आज के डिजिटल युग में जीवनसाथी की तलाश के लिए मैट्रिमोनियल साइट्स का चलन काफी बढ़ा है। लोग एकदूसरे को जानने और समझने के लिए इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, इस सुविधा के साथ ही साइबर अपराध की एक नई चुनौती भी सामने आई है। मैट्रिमोनियल साइट्स पर सक्रिय ठग फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। ये अपराधी खुद को आईएएस, आईपीएस, सीबीआई अधिकारी, प्रोफेसर या किसी प्रतिष्ठित सरकारी पद पर कार्यरत बताकर लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर भावनात्मक संबंध बनाकर बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं।

दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें पीड़ितों को लाखों रुपये का चूना लगाया गया है। इस प्रकार की धोखाधड़ी के तौरतरीकों को तीन प्रमुख उदाहरणों से समझा जा सकता है। पहले मामले में, एक महिला एडवोकेट ने शिकायत दर्ज कराई कि एक व्यक्ति ने शादी का झांसा देकर उससे करीब 12 लाख रुपये ठग लिए। आरोपी खुद को कभी आईएफएसओ, कभी सीबीआई अधिकारी तो कभी प्रोफेसर बताकर महिला का विश्वास जीतने में सफल रहा। जांच में पता चला कि वह आरोपी सात महिलाओं से कुल 60 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर चुका था।

दूसरे मामले में, साइबर पुलिस के पास एक महिला ने शिकायत की कि मैट्रिमोनियल साइट पर मिले एक व्यक्ति ने शादी का वादा कर उसके साथ विश्वासघात किया। आरोपी ने खुद को सरकारी अधिकारी और सीनियर मैनेजर बताकर महिला के बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड की जानकारी हासिल कर ली और बाद में उन खातों से पैसे निकाल लिए। इसी प्रकार, एक अन्य मामले में एक युवती को शादी के बहाने ठगा गया। आरोपी ने खुद को आईपीएस अधिकारी और सीबीआई में जॉइंट डायरेक्टर बताकर परिवार को प्रभावित किया। बाद में बैंक खाता फ्रीज होने का बहाना बनाकर उसने युवती से 5 लाख रुपये ऐंठ लिए।

इस तरह के मामलों को देखते हुए साइबर विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। दिल्ली पुलिस मुख्यालय के लीगल डिवीजन के इंस्पेक्टर रमण कुमार सिंह का कहना है कि ठग अक्सर उच्च पदों का ढोंग रचकर पीड़ितों को भावनात्मक रूप से फंसाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अनजान प्रोफाइल पर भरोसा करने से पहले उसकी पहचान, नौकरी और पारिवारिक पृष्ठभूमि का सत्यापन करना अनिवार्य है।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से मैट्रिमोनियल साइट्स का उपयोग करते समय कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतनी चाहिए। किसी भी रिश्ते को आगे बढ़ाने से पहले संबंधित व्यक्ति का आधार कार्ड, पैन कार्ड या अन्य आधिकारिक सरकारी पहचान पत्र की मांग अवश्य करें। जब तक व्यक्ति और उसके दावों का पूरी तरह से सत्यापन न हो जाए, किसी भी प्रकार का आर्थिक लेनदेन न करें। किसी भी व्यक्ति के साथ बैंक विवरण, ओटीपी या अपनी निजी जानकारी साझा करना नुकसान का कारण बन सकता है। इसके अतिरिक्त, मैट्रिमोनियल साइट पर मौजूद रिपोर्टिंग विकल्प का उपयोग करें और अपनी बातचीत में परिवार को शामिल रखें। यदि किसी प्रोफाइल या व्यक्ति की गतिविधियां संदिग्ध लगें, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर या साइबरक्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। वेबसाइट की विश्वसनीयता की जांच करना और अधिक से अधिक सवाल पूछकर संदेहों को दूर करना ही सुरक्षा का एकमात्र उपाय है।