सीजफायर जिसे शांति बताया गया वो निकला सबसे बड़ा झूठ। एक तरफ सीज फायर का ऐलान लेकिन दूसरी तरफ धमाके, मिसाइलें और सैकड़ों मौतें और अब इस्लामाबाद की मीटिंग भी टल गई है। सबसे पहले बात करते हैं सीज फायर की सच्चाई की। जिस शांति का दावा किया गया। दरअसल वह शुरू से ही पहले ही खत्म हो चुकी थी। क्योंकि ईरान में धमाके हुए। ऑयल रिफाइनरी पर ब्लास्ट हुआ। सीरी आइलैंड पर विस्फोट हुआ और फिर परमाणु ठिकानों के आसपास भी धमाके हुए। यानी साफ है कि सीज फायर सिर्फ घोषणा थी। सिर्फ झूठ था। जमीन पर जंग जारी थी। फिर सऊदी अरब में भी हमले हुए जहां ईस्ट वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर ड्रोन अटैक किए गए। तीसरे हमले की खबरें जो सामने आई वो इजराइल से आई। यहां पर बता दें कि मिसाइलें बरसी और फिर लेबनान से भी धमाकों की खबरें सामने आई। जहां एक ही रात में 250 से 300 से ज्यादा लोग मारे गए। यह कोई सीज फायर नहीं। यह ओपन वॉर है। सबसे बड़ा सवाल पाकिस्तान ने यह दावा किया था कि लेबनान भी सीज फायर का हिस्सा होगा। लेकिन इजराइल ने साफ कहा कि लेबनान इस डील में था ही नहीं। और अमेरिका ने भी यही कहा। तो फिर आखिरकार पाकिस्तान ने झूठ क्यों बोला?
यहीं पर पूरा नैरेटिव टूट जाता है। और इसी वजह से इस्लामाबाद में 10 अप्रैल की मीटिंग जो है उसे पोस्टपोन कर दी गई। जिस डील पर बात होनी थी वो डील असल में थी ही नहीं। अब सुनिए सबसे बड़ा और खतरनाक एंगल। ट्रंप एक तरफ ईरान को धमका रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ अपने ही देश के मीडिया पर वो जमकर हमला बोल रहे हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स और दूसरे चैनल्स को वो फेक और लूजर तक कह दे रहे हैं। ट्रंप ने यह साफ लिखा है कि मीडिया हाउस ने ईरान के फर्जी 10 पॉइंट प्लान को फैलाया और बातचीत को बदनाम करने की यहां पर कोशिश की गई। लेकिन यहीं पर ट्रंप का दूसरा चेहरा भी सामने आता है। उन्होंने ये साफ कहा कि जब तक रियल एग्रीमेंट नहीं होता अमेरिकी सेना वहीं रहेगी। यानी कि सारे जहाज, सारे विमान और सारे हथियार सब कुछ ईरान के आसपास तैनात रहेंगे और अगर समझौता नहीं हुआ तो इतने खतरनाक हमले होंगे जो पहले कभी नहीं हुए। यानी सीज फायर की बात भी और जंक की धमकी भी। दोनों एक साथ चल रहे हैं। अब सुनिए जेडी वंस ने क्या कुछ कहा। उन्होंने तो सीधे-सीधे मजाक उड़ाया है।
जेडी वंस ने कहा है कि ईरान की शर्तें ऐसी लगती है जैसे चैट जीपीटी से लिखवाई गई हो। यानी अमेरिका इन शर्तों को गंभीरता से ले ही नहीं रहा और वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलन ने यह साफ कहा है कि यह जो शर्तें हैं यह अनसीरियस है। यह बिल्कुल भी अनएक्सेप्टेबल है और इन्हें कूड़ेदान में फेंक देना चाहिए। अब यहां पर असली टकराव आप समझिए। ईरान ये कह रहा है कि अमेरिका हमारी 10 शर्तें मान चुका है। जिनमें शामिल है हॉर्न पर ईरान का कंट्रोल, यूरेनियम एनरचमेंट की अनुमति, प्रतिबंध हटाना, अमेरिकी सेना हटाना, लेबनान पर हमले रोकना। लेकिन अमेरिका दूसरी तरफ यह कह रहा है कि हमने ऐसा कुछ माना ही नहीं। यानी सीज फायर झूठ से भरा हुआ है।






