उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने 8 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं. इस लिस्ट पर नजर डालें तो इसमें जातीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का पूरा गणित भी दिखाई देता है. बीजेपी ने इस बार 2 ब्राह्मण, 3 OBC, 2 दलित और 1 राजपूत चेहरे को उम्मीदवार बनाया है. OBC में लोधी, पालगड़रिया और कुर्मी प्रतिनिधित्व है, जबकि दलित वर्ग से खटीक और पासी समाज के चेहरे हैं.

राज्यसभा की जिन बीजेपी सीटों पर इस बार बदलाव हो रहा है, उनमें मौजूदा समीकरण में ब्राह्मण, राजपूत, OBC, दलित और सिख सभी प्रतिनिधित्व था. मौजूदा बीजेपी सांसदों में दिनेश शर्मा ब्राह्मण हैं, सीमा द्विवेदी ब्राह्मण हैं, नीरज शेखर और अरुण सिंह राजपूत समुदाय से आते हैं, बीएल वर्मा लोधी OBC, गीता शाक्य OBC, बृजलाल दलित और हरदीप सिंह पुरी सिख समुदाय से आते हैं. दिनेश शर्मा के राज्यपाल बनने के बाद उनकी सीट पहले ही खाली हो चुकी थी.
यानी पुराने समीकरण में जहां 2 OBC + 1 दलित + 2 राजपूत + 2 ब्राह्मण + 1 सिख का प्रतिनिधित्व दिखाई देता था, नई लिस्ट में यह बदलकर 3 OBC + 2 दलित + 1 राजपूत + 2 ब्राह्मण हो गया है.
लोधी के बदले लोधी… लेकिन चेहरा बदला
केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा लोधी समाज से आते हैं और इस बार बीजेपी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा का टिकट नहीं दिया. उनकी जगह धर्मपाल सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है, जो लोधी समाज से आते हैं और आंवला से बीजेपी विधायक होने के साथ योगी सरकार में मंत्री हैं. लोधी समाज के प्रभाव की बात करें तो अलगअलग अनुमानों में यूपी की आबादी में इसकी हिस्सेदारी करीब 2.6 से 3 प्रतिशत के बीच बताई गई है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। राजनीतिक रूप से इसकी मौजूदगी पश्चिमी यूपी, रुहेलखंड, ब्रज, बुंदेलखंड और अवध के कई हिस्सों में है. बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत, एटा, कासगंज, अलीगढ़, आगरा, मैनपुरी, फिरोजाबाद से लेकर बुंदेलखंड के झांसी, जालौन, हमीरपुर और महोबा तक लोधी प्रभाव वाले इलाके बताए जाते हैं.
OBC में दूसरी बड़ी एंट्री शाक्य की जगह पाल
दूसरा बड़ा OBC चेहरा हैं प्रकाश पाल. उनकी एंट्री गीता शाक्य की जगह हुई है. प्रकाश पाल, यूपी बीजेपी OBC मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं और पाल/गड़रिया समाज से आते हैं. गड़रिया/पाल समुदाय की यूपी की आबादी में करीब 2.4 से 3 प्रतिशत का अनुमान मिलता है. यह समुदाय खास तौर पर गैरयादव OBC राजनीति का हिस्सा माना जाता है. इस समुदाय की मौजूदगी पश्चिमी यूपी के साथसाथ मध्य यूपी और बुंदेलखंड के कई हिस्सों में है. मौजूदा समय में सपा ने श्यामलाल पाल और बीएसपी ने विश्वनाथ पाल को अपना प्रदेश अध्यक्ष बना रखा है.
तीसरा OBC चेहरा श्रुति गंगवार
तीसरा OBC चेहरा हैं श्रुति गंगवार. वह कुर्मी समाज से आती हैं और बरेली के वरिष्ठ बीजेपी नेता संतोष गंगवार की बेटी हैं. कुर्मी यूपी के महत्वपूर्ण गैरयादव OBC समूहों में शामिल हैं. इनकी हिस्सेदारी करीब 4 से 7 प्रतिशत के बीच आंकी गई है. कुर्मी प्रभाव वाले इलाकों में पूर्वांचल के गोरखपुरमहराजगंज बेल्ट से लेकर अवध और बुंदेलखंड तक के कई जिले शामिल हैं. श्रुति गंगवार की एंट्री इसलिए भी अहम है, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में कुर्मियों ने सपा को अपना वोट दिया था. इस वजह से सपा के 7 कुर्मी सांसद जीते थे.
दो ब्राह्मण चेहरे राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पाण्डेय
बीजेपी ने इस बार दो ब्राह्मण चेहरों को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पाण्डेय. राधाकांत ओझा, प्रयागराज के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं. गोपी कृष्ण पाण्डेय लंबे समय से बीजेपी संगठन में सक्रिय रहे हैं. ब्राह्मण यूपी की राजनीति में राज्य के लगभग सभी हिस्सों में मौजूद प्रभावशाली सवर्ण समूह है, खास तौर पर पूर्वांचल, अवध और मध्य यूपी में इसका राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से देखा जाता रहा है. इनकी आबादी करीब 12 फीसदी है. यूजीसी के मुद्दे पर ब्राह्मण नाराज बताए जा रहे थे. ऐसे में बीजेपी ने दो ब्राह्मण चेहरों को टिकट देकर नाराजगी दूर करने की कोशिश की.
दलित समीकरण में बड़ा बदलाव एक से दो चेहरे
नई सूची में दो दलित चेहरे हैं विद्यासागर सोनकर और प्रियंका सिंह रावत. विद्यासागर सोनकर खटीक समाज से आते हैं और बीजेपी के पुराने दलित चेहरों में गिने जाते हैं. खटीक समाज की पश्चिमी व मध्य यूपी के कई इलाकों में इसकी मौजूदगी है. प्रियंका पासी समाज से आती हैं. पासी समाज का प्रभाव खास तौर पर मध्य और पूर्वी यूपी की पट्टी में देखा जाता है. सरकारी जनगणना के पुराने जिला आंकड़ों के अनुसार, लखीमपुर से लेकर प्रयागराज तक पासी आबादी की मजबूत मौजूदगी रही है. प्रयागराज, सीतापुर, रायबरेली, बाराबंकी, हरदोई, उन्नाव, लखीमपुर, लखनऊ, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर जैसे जिलों में इसकी बड़ी आबादी दर्ज की गई है. अयोध्या के सपा सांसद अवधेश प्रसाद और बाराबंकी के कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया भी पासी हैं.
सिर्फ एक राजपूत को टिकट
राजपूत समुदाय से इस बार राम प्रताप सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाया गया है. वह आगरा के एत्मादपुर से पूर्व विधायक और बीजेपी के प्रदेश महामंत्री रहे हैं. पिछली बार राजपूत चेहरों के रूप में नीरज शेखर और अरुण सिंह राज्यसभा गए थे. इस बार दो की जगह एक ही राजपूत को भेजा गया है. इसके पीछे बीजेपी का तर्क है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी राजपूत नेता हैं.
सबसे बड़ा बदलाव सिख प्रतिनिधित्व खत्म
मौजूदा सांसदों में हरदीप सिंह पुरी यूपी से राज्यसभा का सिख चेहरा थे. इस बार उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया. बीजेपी की नई सूची में कोई सिख उम्मीदवार नहीं है.



