‘फैमिली ऑफिस’ भारत भर के प्रमुख तीर्थ स्थलों जैसे देवघर, मथुरा, सौराष्ट्र और उडुपी के आसपास हॉस्पिटैलिटी असेट्स में निवेश कर रहे हैं. इससे घरेलू होटल उद्योग के लिए ग्रोक के नए रास्ते खुल रहे हैं. उडुपी में एक मुंबई स्थित ‘फैमिली ऑफिस’ द्वारा लगभग तैयार एक लग्जरी होटल का अधिग्रहण हो, या सालासर बालाजी में ‘आरआर काबेल’ का निवेश भारत के सबसे बड़े तीर्थ स्थलों के आसपास ब्रांडेड होटलों में बड़े परिवारों की पूंजी लग रही है. ‘नोएसिस होटल एडवाइजर्स’ के अनुसार, पिछले 1218 महीनों में प्रमुख धार्मिक स्थलों पर लगभग 2,000 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है. भारत के कुछ सबसे अमीर कारोबारी परिवारों ने इन तीर्थ स्थलों पर अपने भरोसे को हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश के रूप में बदला है.

उडुपी वाली डील में 137 कमरों वाला एक लग्जरी होटल शामिल है, जो लगभग बनकर तैयार है. यह होटल ‘इंडियन होटल्स कंपनी’ के एक प्रीमियम ब्रांड के तहत संचालित होगा. सालासर बालाजी में, एक ‘फैमिली ऑफिस’ 108 कमरों वाली एक प्रॉपर्टी विकसित कर रहा है, जबकि ‘आईटीसी होटल्स’ ने मंदिर के पास छह एकड़ जमीन पर 145 कमरों वाले ‘वेलकमहोटल’ प्रोजेक्ट के लिए समझौता किया है. खाटू श्यामजी में, ‘रॉयल ​​ऑर्किड होटल्स’ ने अग्रवाल परिवार के साथ मिलकर मंदिर से लगभग 2 किमी दूर 120 कमरों वाले एक होटल के लिए करार किया है. ये डील्स पारंपरिक धर्मशालाओं और निजी लॉज से हटकर, ब्रांडेड और पेशेवर तरीके से प्रबंधित होटलों की ओर बढ़ते बदलाव की ओर संकेत हैं. IHCL, ITC Hotels, सरोवर होटल्स और रेडिसन जैसे होटल ऑपरेटर धार्मिक स्थलों वाले बाजारों में अपना विस्तार कर रहे हैं. ‘आरआर काबेल’ के प्रबंध निदेशक महेंद्र काबरा के लिए, सालासर बालाजी में निवेश के पीछे व्यक्तिगत आस्था के साथसाथ व्यावसायिक भरोसा भी है.

धार्मिक यात्राओं की मजबूती

उन्होंने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि मैं सालासर बालाजी में गहरी आस्था रखता हूं और हर साल वहां जाता हूं. वहां एक धर्मशाला बनवाने के बजाय, मैंने सोचा कि सालासर बालाजी में हॉस्पिटैलिटी असेट्स में निवेश करना बेहतर होगा. इस होटल का प्रबंधन ‘सरोवर होटल्स’ द्वारा किया जाएगा. निवेशकों के लिए इसका आकर्षण इस बात में है कि धार्मिक यात्राओं का चलन काफी स्थिर और मजबूत बना रहता है. मुंबई स्थित एक ‘फैमिली ऑफिस’ के प्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मेट्रो शहरों के होटल कॉर्पोरेट साइकिल पर निर्भर होते हैं, जबकि तीर्थस्थलों के होटलों में अच्छे और बुरे, दोनों तरह के समय में मेहमान आते रहते हैं. इस फर्म ने हाल ही में इस क्षेत्र में निवेश किया है.

कई धार्मिक स्थलों पर शुरुआती दौर में ही कदम रखने वाली कंपनी ‘सरोवर होटल्स’ के चेयरमैन अजय बकाया ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि भारत में ‘आस्था’ मांग पैदा करने का सबसे भरोसेमंद जरिया है. उनके अनुसार, इन बाजारों में होटल की ऑक्यूपेंसी काफी अच्छी रहती है, खासकर 80100 कमरों वाले मध्यम श्रेणी के होटलों में. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई ‘फैमिली ऑफिस’ भी ऐसे धार्मिक स्थलों पर संपत्तियों में निवेश करने में विकास की संभावनाएं देखते हैं. इसमें लगने वाली अधिकांश पूंजी राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के उन परिवारों से आती है, जो व्यापार, उद्योग या रियल एस्टेट के क्षेत्रों से जुड़े हैं. ‘नोएसिस होटल एडवाइजर्स’ के अनुसार, एक मिड कैटेगिरी के होटल में 60 करोड़ रुपए तक का निवेश होता है, जबकि बड़े या प्रीमियम होटल के लिए यह निवेश 150 करोड़ रुपए या उससे अधिक हो सकता है.

ऐसे हो रहा है निवेश

‘नोएसिस होटल एडवाइजर्स’ के फाउंडर और सीईओ नंदीवर्धन जैन ने मीडिया रिपोर्ट में कि यह कोई सट्टेबाजी वाला पैसा नहीं है. ये वे परिवार हैं जिन्होंने पिछले एक दशक में अपने शहरों में तीर्थयात्रियों की संख्या दोगुनी होते देखी है. अब वे इसी भरोसे को ब्रांडेड और पेशेवर स्तर की संपत्तियों में बदल रहे हैं. उनकी कंपनी ने इस तरह के कुछ डील्स में सलाह भी दी है. जैन ने आगे कहा कि यह पूंजी धैर्यवान है, स्थानीय है, और इसके पीछे वह जमीन है जो पहले से ही इन परिवारों के पास है. यह संयोजन आज भारत में होटल इक्विटी के सबसे स्थिर स्रोतों में से एक बनाता है. जैन ने यह भी चेतावनी दी कि मजबूत मांग और परिवार के पास अपनी जमीन होने का मतलब यह नहीं है कि वहां होटल का कारोबार सफल ही होगा. उन्होंने कहा कि सिर्फ मंदिर का होना ही किसी होटल के सफल होने की गारंटी नहीं है.

ऐसे हुआ आर्थिक पक्ष बेहतर

बेहतर सड़कें, हवाई अड्डे, एक्सप्रेसवे और तीर्थयात्रा कॉरिडोर की वजह से अब लोग इन जगहों पर सिर्फ एक दिन के लिए नहीं, बल्कि रात रुकने के लिए भी आने लगे हैं. इससे ब्रांडेड हॉस्पिटैलिटी का आर्थिक पक्ष और बेहतर हो गया है. जो होटल चेन अब बड़े शहरों के saturated मार्केट्स से बाहर देख रही हैं, उनके लिए मंदिर वाले शहर मांग का एक बढ़ता हुआ स्रोत हैं, जहां ब्रांडेड होटलों की संख्या अभी भी काफी कम है. विशेषज्ञों का मानना ​​है कि ‘फैमिली ऑफिस’ के लिए यह निवेश ‘आस्था’ पर दांव लगाने जैसा है—जो यात्रा करने का एक ऐसा कारण है जो हमेशा बना रहता है.