मध्य प्रदेश की ‘लाड़ली बहना योजना’ को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव का एक बयान सामने आया है. एक निजी कार्यक्रम में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लाड़ली बहना योजना से सरकार पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पद संभालने के समय उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि इससे इतना ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ेगा.

मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने शुरू की थी. शुरुआत में, इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,000 मिलते थे. बाद में इस राशि को बढ़ाकर ₹1,250 प्रति माह कर दिया गया. बीजेपी सरकार ने महिलाओं के लिए इस राशि को बढ़ाकर ₹3,000 प्रति माह करने का लक्ष्य भी रखा है. वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव के बयान के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है.

मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा कि चुनाव से पहले महिलाओं को ‘लाड़ली’ कहा जाता था, लेकिन सत्ता में आने के बाद वही योजना सरकार के लिए परेशानी का सबब बन गई है. तंज कसते हुए उमंग सिंघार ने कहा, “चुनाव से पहले ‘लाड़ली’, सत्ता में आने पर बोझ.” उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान और महिलाओं के सम्मान को लेकर बीजेपी के दावों के बीच अंतर बताते हुए सवाल उठाए.

योजना शुरू होने से अब तक कितना पैसा गया?

जून 2023 में योजना शुरू हुई थी. शुरुआत में महिलाओं को ₹1,000 प्रतिमाह दिए गए. अक्टूबर 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच इसे बढ़ाकर ₹1250 कर दिया गया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। नवंबर 2025 से अब तक ₹1,500 रुपये दिए जा रहे हैं. सितंबर 2026 की 40वीं नियमित किस्त के बाद जून 2023 से अब तक नियमित मासिक सहायता के रूप में ₹65,395.99 करोड़ महिलाओं के खातों में ट्रांसफर हो चुके हैं. ध्यान देने वाली बात है कि यह नियमित मासिक सहायता का आंकड़ा है. इसके अलावा रक्षाबंधन पर ₹250 की विशेष सहायता अलग से दी गई है.

रक्षाबंधन के ₹250 का अलग कितना भार?

2023, 2024, 2025 और 2026, इन चारों साल रक्षाबंधन पर पात्र महिलाओं को ₹250 अतिरिक्त दिए गए. सिर्फ 2026 में करीब ₹313 करोड़ बांटे गए. 2026 में नियमित ₹1,500 की किस्त ₹1,835.46 करोड़ और रक्षाबंधन का अतिरिक्त ₹312.83 करोड़ मिलाकर करीब ₹2,148.30 करोड़ ट्रांसफर हुए.

इसलिए अगर सवाल सरकार ने योजना के तहत अब तक वास्तव में महिलाओं को कितना पैसा दिया? है, तो ₹65,395.99 करोड़ में इन विशेष ₹250 भुगतानों को जोड़कर आंकड़ा ₹66 हजार करोड़ से ऊपर बैठता है. हालांकि उपलब्ध सरकारी रिपोर्टिंग में ₹65,395.99 करोड़ को नियमित मासिक सहायता के रूप में अलग बताया गया है, इसलिए दोनों आंकड़ों को मिलाकर पेश करते समय यह अंतर स्पष्ट रखना जरूरी है.

अभी कितनी महिलाएं लाभ ले रही हैं?

सितंबर 2026 की 40वीं किस्त में 1,25,10,150 महिलाएं पात्र थीं और उन्हें ₹1,835 करोड़ से ज्यादा ट्रांसफर किए गए. विधानसभा के फरवरी 2026 के जवाब में भी करीब 1.25 करोड़ सक्रिय लाभार्थी बताए गए थे. सरकारी पोर्टल पर कुल पंजीकरण इससे अधिक है, क्योंकि पंजीकृत महिलाओं और वर्तमान में भुगतान प्राप्त कर रही महिलाओं की संख्या एक जैसी नहीं है.

हर महीने सरकार पर कितना भार?

वर्तमान में 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को ₹1,500 मिलते हैं. लगभग ₹1,875 करोड़ प्रति माह बांटे जाते हैं. वास्तविक सितंबर 2026 भुगतान ₹1,835.09 करोड़ रहा, क्योंकि पात्र लाभार्थियों की सटीक संख्या करीब 1.251 करोड़ है और कुछ मामलों में पेंशन के साथ अंतर राशि आदि की व्यवस्था लागू है. इस हिसाब से मौजूदा दर पर सालाना सीधा भार लगभग ₹22,000 करोड़ है.

202627 में सरकार ने कितना बजट रखा है?

मध्य प्रदेश के 202627 बजट में लाड़ली बहना योजना के लिए ₹23,882 करोड़ का प्रावधान है. बजट दस्तावेज में सटीक राशि ₹23,882.81 करोड़ है. यह प्रदेश के लगभग ₹4.38 लाख करोड़ के कुल बजट का करीब 5.4% बैठता है. सितंबर 2026 तक इस वित्त वर्ष में योजना पर करीब ₹11,300 करोड़ खर्च होने का अनुमान बताया गया है.

शुरुआत में सरकार ने कितना खर्च सोचा था?

योजना जब शुरू हुई थी, तब ₹1,000 मासिक सहायता के हिसाब से सालाना खर्च का अनुमान लगभग ₹12,000 करोड़ था. अब राशि ₹1,500 होने और लाभार्थियों की संख्या 1.25 करोड़ से ज्यादा रहने के कारण मौजूदा सालाना भार करीब ₹22,000 करोड़ तक पहुंच गया है. यानी शुरुआती अनुमान की तुलना में मौजूदा नियमित वार्षिक भार लगभग ₹10 हजार करोड़ ज्यादा है.

योजना पर आगे कितना खर्च होगा?

यह सबसे बड़ा आंकड़ा है. अगस्त 2026 में राज्य कैबिनेट ने लाड़ली बहना योजना को 202627 से 203031 तक जारी रखने की मंजूरी दी. इसके लिए पांच साल में ₹1,14,365 करोड़ खर्च करने की स्वीकृति दी गई है. यानी औसतन करीब ₹22,873 करोड़ प्रति वर्ष. यह वर्तमान करीब ₹22 हजार करोड़ के वार्षिक नियमित भार के आसपास है.

पूरा हिसाब

जून 2023 से सितंबर 2026 तक 40 नियमित किस्तों में ₹65,395.99 करोड़ रु, वर्तमान में 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाएं, हर महीने करीब ₹1,835 करोड़, सालाना मौजूदा भार करीब ₹22 हजार करोड़, 202627 में ₹23,882.81 करोड़ का बजट, और 203031 तक योजना जारी रखने के लिए ₹1,14,365 करोड़ की मंजूरी है.