में अनुसरण करते हैं।

Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज की भावुक अपील, नाम जप करते रहें; क्या है मंत्र जप के पीछे का साइंस​
Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज की भावुक अपील, नाम जप करते रहें; क्या है मंत्र जप के पीछे का साइंस​

25 मई को महाराज जी के ऑफिशियल सोशल मीडिया पेज से एक वीडियो साझा की गई, जिसके बाद से उनके करोड़ों भक्त बेहद बावुक हो रहे हैं। वीडियो में महाराज जी भक्तों से कह रहे हैं कि मैं मिलूं या न मिलूं, बोलूं या न बोलूं… मैं आप सबसे बहुत प्यार करता हूं। आपको मेरी चिंता नहीं करनी है कि हमारा उत्थान कैसे होगा। बिना बोले ही मैं तुम्हारे दिमाग में रहूंगा और तुम वही करोगे जो तुम्हारे गुरुदेव कहेंगे।

प्रेमानंद जी महाराज की तीन सीख

  • मातापिता का सम्मान

संत ने अपने भक्तों से अपने घर पर रह रहे जीवित भगवान यानी कि अपने मातापिता की सेवा और सम्मान की अपील की है। प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं, दिखावे की भक्ति का त्याग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संत के चरणों में सिर झुकाने से पहले अपने घर के भगवान, यानी अपने मातापिता की सेवा करो, जो व्यक्ति अपने बूढ़े मांबाप को दुखी रखता है, उसकी भक्ति कभी सफल नहीं हो सकती।

  • नशे से दूर रहें युवा

महाराज जी ने देश के युवाओं से नशे और व्यसनों से मुक्ति की गुहार की। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उन्होंने इमोशनल होते हुए कहा कि जब कोई युवा नशा करता है या गलत रास्ते पर जाता है, तो एक संत का दिल खून के आंसू रोता है। आगे उन्होंने कहा कि अपनी ये बुरी आदतें, मांसमदिरा का सेवन और पराई स्त्री पर बुरी नजर डालने का पाप आज ही मुझे सौंप दो।

  • किसी भी परिस्थिति में नाम जप करते रहें

महाराज जी ने अपनी आखिरी अपील में कहा कि नाम जप कभी नहीं बंद होना चाहिए। महाराज जी का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान का नाम न छोड़ें। इस भावुक संदेश का उद्देश्य यह है कि एक सच्चा संत शारीरिक कष्ट में होने के बावजूद सिर्फ भक्तों का कल्याण चाहता है।

नाम जप

क्यों करना चाहिए नाम जप

दरअसल, मंत्र या नाम जप करने के दौरान हमारे ब्रेन में वाइब्रेशन होता है, जिससे डिप्रेशन, तनाव व चिंता कम होती है। मंत्रों के लगातार बढ़ता है, जिससे किसी काम को करने में ध्यान केंद्रित होता है। अच्छे विचार, मंत्र और भगवान का बारबार जप करने या ध्यान करते रहने से व्यक्ति की मानसिक शक्ति बढ़ती जाती है।

जब व्यक्ति बहुत चिंता में होता है, तो नकारात्मक विचार उस पर हावी हो जाते हैं। इन विचारों से बचने के लिए किसी भी मंत्र का जप करते रहने से मन में विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है।

कुछ मिनटों तक मंत्र उच्चारण करने से हमारे भीतर और आसपास की ऊर्जा का स्तर बढ़ जाता है और बना रहता है। ब्रह्मांड ऊर्जा से बना है। इसका शरीर के विभिन्न भागों पर अलगअलग प्रभाव पड़ता है, जिससे ऊर्जा और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। उदाहरण के लिए, ‘ऊं’ मंत्र क्रोध को शांत करता है, शांति, एकाग्रता और ध्यान को बढ़ाता है।