उत्तर प्रदेश में जमीनजायदाद खरीदने या बेचने की सोच रहे लोगों के लिए इस साल सर्किल रेट एक बार फिर चर्चा में है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा से लेकर राजधानी लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज और मेरठ तक हर शहर में प्रॉपर्टी की सरकारी दरें अलगअलग हैं. इनमें बड़े बदलाव की चर्चा लंबे समय से चल रही है. दरअसल, राज्य में करीब नौ साल से सर्किल रेट में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ था. इसकी वजह से जमीन के बाजार भाव और सरकारी रेट के बीच काफी अंतर बन गया है. इसी अंतर को कम करने के लिए स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने रेट बढ़ाने का प्रपोजल तैयार किया था. हालांकि, यह प्रोसेस अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है और फिलहाल रिव्यू में है. ऐसे में सवाल है कि आखिर सर्किल रेट तय कैसे होता है, अलगअलग शहरों में मौजूदा रेट क्या हैं, कितनी बढ़ोतरी की उम्मीद है और क्या तय रेट से कम में जमीन की खरीदबिक्री हो सकती है. आइए पूरी जानकारी समझते हैं.

यूपी में सर्किल रेट कैसे तय होता है?

हर साल राज्य सरकार सर्किल रेट की नई लिस्ट जारी करती है, लेकिन यह रेट पूरे प्रदेश में एक जैसा नहीं होता. अलगअलग शहरों और एक ही शहर के अलगअलग इलाकों में भी सर्किल रेट अलग होता है. इसे तय करते समय मुख्य रूप से चार बातों का ध्यान रखा जाता है. सबसे पहले प्रॉपर्टी का मौजूदा बाजार भाव देखा जाता है. हालांकि, आमतौर पर सर्किल रेट बाजार भाव से कम रखा जाता है.

दूसरा फैक्टर है प्रॉपर्टी का इस्तेमाल. रिहायशी प्रॉपर्टी के लिए रेट अपेक्षाकृत कम होता है, जबकि दुकान या ऑफिस जैसी कमर्शियल प्रॉपर्टी पर आमतौर पर ज्यादा रेट लागू होता है. तीसरा फैक्टर है आसपास की सुविधाएं. अच्छी सड़कें, ट्रांसपोर्ट, अस्पताल, स्कूल, पार्क और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधाओं वाले इलाकों में सर्किल रेट ज्यादा होता है. आखिरी अहम फैक्टर है लोकेशन. पॉश इलाके में मौजूद प्रॉपर्टी का रेट ग्रामीण या कम विकसित इलाके की तुलना में काफी ज्यादा होता है. यही वजह है कि लखनऊ के गोमती नगर और नोएडा के प्रीमियम सेक्टरों में सर्किल रेट शहर के बाकी हिस्सों से काफी ज्यादा है.

लखनऊ से लेकर नोएडा तक का रेट

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सर्किल रेट इलाके के हिसाब से काफी अलग है. प्रस्तावित बढ़ोतरी करीब 17% है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मैजिकब्रिक्स के डेटा के मुताबिक, बाहरी इलाकों में रेट 14 हजार रुपये से बढ़कर करीब 16,400 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो सकता है. वहीं, सुल्तानपुर रोडशहीद पथ पर 25 हजार से बढ़कर 29,300 रुपये और सीतापुर रोड पर 39 हजार से करीब 45,700 रुपये हो सकता है. गोमती नगर के प्रमुख इलाकों में रेट 40 हजार से बढ़कर करीब 46,800 रुपये तक पहुंच सकता है. वहीं हजरतगंजकालीदास मार्ग जैसे सबसे महंगे इलाके में 76 हजार से बढ़कर करीब 89 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर होने का अनुमान है.

वहीं, नोएडा में सेक्टर के हिसाब से कई स्लैब हैं और प्रस्तावित बढ़ोतरी करीब 20% है. बाहरी और नए सेक्टरों में 42 हजार रुपये का रेट बढ़कर करीब 50,400 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो सकता है. बेहतर विकसित सेक्टरों में 46,200 से बढ़कर 55,400 रुपये और कई प्रमुख सेक्टरों में 55,150 से बढ़कर करीब 66,200 रुपये होने का अनुमान है. पॉश सेक्टरों में मौजूदा 75,600 रुपये का रेट करीब 90,700 रुपये, जबकि सबसे प्रीमियम सेक्टरों में 1.09 लाख से बढ़कर करीब 1.31 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच सकता है.

गाजियाबाद और प्रयागराज में क्या हैं रेट्स?

गाजियाबाद में भी इलाके के हिसाब से सर्किल रेट में बड़ा अंतर है. कौशांबी में यह करीब 75,600 रुपये प्रति वर्ग मीटर है, जबकि सूर्य नगर, चंद्र नगर, रामप्रस्था और वैशाली में करीब 70,400 रुपये है. इंदिरापुरम में रेट लगभग 69,300 रुपये और वसुंधरा में करीब 58,800 रुपये प्रति वर्ग मीटर है. वहीं पंचवटी कॉलोनी में सर्किल रेट अपेक्षाकृत कम, करीब 40 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर है.

प्रयागराज में सर्किल रेट लोकेशन और विकास के हिसाब से काफी अलगअलग है. झूंसी में यह करीब 1,111 से 4,024 रुपये प्रति वर्ग फुट, नैनी में 2,083 से 4,370 रुपये और झलवा में करीब 3,150 से 3,770 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच है. धूमनगंज में रेट करीब 4,000 रुपये प्रति वर्ग फुट है. वहीं कानपुर, आगरा, वाराणसी और मेरठ में भी सर्किल रेट इलाके के बाजार भाव और विकास के आधार पर अलगअलग हैं. इनकी ताजा इलाकावार जानकारी स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की वेबसाइट पर देखी जा सकती है.

कितनी हो सकती है बढ़ोतरी?

स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने प्रदेश के अलगअलग शहरों में सर्किल रेट को 1 अप्रैल 2026 से बढ़ाने का फैसला लिया था, लेकिन यह प्रोसेस लगातार टलती रही और अगस्त 2026 तक भी मामला रिव्यू में है. प्रस्तावित बढ़ोतरी 20 से 70% के बीच रहने की उम्मीद है. इसका सबसे ज्यादा असर हाईराइज बिल्डिंगों और कृषि जमीन के रेट पर पड़ सकता है. अधिकारियों के मुताबिक ऊंची रिहायशी इमारतों यानी हाईराइज अपार्टमेंट के रेट में करीब 20% तक बढ़ोतरी हो सकती है.

ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी के रेट करीब 25% तक बढ़ सकते हैं. सबसे बड़ी बढ़ोतरी जेवर एयरपोर्ट के आसपास की कृषि जमीन में देखने को मिल सकती है, जहां रेट करीब 70% तक बढ़ने की संभावना है. एयरपोर्ट की वजह से इस इलाके में जमीन की मांग तेजी से बढ़ी है. अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में करीब नौ साल बाद सर्किल रेट में यह बदलाव किया जा रहा है. हालांकि, संशोधित रेट अभी औपचारिक रूप से जारी नहीं हुए हैं. अनुमान है कि नोएडा के सेक्टर 14A, 15A और 44 जैसे इलाकों में रेट मौजूदा 1.03 लाख से 1.2 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़कर 1.2 लाख से 1.4 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच सकते हैं. इसके अलावा राज्य में कंस्ट्रक्शन रेट में भी करीब 30% तक बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है. इसका सीधा असर प्रॉपर्टी की कुल रजिस्ट्री लागत पर पड़ेगा.

क्या यूपी में सर्किल रेट से कम में जमीन बेच सकते हैं?

कानूनी तौर पर खरीदार और विक्रेता आपस में किसी भी कीमत पर सौदा तय कर सकते हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के समय सरकार के तय बेंचमार्क यानी सर्किल रेट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अगर आपकी असल बिक्री कीमत उस इलाके के सर्किल रेट से कम है, तो रजिस्ट्री ऑफिस स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की गणना कम कीमत पर नहीं करेगा. इसकी गणना सर्किल रेट के हिसाब से तय ज्यादा वैल्यू पर होगी. उदाहरण के लिए, अगर कोई फ्लैट 45 लाख रुपये में खरीदा गया है, लेकिन उसकी सर्किल रेट वैल्यू 50 लाख रुपये बनती है, तो स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क की गणना 50 लाख रुपये पर होगी.

इतना ही नहीं, कीमत में यह अंतर इनकम टैक्स के नियमों के तहत भी देखा जा सकता है. विक्रेता के मामले में कैपिटल गेन की गणना के लिए कुछ परिस्थितियों में सरकारी वैल्यू को ध्यान में रखा जा सकता है. वहीं, खरीदार के मामले में भी तय सीमा से ज्यादा अंतर होने पर टैक्स का असर पड़ सकता है. आम तौर पर प्रॉपर्टी सर्किल रेट से कम कीमत पर तभी बिकती है जब इसके पीछे कोई खास वजह हो. जैसे कोई पुराना या जर्जर ढांचा हो, प्रॉपर्टी किसी गंभीर कानूनी विवाद में हो या विक्रेता को आर्थिक जरूरत के चलते जल्द पैसे चाहिए हों.

ऐसे मामलों में अगर आप सर्किल रेट से कम कीमत पर प्रॉपर्टी खरीदना या बेचना चाहते हैं, तो कम कीमत की वजह साबित करने के लिए प्रॉपर्टी की तस्वीरें, वैल्यूएशन रिपोर्ट और दूसरे जरूरी सबूत अपने पास रखें. कुल मिलाकर, यूपी में सर्किल रेट बढ़ाने का प्रपोजल फिलहाल टला हुआ है, लेकिन करीब नौ साल बाद बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है. इससे आने वाले समय में प्रदेश के प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री महंगी हो सकती है. ऐसे में जमीन खरीदने या बेचने की तैयारी कर रहे लोगों को अपने इलाके के मौजूदा और प्रस्तावित सर्किल रेट पर नजर रखनी चाहिए.