आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती मांग के कारण पिछले कुछ सालों में चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है, लेकिन अब निवेश बैंक Morgan Stanley की मुख्य निवेश अधिकारी लिसा शैलेट
ने निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है.

शैलेट का कहना है कि अब ऐसे संकेत मिलने लगे हैं कि सेमीकंडक्टर कंपनियों की कीमत तय करने की ताकत धीरेधीरे कमजोर पड़ सकती है. यानी आने वाले समय में चिप कंपनियां पहले की तरह ऊंची कीमतों पर अपने उत्पाद बेचने की स्थिति में नहीं रह सकतीं.

बड़ी टेक कंपनियां खुद बना रही हैं AI चिप्स

लिसा शैलेट के अनुसार, AI डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाली तकनीक तेजी से बदल रही है. पहले बड़ी टेक कंपनियां AI चिप्स के लिए बाहरी कंपनियों पर निर्भर थीं, लेकिन अब Microsoft, Amazon, Google और Meta जैसी बड़ी टेक कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से खुद के कम लागत वाले AI चिप्स डिजाइन कर रही हैं. अगर यह रुझान तेजी से बढ़ता है, तो पारंपरिक चिप कंपनियों की मांग और मुनाफे पर असर पड़ सकता है.

AI की वजह से आई थी जबरदस्त तेजी

AI टेक्नोलॉजी की लोकप्रियता बढ़ने के बाद से दुनिया की कई चिप कंपनियों के शेयरों में रिकॉर्ड तेजी आई है. निवेशकों ने AI को भविष्य का सबसे बड़ा अवसर मानते हुए इस सेक्टर में भारी निवेश किया. इसी वजह से सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयर लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंचे. हालांकि Morgan Stanley का मानना है कि अब इस तेजी के बाद बाजार में सावधानी बरतने का समय आ गया है.

सप्लाई की कमी से बढ़ी थीं कीमतें

लिसा शैलेट ने कहा कि जब किसी उद्योग में सप्लाई कम होती है और मांग ज्यादा होती है, तो कंपनियां ऊंची कीमत वसूलने लगती हैं. लेकिन इसके बाद इंजीनियर और टेक कंपनियां कम लागत वाले नए विकल्प तैयार करने में जुट जाती हैं. उनके मुताबिक, AI चिप उद्योग में भी यही प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. बड़ी टेक कंपनियां अब ऐसे चिप्स विकसित कर रही हैं जो कम कीमत में बेहतर प्रदर्शन दे सकें.

सेमीकंडक्टर शेयर हो चुके हैं महंगे

Morgan Stanley ने इस सप्ताह जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयर “जरूरत से ज्यादा महंगे” हो चुके हैं. रिपोर्ट के अनुसार, चिप कंपनियों में निवेश करने वाले कई ETF और Philadelphia Semiconductor Index में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बहुत तेज बढ़ोतरी हुई है. ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 के बाद से इस इंडेक्स का प्राइसटूअर्निंग अनुपात तीन गुना से भी अधिक बढ़ चुका है. इसका मतलब है कि कई निवेशक इन शेयरों के लिए बहुत अधिक कीमत चुकाने को तैयार हैं, जिससे भविष्य में मुनाफावसूली और गिरावट का जोखिम भी बढ़ सकता है.