देश में जल्द ही प्राइवेट निवेश की एक बड़ी बाढ़ देखने को मिल सकती है. इसके संकेत सरकारी बैंकों की ओर से मिली है. सरकारी बैंकों ने जानकारी दी है कि लगभग ₹7.8 लाख करोड़ की कुल कॉर्पोरेट लोन पाइपलाइन सामने आई है. जो कि मजबूत क्रेडिट मांग का संकेत है. पंजाब नेशनल बैंक ने बताया कि उसके पास ₹1.58 लाख करोड़ की कॉर्पोरेट लोन पाइपलाइन है. बैंक के अनुसार, उसने वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक के कॉर्पोरेट लोन मंजूर किए हैं, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2026 में यह आंकड़ा लगभग ₹4 लाख करोड़ था.

किस सरकारी बैंक के पास कितनी डिमांड
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पास ₹12,000 करोड़ की कॉर्पोरेट लोन पाइपलाइन है. बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी कल्याण कुमार ने खुदी इस बात की जानकारी ईटी की रिपोर्ट में दी है. मीडिया रिपोर्ट में कुमार ने कहा कि हमारे पास ₹7,000 करोड़ के ऐसे मंजूर लोन हैं जिनका वितरण होना बाकी है, और ₹5,000 करोड़ के लोन अभी प्रोसेस में हैं. हमारे पास एक अच्छी पाइपलाइन है और हमारी मौजूदा कॉर्पोरेट बुक ₹1.18 लाख करोड़ की है, जो कुल लोन का 32 फीसदी है. केनरा बैंक के पास लगभग ₹47,000 करोड़ की कॉर्पोरेट लोन पाइपलाइन है, जबकि इंडियन बैंक ने ₹63,000 करोड़ के अवसर पहचाने हैं. इन बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पास सबसे बड़ा संभावित अवसर है. 28 अगस्त को बैंक के चेयरमैन सीएस सेट्टी ने मीडिया रिपोर्ट में बताया था कि SBI की कॉर्पोरेट लोन संभावनाएं ₹5 लाख करोड़ तक हैं. इसमें रिन्यूएबल एनर्जी , बैटरी स्टोरेज और डेटा सेंटर में निवेश की योजनाएं शामिल हैं.
बैंकेबल प्रोजेक्ट्स का बड़ा पूल
निवेश में तेजी का असर बैंकों के कॉर्पोरेट क्रेडिट ग्रोथ पर भी दिख रहा है, हालांकि इसकी रफ्तार अलगअलग बैंकों में अलगअलग है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। RBL बैंक के कॉर्पोरेट लोन में सालाना आधार पर लगभग 58% की वृद्धि हुई, जबकि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का कॉर्पोरेट क्रेडिट पोर्टफोलियो 42.05% बढ़ा. एक्सिस बैंक ने 34% की वृद्धि दर्ज की, और ICICI बैंक की वृद्धि 30.6% रही. केनरा बैंक के कॉर्पोरेट और अन्य एडवांस में 17.26% की बढ़ोतरी हुई, फेडरल बैंक का कॉर्पोरेट और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग पोर्टफोलियो 17% बढ़ा, और HDFC बैंक की कॉर्पोरेट और अन्य होलसेल लोन बुक में 16.4% की वृद्धि हुई.
कोटक महिंद्रा बैंक में कॉर्पोरेट बैंकिंग की प्रमुख अनु अग्रवाल ने कहा कि स्टील और सीमेंट समेत कई सेक्टर्स में कॉर्पोरेट कैपेक्स में तेजी आनी शुरू हो गई है. रिन्यूएबल एनर्जी इकोसिस्टम की कंपनियां, खासकर सोलर मॉड्यूल और सेल बनाने वाली कंपनियां, अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश कर रही हैं. सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग भी एक ऐसा उभरता हुआ क्षेत्र है, जो भारत में नया निवेश आकर्षित कर रहा है.
अग्रवाल ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि निवेश की इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से मध्यम और बड़ी कंपनियों की अहम भूमिका है, जिससे छोटे सप्लायर्स के लिए भी अवसर पैदा हो रहे हैं. आरबीएल बैंक के एमडी और मुख्य कार्यकारी आर. सुब्रमण्यकुमार ने कहा कि बैंकेबल कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट्स का दायरा बढ़ रहा है, क्योंकि कंपनियों में फिर से निवेश करने की क्षमता आ गई है और बैंकों के पास उन्हें फंड देने के लिए पर्याप्त पूंजी मौजूद है. सुब्रमण्यकुमार ने कहा कि काफी बड़ी संख्या में कॉर्पोरेट कंपनियां पूंजीगत व्यय कर रही हैं, जिससे एक बहुत बड़ा अवसर तैयार हो रहा है.



