बारिश का मौसम आते ही डेंगू और स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने लगते हैं. सबसे बड़ी परेशानी यह है कि दोनों बीमारियों के शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे दिखाई देते हैं. तेज बुखार, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसी समस्याओं के कारण मरीज अक्सर यह समझ नहीं पाते कि उन्हें डेंगू हुआ है या स्वाइन फ्लू. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कई बार जांच रिपोर्ट आने तक स्थिति साफ नहीं हो पाती.

विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों बीमारियों के फैलने का तरीका बिल्कुल अलग है, इसलिए इनके लक्षणों को समझना और समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है. चलिए आपको एक्सपर्ट के जरिए बताते हैं इनमें फर्क…
कैसे फैलता है डेंगू और स्वाइन फ्लू?
डॉ. आशीष चौधरी ने इस बारे में बताया है. डॉ आशीष कहते हैं कि डेंगू एक वायरल बीमारी है, जो एडीज मच्छर के काटने से फैलती है. यह मच्छर दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है और घरों के आसपास जमा साफ पानी में पनपता है. कूलर, गमले, छत पर रखे बर्तन और निर्माण स्थलों पर जमा पानी इसके लिए सबसे उपयुक्त जगह मानी जाती है.
वहीं, स्वाइन फ्लू एक संक्रामक श्वसन संबंधी बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलती है. भीड़भाड़ वाली जगहों, स्कूलों, कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन में इसके फैलने का खतरा अधिक होता है.
डेंगू के लक्षण क्या हैं?
अचानक तेज बुखार
जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द
आंखों के पीछे दर्द
सिरदर्द
त्वचा पर लाल चकत्ते
कमजोरी और थकान
प्लेटलेट्स की संख्या में कमी
डेंगू को कई बार ‘हड्डी तोड़ बुखार’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें शरीर में बहुत ज्यादा दर्द होता है.
स्वाइन फ्लू के लक्षण कैसे अलग हैं?
तेज बुखार
गले में खराश
खांसी
नाक बंद होना
शरीर में दर्द
थकान
सांस लेने में परेशानी
इसी वजह से कई लोग इसे सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.
दोनों बीमारियों की पहचान कैसे होती है?
डॉ आशीष के मुताबिक,डेंगू की पुष्टि के लिए खून की जांच कराई जाती है. वहीं, स्वाइन फ्लू की जांच के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट किया जाता है. केवल लक्षणों के आधार पर इन दोनों बीमारियों की सही पहचान करना मुश्किल हो सकता है.
लापरवाही पड़ सकती है भारी
अगर डेंगू का समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकता है और खून बहने जैसी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं. दूसरी ओर, स्वाइन फ्लू फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है और निमोनिया या सांस लेने में गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है. बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में इसका खतरा और बढ़ जाता है.
क्या करें?
बारिश के मौसम में बुखार को बिल्कुल भी हल्के में न लें. अगर तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द, खांसी, गले में खराश या प्लेटलेट्स में कमी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. समय पर जांच और सही इलाज ही इन दोनों बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है.


